बुर्किना फ़ासो, माली और नाइजर ने अंतर्राष्ट्रीय आपराधिक न्यायालय (ICC) की सदस्यता त्याग की घोषणा की | Current Affairs | Vision IAS
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बुर्किना फासो, माली और नाइजर ने ICC से अपना नाम वापस ले लिया, इस पर नव-औपनिवेशिक पूर्वाग्रह का आरोप लगाया और सीमित अधिकार क्षेत्र, प्रवर्तन की कमी और शक्तिशाली देशों से राजनीतिक प्रतिरोध जैसे मुद्दों को उजागर किया।

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एक संयुक्त बयान में, इन तीनों देशों ने ICC पर आरोप लगाया है कि यह संस्था "साम्राज्यवादी शक्तियों के नियंत्रण में एक नव-औपनिवेशिक दमन का उपकरण" है।

ICC के बारे में 

  • मुख्यालय: हेग, नीदरलैंड। 
  • यह दुनिया का पहला स्थायी अंतर्राष्ट्रीय आपराधिक न्यायालय है।
  • उत्पत्ति: इसे रोम संविधि (Rome Statute) द्वारा स्थापित किया गया है। इस संविधि को 1998 में अपनाया गया था और 2002 में लागू किया गया था।
  • अधिकार-क्षेत्र: ICC गंभीर अपराध करने के आरोपी व्यक्ति की जांच, अभियोजन और सुनवाई करता है, न कि समूहों या देशों की।
    • ICC के अधिकार-क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले अपराध: नरसंहार, मानवता के खिलाफ अपराध, युद्ध अपराध, आक्रामकता के अपराध आदि।
  • सदस्यता: 125 देश सदस्य हैं।
    • भारत, इजरायल, संयुक्त राज्य अमेरिका, रूस और चीन रोम संविधि के पक्षकार (सदस्य) नहीं हैं।
  • वित्त-पोषण: मुख्य रूप से सदस्य देशों द्वारा किया जाता है।
  • निर्णयों का प्रवर्तन: ICC के निर्णय बाध्यकारी होते हैं।

ICC से जुड़ी समस्याएं:

  • पक्षपात का आरोप: इस पर पश्चिमी देशों के हितों की पूर्ति करने वाले और एक नव-औपनिवेशिक या साम्राज्यवादी न्यायालय के रूप में कार्य करने का आरोप है।
    • नव-उपनिवेशवाद: शक्तिशाली देश विकासशील देशों पर आर्थिक, राजनीतिक, सांस्कृतिक या तकनीकी प्रभाव के माध्यम से अप्रत्यक्ष नियंत्रण रखते हैं।
  • सार्वभौमिक अधिकार क्षेत्र की कमी: कई शक्तिशाली राष्ट्र इसके सदस्य नहीं है, जिससे ICC की पहुंच कमजोर हो जाती है।
    • साथ ही, यह केवल उन घटनाओं पर सुनवाई करता है, जो 1 जुलाई 2002 के बाद हुई हैं। 
  • राजनीतिक प्रतिरोध: उदाहरण के लिए- फ्रांस ने इजरायली प्रधान मंत्री के खिलाफ ICC के वारंट को लागू करने से इनकार कर दिया था, क्योंकि वह इजरायल के गैर-सदस्य होने के नाते राष्ट्राध्यक्ष को प्राप्त छूट का हवाला दे रहा था।
  • प्रवर्तन संबंधी सीमाएं: ICC की अपनी कोई पुलिस नहीं है; यह गिरफ्तारी और सहयोग के लिए सदस्य देशों पर निर्भर है।
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