लार्सन एंड टुब्रो (L&T) ने महाराष्ट्र के हिंगोली जिले के औंधा में LIGO निर्मित करने के लिए भारत के परमाणु ऊर्जा विभाग (DAE) से अनुबंध हासिल किया है।
LIGO के बारे में
- उद्देश्य: यह एक इंटरफेरोमीटर आधारित वेधशाला है। इसे गुरुत्वीय तरंगों का पता लगाने के लिए डिज़ाइन किया गया है।
- गुरुत्वीय तरंगें: गुरुत्वीय तरंगें अंतरिक्ष में दो विशाल पिंडों के आपस में टकराने से उत्पन्न होती हैं। ये अति प्रबल व ऊर्जात्मक प्रक्रियाओं से भी उत्पन्न होती हैं। ये तरंगें स्पेस एंड टाइम में लहर (Ripple) उत्पन्न करते हुए स्रोत से दूर सभी दिशाओं में गति करती हैं। जैसे- न्यूट्रॉन तारों या ब्लैक होल का आपस में टकराना या एक-दूसरे की परिक्रमा करना।

- ये ब्रह्मांडीय तरंगें प्रकाश की गति से गमन करती हैं, और अपने साथ अपने मूल स्थान की जानकारी के साथ-साथ गुरुत्वाकर्षण की प्रकृति के साक्ष्य भी लाती हैं।
- इनकी भविष्यवाणी आइंस्टीन के सापेक्षता के सामान्य सिद्धांत (1916) में की गई थी।
- सिद्धांत: LIGO गुरुत्वीय तरंगों के उद्गम को समझने के लिए प्रकाश और अंतरिक्ष के भौतिक गुणों का उपयोग करता है।
- LIGO गुजरने वाली तरंगों के कारण अंतरिक्ष में होने वाले सूक्ष्म परिवर्तनों को मापने के लिए लेजर इंटरफेरोमेट्री का उपयोग करता है।
- प्रत्येक वेधशाला में 4 कि.मी. (2.5 मील) लंबी ‘L’ आकार की दो वैक्यूम टनल होती हैं। प्रत्येक टनल से लेजर बीम को प्रक्षेपित किया जाता है और बीम दर्पण द्वारा परावर्तित होकर पुनर्संयोजित होती हैं। इससे एक इंटरफेरेंस पैटर्न बनता है, जो अंतरिक्ष के खिंचाव या संकुचन को प्रकट करता है।
LIGO-इंडिया के बारे में
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