हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड (HAL) को इसरो से ‘लघु उपग्रह प्रक्षेपण यान (SSLV)’ बनाने का अनुबंध मिला | Current Affairs | Vision IAS
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हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड के अलावा अल्फा डिजाइन टेक्नोलॉजीज लिमिटेड और भारत डायनामिक्स लिमिटेड ने अनुबंध प्राप्त करने की बोली लगाई थी। हालांकि, अंत में हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड को ISRO से ट्रांसफर ऑफ टेक्नोलॉजी (ToT) का सौदा मिला। 

  • इस सौदे के तहत HAL लघु उपग्रह प्रक्षेपण यान (SSLV) बनाएगा और इसका संचालन करेगा। 
  • प्रौद्योगिकी हस्तांतरण चरण के दौरान, HAL को इसरो द्वारा किए गए तीन विकासात्मक प्रक्षेपणों की प्रक्रिया को ध्यान में रखते हुए कम-से-कम दो SSLVs संपूर्ण रूप से तैयार करने होंगे।

लघु उपग्रह प्रक्षेपण यान (SSLV)  के बारे में

  • SSLV तीन-चरणों वाला ठोस प्रणोदक रॉकेट है। 
  • इसे 500 किलोग्राम से कम वजन वाले सैटेलाइट्स को 500 किलोमीटर की ऊंचाई पर स्थित समतल कक्षा (Planar orbit) में प्रक्षेपित करने के लिए डिज़ाइन किया गया है।
  • यह कम लागत वाला प्रक्षेपण यान है। यह कम समय में ही दूसरे प्रक्षेपण के लिए तैयार हो जाता है। 
  • यह कई प्रकार के सैटेलाइट्स; जैसे कि स्मॉल, माइक्रो एवं नैनो सैटेलाइट्स को प्रक्षेपित कर सकता है।

भारत द्वारा अंतरिक्ष क्षेत्रक में सुधार

  • अंतरिक्ष क्षेत्रक का उदारीकरण: निजी संस्थाओं को अब सैटेलाइट निर्माण से लेकर प्रक्षेपण सेवाओं तक, एंड-टू-एंड अंतरिक्ष गतिविधियों में शामिल होने की अनुमति दी गई है।
    • अंतरिक्ष क्षेत्रक में 100% प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (FDI) की अनुमति दी गई है।
  • IN-SPACe का निर्माण: भारतीय राष्ट्रीय अंतरिक्ष संवर्धन और प्राधिकरण केंद्र (IN-SPACe) गैर-सरकारी क्षेत्रों की अंतरिक्ष गतिविधियों को बढ़ावा देता है, उन्हें अधिकृत करता है और उनकी निगरानी करता है।
  • भारतीय अंतरिक्ष नीति 2023: यह नीति अंतरिक्ष क्षेत्रक के लिए विनियामक स्पष्टता और लंबे समय के लिए नीतिगत स्थिरता प्रदान करती है। 
  • वेंचर कैपिटल फंड: अंतरिक्ष क्षेत्रक में स्टार्ट-अप्स को वित्त-पोषित करने और निजी निवेश को बढ़ावा देने के लिए 1,000 करोड़ रुपये का एक विशेष फंड स्वीकृत किया गया है। 

भारत में अंतरिक्ष क्षेत्रक का निजीकरण

  • भारत में वर्तमान में अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी में 200 से अधिक स्टार्ट-अप्स सक्रिय हैं। अब तक ISRO और IN-SPACe/ NSIL द्वारा लगभग 478 प्रौद्योगिकी हस्तांतरण  किए जा चुके हैं।  
  • अंतरिक्ष क्षेत्रक में निजी कंपनियों की पहलें 
    • विक्रम-S, निजी कंपनी द्वारा निर्मित भारत का पहला रॉकेट है। इसे 'मिशन प्रारंभ' के तहत लॉन्च किया गया था।
    • IIT मद्रास-इनक्यूबेटेड स्टार्ट-अप अग्निकुल कॉसमॉस ने दुनिया के ऐसे पहले रॉकेट का सफल परीक्षण किया है, जिसमें सिंगल-पीस 3D प्रिंटेड इंजन का प्रयोग किया गया था। 
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