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ब्राजील में आयोजित हो रहे COP30 में, "ग्लोबल मुटिराओ" पहल को अपनाया गया। यह पहल जीवाश्म ईंधन के उपयोग को चरणबद्ध रीति से समाप्त करने के लिए तत्काल व सामूहिक लामबंदी का आह्वान करती है।

'ग्लोबल मुटिराओ' पहल के बारे में

  • इतिहास: यह एक ब्राजीलियाई और देशज परंपरा के शब्द 'मुटिराओ' से प्रेरित है। इसका अर्थ साझा लक्ष्यों के लिए सामुदायिक श्रम है। इसे COP30 प्रेसीडेंसी द्वारा एक वैश्विक जलवायु लामबंदी उपकरण के रूप में अपनाया गया है।
  • अवधारणा: यह जलवायु कार्रवाई को पेरिस समझौते के 1.5°C लक्ष्य के अनुरूप एक सहकारी व समग्र समाज के प्रयास के रूप में प्रस्तुत करती है।
  • दायरा: यह कार्यान्वयन, वित्त-पोषण एवं प्रौद्योगिकी के उपयोग को गति देने के लिए सरकारों, शहरों, निजी क्षेत्रक और नागरिक समाज से भागीदारी की अपेक्षा करती है।
  • प्लेटफ़ॉर्म: यह भागीदारी को व्यापक बनाने और स्थानीय कार्रवाई को वैश्विक लक्ष्यों से जोड़ने के लिए मालोका डिजिटल हब जैसे उपकरणों का उपयोग करती है।

हाल ही में, 26 अग्रणी ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म्स ने डार्क पैटर्न्स को खत्म करने के लिए अनुपालन की घोषणा की।

  • इन प्लेटफॉर्म्स ने स्वेच्छा से स्व-घोषणा पत्र प्रस्तुत किए हैं, जो डार्क पैटर्न की रोकथाम और विनियमन के लिए दिशा-निर्देश, 2023 के अनुपालन की पुष्टि करते हैं।

डार्क पैटर्न्स के बारे में

  • परिभाषा: ये भ्रामक ऑनलाइन डिज़ाइन युक्तियां हैं, जो उपयोगकर्ताओं को अनजाने में ऐसे कार्य करने के लिए गुमराह करती हैं, जो वे नहीं करना चाहते थे, जैसे कि झूठी तात्कालिकता (false urgency) या बास्केट स्नीकिंग (basket sneaking) आदि।
  • विनियमन: डार्क पैटर्न्स की डार्क पैटर्न्स की रोकथाम और विनियमन के लिए दिशा-निर्देश, 2023 के तहत पहचान की गई है व निषिद्ध किया गया है। इन दिशा-निर्देशों को उपभोक्ता कार्य विभाग ने जारी किया है। 

केंद्र सरकार ने अब उन सभी भारतीय जहाजों के लिए साइन-ऑन, साइन-ऑफ़ और शोर लीव पास (SLP) नियमों को समाप्त कर दिया है, जो अनन्य रूप से भारतीय जल क्षेत्र में ही परिचालन करते हैं।

नियमों को हटाने के पीछे कारण

  • शोर लीव पास (SLP) नियम: इसके तहत नाविकों को SLP प्राप्त करने और उसके विस्तार के लिए आव्रजन कार्यालयों (Immigration Offices) में स्वयं उपस्थित होना पड़ता था। उन्हें प्रत्येक 10 दिनों में ऐसा करना पड़ता था। इसके कारण परिचालन में देरी होती थी और जहाज पर चालक दल के कर्तव्यों में बाधा आती थी।

भारतीय पोत परिवहन जहाजों के विकास को बढ़ावा देने वाली अन्य पहलें निम्नलिखित हैं:

  • पहले अस्वीकार करने का अधिकार (Right of First Refusal: ROFR);
  • भारतीय पोत परिवहन कंपनियों को सब्सिडी सहायता;
  • जहाज निर्माण वित्तीय सहायता नीति आदि।

तुर्की UNFCCC COP31 की मेजबानी करेगा और ऑस्ट्रेलिया इसकी अध्यक्षता करेगा।

जलवायु परिवर्तन पर संयुक्त राष्ट्र फ्रेमवर्क अभिसमय (UNFCCC) के पक्षकारों के सम्मेलन (COP) के बारे में

