सामरिक खनिज खनन परियोजनाओं को EIA के तहत लोक परामर्श से छूट प्रदान की गई | Current Affairs | Vision IAS
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रक्षा मंत्रालय एवं परमाणु ऊर्जा विभाग के अनुरोध पर, पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय (MoEFCC) ने पर्यावरण प्रभाव आकलन (EIA), 2006 प्रक्रिया के तहत राष्ट्रीय सुरक्षा से संबंधित खनन परियोजनाओं को लोक परामर्श से छूट प्रदान की।

  • छूट प्राप्त खनिजों में निम्नलिखित का खनन शामिल है-
    • परमाणु खनिज: जैसे- यूरेनियम, थोरियम, मोनाजाइट आदि; तथा 
    • खान और खनिज (विकास और विनियमन) संशोधन अधिनियम, 2023 के तहत अधिसूचित महत्वपूर्ण/ सामरिक खनिज: जैसे- लिथियम, कोबाल्ट, रेयर अर्थ आदि। 

इन परियोजनाओं को छूट क्यों दी गई?

  • राष्ट्रीय सुरक्षा और रणनीति: ये खनिज भारत की रक्षा, परमाणु ऊर्जा और अन्य संवेदनशील क्षेत्रों से जुड़े हैं।
  • आयात कम करने के लिए: लिथियम, कोबाल्ट, रेयर अर्थ, यूरेनियम जैसे खनिजों की घरेलू उपलब्धता से विदेशों, खासकर चीन पर निर्भरता कम होगी।
  • निवेश आकर्षित करने के लिए: निवेशकों के लिए प्रक्रियाओं को आसान बनाकर और अधिक पूर्वानुमानित व्यवसाय का माहौल बनाकर निवेश को बढ़ावा देना। 

लोक परामर्श में छूट से जुड़े मुद्दे

  • कानूनी प्रावधान कमजोर होना: लोक परामर्श EIA, 2006 के तहत एक वैधानिक जरूरत है।
  • पारदर्शिता और जवाबदेही को कम करना: समुदायों को परियोजनाओं के बारे में पता नहीं चलेगा, जिससे लोकतांत्रिक निगरानी कमजोर होगी।
  • संघर्ष को बढ़ावा देना: आरंभिक भागीदारी की कमी से विरोध, मुकदमेबाजी या अशांति फैल सकती है।
  • EIA मानदंडों का कमजोर होना: बार-बार दी जाने वाली इस तरह की छूट से पर्यावरणीय गवर्नेंस कमजोर हो सकता है।

पर्यावरण प्रभाव आकलन (EIA) के बारे में

  • परिचय: EIA अधिसूचना, 2006 पर्यावरण (संरक्षण) अधिनियम, 1986 के तहत जारी की गई थी।
  • उद्देश्य: प्रस्तावित परियोजनाओं का स्थानीय समुदाय और पारिस्थितिकी पर पड़ने वाले प्रभाव का अनुमान लगाना एवं मूल्यांकन करना, ताकि नकारात्मक प्रभाव की पहचान पहले ही की जा सके।
  • EIA की प्रक्रिया के चरण: EIA प्रक्रिया के प्रमुख चरणों में- जांच (स्क्रीनिंग), परिदृश्यन (स्कोपिंग), लोक परामर्श और मूल्यांकन शामिल हैं।
  • महत्त्व: यह सरकार को यह निर्णय लेने का उपकरण प्रदान करता है कि परियोजना को मंजूरी देनी है, उसमें बदलाव करना है या उसे अस्वीकार करना है। इसका उद्देश्य विकास और पर्यावरण संरक्षण व लोक हित के बीच संतुलन बनाना है।
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