लोक सभा में “विकसित भारत- जी राम जी विधेयक” (Viksit Bharat – G RAM G Bill) प्रस्तुत किया गया | Current Affairs | Vision IAS
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लोकसभा में पेश किए गए “विकसित भारत-ग्रामीण विकास बिल” का मकसद 2025 तक MGNREGA की जगह ज़्यादा रोज़गार गारंटी, इंफ्रास्ट्रक्चर पर ध्यान, डिजिटल मॉनिटरिंग और ग्रामीण विकास के लिए बेहतर प्लानिंग लाना है।

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विकसित भारत-रोजगार एवं आजीविका के लिए गारंटी मिशन (ग्रामीण) या VB–G RAM G विधेयक, 2025 महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम (MGNREGA), 2005 का स्थान लेगा।

  • राज्य सरकारें इस विधेयक के अधिनियम बन जाने के 6 महीने के भीतर इसके अनुरूप एक योजना अधिसूचित करेंगी।

विधेयक की मुख्य विशेषताओं पर एक नजर

  • रोजगार की गारंटी: प्रत्येक ग्रामीण परिवार को अकुशल शारीरिक श्रम के लिए रोजगार की गारंटी 100 दिनों से बढ़ाकर 125 दिन प्रति वित्त वर्ष कर दी गई है।
    • राज्य सरकारें अब फसल बुवाई और कटाई के मौसम के दौरान कृषि श्रमिकों की उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए इस योजना को अधिकतम 60 दिनों की अवधि हेतु निलंबित कर सकती हैं।
  • स्थायी संपत्ति निर्माण: प्राथमिकता वाले चार विषयों पर ध्यान दिया जाएगा। ये हैं- जल सुरक्षा, मुख्य ग्रामीण अवसंरचना, आजीविका संबंधी अवसंरचना, और चरम मौसम की घटनाओं के लिए विशेष कार्य।
  • नियोजन संरचना:
    • ग्राम पंचायतों द्वारा तैयार की गई विकसित ग्राम पंचायत योजनाओं (VGPPs) को पीएम गति शक्ति के साथ एकीकृत किया जाएगा।
      • राष्ट्रीय स्तर पर समन्वित ग्रामीण अवसंरचना योजना निर्माण के लिए इन VGPPs को विकसित भारत-राष्ट्रीय ग्रामीण अवसंरचना स्टैक (VB-NRIS) के माध्यम से संकलित किया जाएगा।
    • पंचायतों को उनके विकास स्तर के आधार पर ग्रेडिंग दी जाएगी।
      • क्षेत्रीय असमानताओं को कम करने के लिए निम्न प्रदर्शन करने वाली पंचायतों को अधिक आवंटन दिया जाएगा।
  • संस्थागत निरीक्षण:
    • केंद्रीय और राज्य ग्रामीण रोजगार गारंटी परिषदें: ये योजना के कार्यान्वयन की समीक्षा व निगरानी करेंगी तथा परामर्श प्रदान करेंगी।
    • राष्ट्रीय और राज्य स्तरीय संचालन समितियां: ये वित्तीय आवंटन, मंत्रालयों के बीच समन्वय तथा रणनीतिक निरीक्षण पर सिफारिशें प्रदान करेंगी।
  • पारदर्शिता और निगरानी: डिजिटलीकरण पर ध्यान दिया जाएगा (जैसे- बॉयोमीट्रिक प्रमाणीकरण, AI-सक्षम एनालिटिक्स आदि); ग्राम सभा द्वारा सामाजिक लेखा परीक्षा (Social Audit) की जाएगी और ब्लॉक व जिला स्तर पर शिकायत निवारण की व्यवस्था की जाएगी।
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