यह सफल परीक्षण DRDO, ISRO और हवाई वितरण अनुसंधान एवं विकास प्रतिष्ठान (ADRDE) ने आयोजित किया था।
- यह परीक्षण उच्च क्षमता युक्त 'रिबन पैराशूट' के डिजाइन और निर्माण में भारत की विशेषज्ञता को सिद्ध करता है।
गगनयान मिशन के बारे में
- उद्देश्य: गगनयान परियोजना का उद्देश्य मानवयुक्त अंतरिक्ष-उड़ान क्षमता का प्रदर्शन करना है। इस मिशन के तहत 3 सदस्यों के चालक दल को 400 कि.मी. की ऊंचाई पर स्थित निम्न भू-कक्षा में भेजा जाएगा। इस मिशन की अवधि 3 दिन है। उन्हें सुरक्षित रूप से समुद्र में वापस उतारा जाएगा।
- मिशन के प्रमुख घटक:
- ह्यूमन रेटेड लॉन्च व्हीकल (HLVM-3): इसे पहले GSLV Mk-III के नाम से जाना जाता था। यह तीन चरणों वाला रॉकेट है:
- पहला चरण: दो ठोस ईंधन बूस्टर कोर रॉकेट से जुड़े होते हैं।
- दूसरा चरण: इसमें दो विकास-2 तरल ईंधन इंजन होते हैं।
- तीसरा चरण: इसमें CE-20 क्रायोजेनिक इंजन होता है, जो ईंधन और ऑक्सीडाइज़र के रूप में क्रमशः तरल हाइड्रोजन एवं तरल ऑक्सीजन का उपयोग करता है।
- ऑर्बिटल मॉड्यूल: इसके निम्नलिखित दो मुख्य भाग हैं:
- क्रू मॉड्यूल: इसमें पर्यावरण नियंत्रण और जीवन रक्षक प्रणाली (ECLSS) है। यह तापमान, हवा की गुणवत्ता, अपशिष्ट और आग पर नियंत्रण रखती है।
- सर्विस मॉड्यूल: यह एक गैर-दबाव वाला हिस्सा है। इसमें प्रणोदन, विद्युत, थर्मल रेडिएटर और जल व ऑक्सीजन के टैंक हैं।
- ह्यूमन रेटेड लॉन्च व्हीकल (HLVM-3): इसे पहले GSLV Mk-III के नाम से जाना जाता था। यह तीन चरणों वाला रॉकेट है:
- क्रू एस्केप सिस्टम (CES): यह एक सुरक्षा तंत्र है, जिसे प्रक्षेपण के दौरान किसी भी दुर्घटना की स्थिति में अंतरिक्ष यात्रियों का जीवन बचाने के लिए डिज़ाइन किया गया है।

भारत के लिए गगनयान मिशन का महत्त्व
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