'मानवाधिकारों के लिए वैश्विक गठबंधन' (Global Alliance for Human Rights) को वर्ष 2028 में 'मानवाधिकारों की सार्वभौम घोषणा' (UDHR) की 80वीं वर्षगांठ तक आयोजित होने वाले एक दीर्घकालिक प्रयास के रूप में शुरू किया गया है।
- 'मानवाधिकारों की सार्वभौम घोषणा' को वर्ष 1948 में अपनाया गया था। यह संयुक्त राष्ट्र का एक ऐतिहासिक घोषणा-पत्र है। यह घोषणा-पत्र उन मूल अधिकारों और स्वतंत्रताओं को निर्धारित करता है जिनके हकदार सभी व्यक्ति हैं, भले ही उनकी राष्ट्रीयता, नृजातीयता, लिंग, धर्म या कोई अन्य स्थिति कुछ भी हो।
'मानवाधिकारों के लिए वैश्विक गठबंधन' के बारे में
- लक्ष्य: एक ऐसे भविष्य का निर्माण करना जहां सरकारें जवाबदेह हों, समाज समावेशी हों, अर्थव्यवस्थाएं न्यायसंगत हों; जहाँ नवाचार (इनोवेशन) इंसान को प्राथमिकता दे, तथा एक-दूसरे और पृथ्वी के प्रति हमारे संबंध सम्मान पर आधारित हों।
- उद्देश्य: निर्णय लेने की प्रक्रिया के केंद्र में मानवाधिकार के मुद्दों को रखना। (इस पहल के तहत किए जाने वाले प्रयासों को इन्फोग्राफिक में देखिए।)
मूल सिद्धांत
- उद्देश्य-आधारित: यह एक सतत वैश्विक प्रयास है, जिसका तीन वर्षीय प्रमुख पड़ाव 10 दिसंबर, 2028 को सार्वभौमिक मानवाधिकार घोषणा (UDHR) की 80वीं वर्षगांठ के अवसर पर होगा।
- समावेशी: विभिन्न क्षेत्रों की सरकारों और क्षेत्रकों (सेक्टर्स) के गैर-राज्य अभिकर्ताओं (नॉन स्टेट एक्टर्स) को शामिल किया जाएगा। इसमें लैंगिक समानता तथा सभी आयु, पृष्ठभूमि और पहचान के लोगों की भागीदारी सुनिश्चित की जाएगी।

- कार्य-उन्मुख: सहयोगात्मक और रचनात्मक गतिविधियों के माध्यम से मापने योग्य या दृश्य परिवर्तन लाना।
- प्रणालियों का निर्माण: मानवाधिकार तंत्रों, संस्थानों और नेटवर्क को सुदृढ़ करना और इन्हें आपस में जोड़ना।
- लोक-विमर्श बदलना: सुलभ भाषा का उपयोग करना, नए लोगों तक पहुँचना और नवीन दृष्टिकोणों व साझेदारियों को अपनाना।
- तीन मार्गदर्शक सिद्धांत:
- परिकल्पना: एक बेहतर भविष्य की कल्पना करना।
- संवाद : समावेशी परिचर्चाओं को बढ़ावा देना।
- कार्यवाही : प्रतिबद्धताओं को ठोस कार्यवाही में बदलना।