सुप्रीम कोर्ट ने हाईकोर्ट के न्यायाधीशों पर लोकपाल के अधिकार-क्षेत्र को प्रभावी करने वाले लोकपाल के आदेश पर रोक लगाई | Current Affairs | Vision IAS
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सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि सभी न्यायाधीश (हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट) संविधान के तहत नियुक्त होते हैं, जिसका अर्थ है कि वे लोकपाल के अधिकार-क्षेत्र से बाहर हैं।

संबंधित मामला व लोकपाल के तर्क:

  • लोकपाल ने अपने हालिया आदेश में हाईकोर्ट के न्यायाधीशों को "लोक सेवक" के रूप में वर्गीकृत किया था और उन्हें लोकपाल और लोकायुक्त अधिनियम, 2013 के तहत अपने अधिकार क्षेत्र में रखा था।
    • हालांकि, इससे पहले लोकपाल ने कहा था कि भारत का मुख्य न्यायाधीश (CJI) और सुप्रीम कोर्ट के अन्य न्यायाधीश इसके अधिकार क्षेत्र में नहीं आते। ऐसा इसलिए, क्योंकि सुप्रीम कोर्ट को संसद के अधिनियम द्वारा स्थापित नहीं किया गया था।
  • लोकपाल के तर्कों का आधार:
    • हाईकोर्ट्स ब्रिटिश कानूनों (जैसे इंडियन हाई कोर्ट्स एक्ट, 1861) के तहत स्थापित किए गए थे और भारतीय संविधान से पहले के हैं।
    • सुप्रीम कोर्ट संविधान के अनुच्छेद 124 के तहत स्थापित किया गया था, जो इसे एक अलग श्रेणी में रखता है।

लोकपाल का अधिकार क्षेत्र (लोकपाल अधिनियम, 2013 की धारा 14 के तहत):

  • पूर्व/ वर्तमान प्रधान मंत्री (परंतु अंतर्राष्ट्रीय संबंध, सुरक्षा, लोक व्यवस्था, परमाणु ऊर्जा और अंतरिक्ष से जुड़े मामलों को छोड़कर)।
    • जांच शुरू करने के लिए लोकपाल की पूर्ण पीठ (अध्यक्ष + सभी सदस्य) के कम-से-कम 2/3 सदस्यों की सहमति आवश्यक होती है।
  • पूर्व/ वर्तमान केंद्रीय मंत्री या संसद के दोनों सदनों के सदस्य।
  • सरकारी कर्मचारी: केंद्र सरकार से जुड़े ग्रुप 'A', 'B', 'C', या 'D' के सरकारी अधिकारी।
  • संस्था, निकाय, प्राधिकरण, कंपनी, ट्रस्ट आदि के अध्यक्ष/ सदस्य/ अधिकारी/ कर्मचारी। 
  • यदि संस्था, निकाय, प्राधिकरण, कंपनी, ट्रस्ट आदि को संसद के अधिनियम द्वारा स्थापित किया गया हो या केंद्र सरकार द्वारा आंशिक/ पूर्ण रूप से वित्त-पोषित या नियंत्रित हो, अथवा

यदि विदेशी अंशदान (विनियमन) अधिनियम, 2010 के तहत 10 लाख रुपये प्रति वर्ष से अधिक का विदेशी अंशदान प्राप्त होता हो।

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