सुप्रीम कोर्ट (SC) ने कहा है कि मानहानि को अपराध की श्रेणी से बाहर करने का समय आ गया है | Current Affairs | Vision IAS
मेनू
होम

यूपीएससी सिविल सेवा परीक्षा के लिए प्रासंगिक राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय विकास पर समय-समय पर तैयार किए गए लेख और अपडेट।

त्वरित लिंक

High-quality MCQs and Mains Answer Writing to sharpen skills and reinforce learning every day.

महत्वपूर्ण यूपीएससी विषयों पर डीप डाइव, मास्टर क्लासेस आदि जैसी पहलों के तहत व्याख्यात्मक और विषयगत अवधारणा-निर्माण वीडियो देखें।

करंट अफेयर्स कार्यक्रम

यूपीएससी की तैयारी के लिए हमारे सभी प्रमुख, आधार और उन्नत पाठ्यक्रमों का एक व्यापक अवलोकन।

ESC

In Summary

सर्वोच्च न्यायालय ने अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता की रक्षा करने, दुरुपयोग को रोकने तथा व्यक्तिगत अधिकारों के साथ प्रतिष्ठा को संतुलित करने के लिए मानहानि को अपराधमुक्त करने का सुझाव दिया है तथा लोकतंत्र और असहमति पर इसके प्रभाव को रेखांकित किया है।

In Summary

हाल ही में हुई एक सुनवाई के दौरान, सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि अब मानहानि को अपराध नहीं माना जाना चाहिए। 

मानहानि (Defamation) क्या है?

  • मानहानि का मतलब है- झूठे और दुर्भावनापूर्ण बयानों को बोलकर, लिखकर या प्रकाशित करके किसी व्यक्ति, समूह या किसी के करीबी रिश्तेदार की साख/ प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचाना।
  • आमतौर पर मानहानि के दो रूप हैं- लिखित/ अपमानजनक लेख से मानहानि और मौखिक/ बदनाम करने से संबंधित मानहानि। 
    • लिखित/ अपमानजनक लेख (Written or Libel) से मानहानि: लिखित शब्दों, चित्रों या प्रकाशित सामग्री के जरिए की गई मानहानि।
    • मौखिक/ बदनाम करने से संबंधित (Oral or Slander) मानहानि: यह गलत बोला गया बयान होता है, जो मौखिक रूप से किसी की प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचाता है।
  • भारत में प्रावधान/स्थिति
    • भारतीय कानून के तहत, पीड़ित व्यक्ति मानहानि के लिए क्रिमिनल अपराध और/या सिविल अपराध दोनों तरह से मुकदमा दायर कर सकता है।
    • वर्तमान में, भारतीय न्याय संहिता की धारा 356 में मानहानि को अपराध घोषित किया गया है। यह पहले IPC (भारतीय दंड संहिता) की धारा 499 के अंतर्गत थी। 

मानहानि को अपराध की श्रेणी से बाहर करने की आवश्यकता क्यों है?

  • अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का उल्लंघन: आपराधिक मानहानि के नियम संविधान के अनुच्छेद 19(1)(a) के तहत अधिकारों को प्रतिबंधित कर सकते हैं, क्योंकि कानूनी दंड का डर सार्वजनिक रूप से विचारों की अभिव्यक्ति को रोक सकता है।
  • असहमति को दबाना: निजी व्यक्तियों द्वारा आलोचकों को डराने के लिए इसका इस्तेमाल किया जा सकता है।
  • अन्य: प्रेस की स्वतंत्रता के लिए खतरा, आदि।

मानहानि को अपराध की श्रेणी से बाहर करने के पक्ष में सिफारिशें और निर्णय

  • विधि आयोग की रिपोर्ट (285वीं रिपोर्ट): इसमें कहा गया था कि प्रतिष्ठा (Reputation) अनुच्छेद 21 का एक अहम हिस्सा है। दूसरों की भावनाओं को ठेस पहुँचाकर किसी और की अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के लिए प्रतिष्ठा के साथ समझौता नहीं किया जा सकता।
  • सुप्रीम कोर्ट ने सुब्रमण्यम स्वामी बनाम भारत संघ (2016) मामले में अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और प्रतिष्ठा की रक्षा के अधिकार के बीच संतुलन स्थापित करते हुए आपराधिक मानहानि को बरकरार रखा।
  • गुजरात राज्य बनाम गुजरात हाई कोर्ट (1998): कोर्ट ने कहा कि जो सम्मान खो गया है या जो जीवन समाप्त हो गया है, उसकी भरपाई नहीं की जा सकती।
Watch Video News Today
Title is required. Maximum 500 characters.

Search Notes

Filter Notes

Loading your notes...
Searching your notes...
Loading more notes...
You've reached the end of your notes

No notes yet

Create your first note to get started.

No notes found

Try adjusting your search criteria or clear the search.

Saving...
Saved

Please select a subject.

Referenced Articles

linked

No references added yet