भारतीय थल सेना की एक टुकड़ी युद्ध अभ्यास 2025 के 21वें संस्करण में भाग ले रही है। यह भारत-संयुक्त राज्य अमेरिका के बीच एक संयुक्त सैन्य अभ्यास है।
- वर्ष 2004 से यह संयुक्त सैन्य अभ्यास भारत और अमेरिका की सेनाओं के बीच प्रतिवर्ष आयोजित किया जा रहा है।
- इसमें संयुक्त राष्ट्र शांति अभियानों और बहु-क्षेत्रीय चुनौतियों के लिए तैयारी बढ़ाने पर ध्यान केंद्रित किया जाएगा।
शोधकर्ताओं ने गुजरात के कच्छ जिले के ‘माता नो मढ़’ गांव में खोजे गए जारोसाइट को लगभग 55 मिलियन साल पुराना बताया है।
- यह पीला रंग का, लोहा युक्त सल्फेट खनिज है। यह 2004 में नासा के ऑपर्च्युनिटी मिशन द्वारा मंगल ग्रह पर खोजे गए खनिज जैसा ही है।
- पृथ्वी पर इस खनिज का निर्माण तब होता है जब ऑक्सीजन, लोहा, सल्फर और पोटेशियम युक्त कुछ खनिज जल की उपस्थिति में सही मात्रा में परस्पर अभिक्रिया करते हैं।
- जारोसाइट निर्माण आमतौर पर ज्वालामुखी गतिविधि से भी संबंधित होता है।
- पृथ्वी पर जारोसाइट की मौजूदगी से हमें मंगल ग्रह पर रसायनों और खनिजों के विकास के बारे में जानकारी मिलती है।
हाल ही में, सोलर ऑर्बिटर (SO) स्पेस प्रोब ने सोलर एनर्जेटिक इलेक्ट्रॉन (SEE) की उत्पत्ति का पता लगाया है। यह नासा और यूरोपीय अंतरिक्ष एजेंसी की संयुक्त परियोजना है।
सोलर एनर्जेटिक इलेक्ट्रॉन (SEE) के बारे में
- ये इलेक्ट्रॉन सूर्य में उत्पन्न होते हैं, जो लगभग प्रकाश की गति से अंतरिक्ष में उत्सर्जित कर दिए जाते हैं।
- SEE के दो प्रकार हैं:
- इंटेंस सोलर फ्लेयर्स (सूर्य की सतह के छोटे हिस्सों से होने वाले विस्फोट), और
- कोरोनल मास इजेक्शन-CMEs (सूर्य के वायुमंडल से गर्म गैस का विशाल विस्फोट)।
- यह अंतरिक्ष के मौसम को समझने में मदद करता है। इससे सैटेलाइट आधारित संचार, GPS नेविगेशन सिस्टम तथा बिजली आपूर्ति में बाधा उत्पन्न होती है।
रमन रिसर्च इंस्टीट्यूट (RRI) की एक टीम द्वारा ‘प्रत्यूष’ नामक डिजिटल रिसीवर सिस्टम का विकास किया जा रहा है।
- RRI, भारत सरकार के विज्ञान और प्रौद्योगिकी विभाग (DST) द्वारा वित्त पोषित एक स्वायत्त संस्थान है।
प्रत्यूष के बारे में
- प्रत्यूष/ PRATUSH) का पूर्ण रूप है- प्रोबिंग री-आयोनाइजेशन ऑफ द यूनिवर्स यूजिंग सिग्नल फ्रॉम हाइड्रोजन।
- यह चंद्रमा की कक्षा में स्थापित किया जाने वाला एक ‘भविष्य का रेडियोमीटर’ है।
- उद्देश्य: यह पहली बार हमारे ब्रह्मांड के इतिहास को उजागर करेगा कि बिग बैंग के बाद इसमें कैसे परिवर्तन हुए।
- यह हाइड्रोजन परमाणुओं से उत्सर्जित होने वाले कमजोर रेडियो सिग्नल का पता लगाने में मदद करेगा, जिसमें कॉस्मिक डॉन की कई घटनाओं के रहस्य छिपे हैं।
Article Sources
1 sourceकेंद्रीय जनजातीय कार्य मंत्रालय ने आदि वाणी का बीटा संस्करण लॉन्च किया।
‘आदि वाणी’ के बारे में
- यह जनजातीय भाषाओं के लिए भारत का पहला AI-संचालित अनुवाद प्लेटफार्म है।
- इसे जनजातीय और गैर-जनजातीय समुदायों के बीच संचार की कमी की समस्या को दूर करने के लिए जनजातीय गौरव वर्ष के तहत विकसित किया गया है।
- बीटा लॉन्च चरण में यह प्लेटफ़ॉर्म संथाली (ओडिशा), भीली (मध्य प्रदेश), मुंडारी (झारखंड), और गोंडी (छत्तीसगढ़) भाषाओं के अनुवाद की सुविधा प्रदान करता है। कुई और गारो भाषाओं पर काम चल रहा है।
- इस पहल से लुप्तप्राय भाषाओं के डिजिटलीकरण को बढ़ावा मिलेगा; शिक्षा, स्वास्थ्य देखभाल और शासन सुविधाएं जनजातियों की मूल भाषाओं में पहुंचाई जा सकेगी तथा जनजातीय उद्यमिता को बढ़ावा मिलेगा। साथ ही, यह प्लेटफार्म शोधकर्ताओं के लिए ज्ञान संसाधन के रूप में कार्य करेगा।
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1 sourceकेरल ने वायनाड में भारत का पहला विज्ञान-आधारित और समुदाय-संचालित सेन्ना स्पेक्टाबिलिस उन्मूलन अभियान चलाया है।
सेन्ना स्पेक्टाबिलिस के बारे में
- यह एक आक्रामक प्रजाति है और घने, स्टेराइल झाड़ियों के रूप में फैलती है एवं देशी पादप प्रजातियों को नष्ट कर देती है। यह मृदा की रासायनिक संरचना को बदल देती है और शाकाहारी जीवों के लिए खाद्य संकट उत्पन्न करती है।
- यह बहुत ही घना और विस्तृत वितान (क्राउन) वाला वृक्ष है। यह 7 से 18 मीटर तक ऊंचा हो सकता है।
- यह केरल के राज्य पुष्प ‘कैसिया फिस्टुला’ से मिलता-जुलता है। कैसिया फिस्टुला को स्थानीय लोग कनिक्कोन्ना कहते हैं।
- सेन्ना स्पेक्टाबिलिस अमेरिकी उष्णकटिबंधीय क्षेत्रों की स्थानिक प्रजाति है।