भारत की अंतरिक्ष-अर्थव्यवस्था में पिछले पांच वर्षों में निजी क्षेत्र का निवेश 600 मिलियन डॉलर को पार किया | Current Affairs | Vision IAS

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  • स्टार्टअप्स की संख्या में तीव्र वृद्धि: अंतरिक्ष क्षेत्रक में स्टार्टअप्स की संख्या 2019 में एकल अंकों में थीं, जो बढ़कर 2026 की शुरुआत तक 400 से अधिक हो गई। यह निजी क्षेत्र की सुदृढ़ भागीदारी का संकेत है। 
  • विविध क्षेत्रकों में भागीदारी: स्टार्टअप्स अंतरिक्ष क्षेत्रक की पूरी मूल्य श्रृंखला में सक्रिय हैं। इनमें प्रक्षेपण यान, सैटेलाइट एवं पेलोड विनिर्माण, जमीनी अवसंरचना विकास आदि शामिल हैं।
  • निजी क्षेत्र द्वारा पहला रॉकेट प्रक्षेपण: वर्ष 2022 में विक्रम-S निजी क्षेत्र द्वारा निर्मित भारत का पहला रॉकेट बना। इसे "मिशन प्रारंभ" के तहत प्रक्षेपित किया गया।

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अंतरिक्ष अर्थव्यवस्था में निजी क्षेत्र की भागीदारी की स्थिति

  • स्टार्टअप्स की संख्या में तीव्र वृद्धि: अंतरिक्ष क्षेत्रक में स्टार्टअप्स की संख्या 2019 में एकल अंकों में थीं, जो बढ़कर 2026 की शुरुआत तक 400 से अधिक हो गई। यह निजी क्षेत्र की सुदृढ़ भागीदारी का संकेत है। 
  • विविध क्षेत्रकों में भागीदारी: स्टार्टअप्स अंतरिक्ष क्षेत्रक की पूरी मूल्य श्रृंखला में सक्रिय हैं। इनमें प्रक्षेपण यान, सैटेलाइट एवं पेलोड विनिर्माण, जमीनी अवसंरचना विकास आदि शामिल हैं।
  • निजी क्षेत्र द्वारा पहला रॉकेट प्रक्षेपण: वर्ष 2022 में विक्रम-S निजी क्षेत्र द्वारा निर्मित भारत का पहला रॉकेट बना। इसे "मिशन प्रारंभ" के तहत प्रक्षेपित किया गया।

अंतरिक्ष अर्थव्यवस्था में निजी क्षेत्र की भागीदारी का महत्व/आवश्यकता

  • उच्च संवृद्धि क्षमता: भारत की अंतरिक्ष अर्थव्यवस्था वर्ष 2033 तक लगभग 44 अरब डॉलर तक पहुँचने का अनुमान है (विश्व में लगभग 8% हिस्सेदारी)। वर्ष 2040 तक यह बढ़कर 100 अरब डॉलर हो सकती है (विश्व में लगभग 10% हिस्सेदारी)।
  • अवसंरचना विकास: इसमें निजी क्षेत्र के नेतृत्व वाले पृथ्वी अवलोकन उपग्रह समूह (PPP मॉडल पर आधारित), साझा सैटेलाइट बस प्लेटफॉर्म विकास, आदि शामिल हैं।
  • वैश्विक प्रतिस्पर्धा: स्पेसएक्स और ब्लू ओरिजिन जैसी बड़ी कंपनियों के साथ प्रतिस्पर्धा करने के लिए भारत के निजी क्षेत्र को नीतिगत समर्थन और समान अवसर प्रदान करने की आवश्यकता है।
  • विस्तारित पहुंच और बेहतर सेवाएं: निजी क्षेत्र की कंपनियां किफायती सैटेलाइट इंटरनेट, रिमोट सेंसिंग और नेविगेशन सेवाओं को वंचित क्षेत्रों तक पहुंचा सकती है।

अंतरिक्ष क्षेत्रक में निजी क्षेत्र की भागीदारी को बढ़ावा देने हेतु प्रमुख पहलें

  • भारतीय अंतरिक्ष नीति 2023: यह नीति गैर-सरकारी संस्थाओं (NGEs) को अंतरिक्ष गतिविधियों के सभी क्षेत्रों में शुरू से लेकर अंत तक भागीदारी की अनुमति देती है।
  • प्रमुख संगठन: IN-SPACe, एंट्रिक्स कॉर्पोरेशन लिमिटेड, न्यू स्पेस इंडिया लिमिटेड, इंडियन स्पेस एसोसिएशन जैसे संगठन अंतरिक्ष से जुड़े क्रियाकलापों का विनियमन, प्रोत्साहन और व्यावसायीकरण का कार्य करते हैं।
  • प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (FDI): सैटेलाइट निर्माण और संचालन में 74% तक प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (FDI) तथा प्रक्षेपण यान, स्पेसपोर्ट आदि में 49% तक FDI की अनुमति दी गई है।
  • स्पेसटेक इनोवेशन नेटवर्क (SpIN): यह अंतरिक्ष उद्योग में स्टार्टअप्स तथा लघु एवं मध्यम उद्यमों के लिए सार्वजनिक-निजी उद्योग सहयोग मंच है।
  • वित्तीय सहायता: इसमें वेंचर कैपिटल फंड (सिडबी ने 1,000 करोड़ रुपये का फंड संचालित किया), प्रौद्योगिकी अंगीकरण निधि (Technology Adoption Fund), सीड फंड योजना आदि शामिल हैं।  
  • अन्य पहलें: विशेष प्रशिक्षण कार्यक्रम, प्रौद्योगिकी हस्तांतरण कार्यक्रम, आदि।
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सीड फंड योजना (Seed Fund Scheme)

यह प्रारंभिक चरण के स्टार्टअप्स को वित्तीय सहायता प्रदान करने के लिए सरकार या निजी संस्थाओं द्वारा शुरू की गई योजना है, ताकि वे अपने व्यवसाय के शुरुआती विकास को गति दे सकें।

वेंचर कैपिटल फंड (Venture Capital Fund)

यह एक प्रकार का निवेश कोष है जो उच्च विकास क्षमता वाले स्टार्टअप्स और छोटे व्यवसायों में इक्विटी के बदले निवेश करता है। सिडबी द्वारा संचालित 1,000 करोड़ रुपये का फंड अंतरिक्ष क्षेत्र के स्टार्टअप्स के लिए वित्तीय सहायता प्रदान करता है।

स्पेसटेक इनोवेशन नेटवर्क (Spacetech Innovation Network - SpIN)

यह एक मंच है जो अंतरिक्ष उद्योग में स्टार्टअप्स और लघु एवं मध्यम उद्यमों (MSMEs) को नवाचार, विकास और सार्वजनिक-निजी सहयोग के माध्यम से आगे बढ़ने में सहायता प्रदान करता है।

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