  • COP, UNFCCC का सर्वोच्च निर्णय लेने वाला निकाय है।
  • COP वार्षिक सम्मेलन होते हैं, जहां UNFCCC के सदस्य देश प्रगति का आकलन करते हैं, समझौतों पर वार्ता करते हैं और जलवायु परिवर्तन से निपटने के लिए प्रतिबद्धताओं को परिष्कृत करते हैं।
  • COP का एक प्रमुख कार्य पक्षों द्वारा प्रस्तुत राष्ट्रीय संचार और उत्सर्जन सूची {जैसे- राष्ट्रीय स्तर पर निर्धारित योगदान (NDCs)} की समीक्षा करना होता है।
  • COP 1: यह जर्मनी के बर्लिन में 1995 में आयोजित किया गया था।

ब्राजील के बेलेम (Belém) में COP30 के दौरान भारत ने संयुक्त क्रेडिटिंग तंत्र (JCM) को न्यायसंगत और मापनीय वैश्विक जलवायु कार्रवाई के लिए एक प्रमुख उपकरण माना। 

संयुक्त क्रेडिटिंग तंत्र (JCM) के बारे में

  • इतिहास: इसकी शुरुआत जापान ने 2013 में की थी। इसे द्विपक्षीय क्रेडिटिंग भागीदारी के माध्यम से कम कार्बन उत्सर्जक प्रौद्योगिकियों को बढ़ावा देने के लिए शुरू किया गया था।
  • उद्देश्य: जापानी संस्थाओं द्वारा निवेश के माध्यम से अग्रणी डीकार्बोनाइजिंग प्रौद्योगिकियों व अवसंरचना आदि के प्रसार को सुगम बनाना, जिससे भागीदार देशों में ग्रीनहाउस गैस (GHG) उत्सर्जन में कमी लाने या उसे हटाने और सतत विकास में योगदान मिले।
  • भागीदारी: अब यह भारत-जापान सहयोग सहित 31 भागीदार देशों और 280 से अधिक परियोजनाओं तक फैल चुका है।
  • फ्रेमवर्क: यह पेरिस समझौते के अनुच्छेद 6 के तहत कार्य करता है। यह अनुच्छेद पारदर्शी क्रेडिट साझाकरण और वित्त जुटाने को सक्षम बनाता है।
  • फोकस क्षेत्र: भंडारण के साथ नवीकरणीय ऊर्जा, ग्रीन हाइड्रोजन/ अमोनिया, सतत विमानन ईंधन, बायोगैस और हार्ड-टू-अबेट क्षेत्रक।
  • हार्ड-टू-अबेट क्षेत्रक: ये ऐसे क्षेत्रक होते हैं, जिनसे ग्रीन हाउस गैस उत्सर्जन को कम करना कठिन होता है, जैसे-इस्पात क्षेत्रक। 

भारतीय खाद्य संरक्षा और मानक प्राधिकरण (FSSAI) ने राज्यों एवं संघ राज्यक्षेत्रों को 'ORS' शब्द का उपयोग करके विपणन किए जा रहे पेय पदार्थों और समान उत्पादों को बाजार से हटाने का निर्देश दिया।

ORS के बारे में

  • परिचय: 'ORS' शब्द अनन्य रूप से WHO-अनुशंसित ओरल रिहाइड्रेशन साल्ट्स से जुड़ा है, जो कि दवा उत्पाद हैं।
  • उद्देश्य: यह एक सरल व सस्ता ग्लूकोज इलेक्ट्रोलाइट घोल है। इसका उपयोग तीव्र अतिसार रोगों (acute diarrhoeal diseases) से होने वाले निर्जलीकरण (dehydration) को रोकने व उपचार करने के लिए किया जाता है। 
    • तीव्र अतिसार रोग विकासशील देशों में बाल मृत्यु दर का एक प्रमुख कारण है।
  • WHO अनुशंसित ORS की संरचना: सोडियम क्लोराइड, ग्लूकोज (एनहाइड्रस), पोटेशियम क्लोराइड, और ट्राइसोडियम साइट्रेट (डाईहाइड्रेट)।
  • कार्य:
    • ग्लूकोज: सोडियम और जल के अवशोषण (absorption) को बढ़ाता है।
    • सोडियम और पोटेशियम: आवश्यक इलेक्ट्रोलाइट्स की कमी को पूरा करते हैं।
    • साइट्रेट: निर्जलीकरण से संबंधित अम्लरक्तता (acidosis) को ठीक करने में मदद करता है।

