यह एडवाइजरी ट्रांसजेंडर व्यक्तियों की शिक्षा, स्वास्थ्य-देखभाल, संपत्ति और विधिक अधिकारों से संबंधित चिंताओं को रेखांकित करती है। ध्यातव्य है कि एडवाइजरी 1.0 वर्ष 2023 में जारी की गई थी।
एडवाइजरी के मुख्य बिंदु:
- विशिष्ट श्रेणियों का समावेश: जनगणना और सर्वेक्षणों में ‘इंटरसेक्स’, ‘ट्रांसमैन’ आदि को अलग श्रेणियों के रूप में शामिल करने की सिफारिश की गई है, और इन्हें ‘ट्रांसजेंडर व्यक्ति’ श्रेणी से अलग रखा जाएगा।
- इंटरसेक्स: संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार उच्चायुक्त कार्यालय के अनुसार, इंटरसेक्स व्यक्ति वे होते हैं जो ऐसे जैविक लक्षणों (जैसे प्रजनन अंग, गुणसूत्र संरचना, शारीरिक बनावट आदि) के साथ जन्म लेते हैं, जो सामान्य पुरुष या महिला की पारंपरिक श्रेणियों में पूरी तरह फिट नहीं होते।
- ट्रांसमैन: ट्रांसमैन वह व्यक्ति होता है जिसे जन्म के समय महिला माना गया था, लेकिन उसकी लैंगिक पहचान पुरुष की होती है।
प्रमुख सिफारिशें:
- विधिक सुधार: स्व-पहचानी गई लैंगिक पहचान को मान्यता सुनिश्चित करने के लिए जन्म और मृत्यु पंजीकरण अधिनियम 1969, किशोर न्याय अधिनियम 2015 तथा उत्तराधिकार संबंधी कानूनों की समीक्षा करनी चाहिए।
- शैक्षिक समावेशन: बिना किसी चिकित्सकीय प्रमाण की आवश्यकता के, स्वयं की लैंगिक पहचान के आधार पर संस्थानों में प्रवेश देने तथा जेंडर-न्यूट्रल सुविधाएं उपलब्ध कराने की व्यवस्था की जानी चाहिए।
- उत्तराधिकार का अधिकार: बिना किसी भेदभाव के उत्तराधिकार, संपत्ति हस्तांतरण और आवास में समान अधिकार दिए जाने चाहिए।
- इंटरसेक्स बच्चों का संरक्षण: जीवन रक्षक स्थितियों को छोड़कर, उन पर किसी भी जबरन या गैर-सहमति वाली चिकित्सा प्रक्रियाओं पर रोक लगानी चाहिए।
- विधिक सहायता: भेदभाव, हिंसा या हिरासत में दुर्व्यवहार का सामना कर रहे ट्रांसजेंडर और लैंगिक विविधता वाले व्यक्तियों के लिए विशेष कानूनी सहायता केंद्र, हेल्पलाइन और स्वतंत्र शिकायत निवारण तंत्र की स्थापना करनी चाहिए।
- अन्य सिफारिशें: ट्रांसजेंडर-समावेशी सामुदायिक आश्रय गृह स्थापित करना, शिक्षकों के लिए जेंडर-संवेदनशीलता प्रशिक्षण आयोजित करना, आदि।
भारत में ट्रांसजेंडर व्यक्ति
सामना की जाने वाली चुनौतियां:
|