फार्माकोजीनोमिक्स किसी व्यक्ति की आनुवंशिक प्रोफ़ाइल का उपयोग करके अधिकतम सुरक्षा और प्रभावशीलता के लिए दवाओं के प्रिस्क्रिप्शन को अनुकूलित करता है। इस प्रकार यह परिशुद्ध चिकित्सा (Precision Medicine) में क्रांति ला रहा है।

फार्माकोजेनोमिक्स के बारे में

  • परिभाषा: यह फार्माकोलॉजी (दवाओं का अध्ययन) और जीनोमिक्स (जीनोम का अध्ययन) का मिश्रण है। इससे यह अध्ययन किया जा सकता है कि जीन किसी व्यक्ति की दवाओं के प्रति प्रतिक्रिया को कैसे प्रभावित करते हैं।
  • उद्देश्य: यह अनुमान लगाने में मदद करता है कि कौन-सी दवाएं प्रभावी होंगी, कौन-सी काम नहीं कर सकेंगी, और कौन-सी प्रतिकूल प्रतिक्रियाएं पैदा करेंगी।
  • भविष्य की संभावना: यह "सही दवा, सही खुराक, सही रोगी" के दृष्टिकोण का मार्गदर्शन करके परिशुद्ध चिकित्सा का समर्थन करता है।
  • सुरक्षा: यह उन रोगियों की पहचान करके प्रतिकूल दवा प्रतिक्रियाओं (ADRs) को काफी कम करता है, जो दवा की विषाक्तता या खराब प्रभावकारिता के प्रति संवेदनशील हैं। 
  • चुनौतियां: इस तक पहुंच, विविध आबादी के डेटा की उपलब्धता, और नैदानिक ​​अभ्यास (clinical practice) में इसका समेकन अभी भी इसे व्यापक रूप से अपनाने को सीमित करते हैं।

संयुक्त राज्य अमेरिका ने भारत को 93 मिलियन डॉलर मूल्य के जैवलिन एंटी-टैंक मिसाइल सिस्टम, एक्सकैलिबर गाइडेड आर्टिलरी म्यूनिशन और संबंधित उपकरणों की बिक्री को मंजूरी प्रदान की।

जैवलिन मिसाइल सिस्टम (FGM-148 Javelin) के बारे में

  • निर्माता: इसका निर्माण लॉकहीड मार्टिन और रेथियॉन के एक संयुक्त उपक्रम द्वारा किया जाता है।
  • विशेषता: यह “दागो और भूल जाओ” (fire-and-forget) सिद्धांत पर आधारित टैंक-रोधी निर्देशित मिसाइल है। इसे सैनिक अपने कंधे पर रखकर दाग सकते हैं। यह मध्यम दूरी की मिसाइल है। 
  • क्षमता: यह मुख्य युद्धक टैंकों और अन्य बख्तरबंद खतरों को टॉप-अटैक या डायरेक्ट मोड्स का उपयोग करके लक्षित करती है।
    • इसका बख्तरबंद वाहनों, बंकरों और गुफाओं सहित कई लक्ष्यों के खिलाफ उपयोग किया जा सकता है।

एक्सकैलिबर गाइडेड आर्टिलरी म्यूनिशन के बारे में

  • निर्माता: इसे रेथियॉन मिसाइल्स एंड डिफेंस (RTX) द्वारा एक सटीक-निर्देशित 155 मिमी आर्टिलरी राउंड के रूप में विकसित किया गया है।
    • क्षमता: यह लंबी दूरी पर सटीक हमला करने की क्षमता प्रदान करता है। इससे संपार्श्विक क्षति (collateral damage) कम होती है यानी सामान्य नागरिकों या गैर-युद्धक सैनिकों को बहुत कम हानि होती है। साथ ही, रसद संबंधी लागत में भी कमी आती है। 
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