राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (NHRC) ने ट्रांसजेंडर व्यक्तियों के कल्याण हेतु राज्यों और संघ राज्य क्षेत्रों को 'एडवाइजरी 2.0' जारी की | Current Affairs | Vision IAS

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In Summary

  • परामर्श में ट्रांसजेंडर व्यक्तियों की शिक्षा, स्वास्थ्य, संपत्ति और कानूनी अधिकारों के लिए चिंताओं को उजागर किया गया है, जिसमें यह उल्लेख किया गया है कि 2026 का अधिनियम स्व-अनुभूत पहचानों को बाहर रखता है।
  • चुनौतियों में ट्रांस-पुरुषों और गैर-बाइनरी व्यक्तियों का बहिष्कार, कम साक्षरता (56.07%) और कम औपचारिक रोजगार (6%) शामिल हैं।
  • परामर्श में सर्वेक्षणों में 'इंटरसेक्स' और 'ट्रांसमेन' को शामिल करने, कानूनी सुधारों, स्व-पहचानित लिंग के आधार पर शैक्षिक समावेशन और इंटरसेक्स बच्चों के संरक्षण की सिफारिश की गई है।

In Summary

यह एडवाइजरी ट्रांसजेंडर व्यक्तियों की शिक्षा, स्वास्थ्य-देखभाल, संपत्ति और विधिक अधिकारों से संबंधित चिंताओं को रेखांकित करती है। ध्यातव्य है कि एडवाइजरी 1.0 वर्ष 2023 में जारी की गई थी।

एडवाइजरी के मुख्य बिंदु:

  • विशिष्ट श्रेणियों का समावेश: जनगणना और सर्वेक्षणों में ‘इंटरसेक्स’, ‘ट्रांसमैन’ आदि को अलग श्रेणियों के रूप में शामिल करने की सिफारिश की गई है, और इन्हें ‘ट्रांसजेंडर व्यक्ति’ श्रेणी से अलग रखा जाएगा।
    • इंटरसेक्स: संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार उच्चायुक्त कार्यालय के अनुसार, इंटरसेक्स व्यक्ति वे होते हैं जो ऐसे जैविक लक्षणों (जैसे प्रजनन अंग, गुणसूत्र संरचना, शारीरिक बनावट आदि) के साथ जन्म लेते हैं, जो सामान्य पुरुष या महिला की पारंपरिक श्रेणियों में पूरी तरह फिट नहीं होते।
    • ट्रांसमैन: ट्रांसमैन वह व्यक्ति होता है जिसे जन्म के समय महिला माना गया था, लेकिन उसकी लैंगिक पहचान पुरुष की होती है।

प्रमुख सिफारिशें:

  • विधिक सुधार: स्व-पहचानी गई लैंगिक पहचान को मान्यता सुनिश्चित करने के लिए जन्म और मृत्यु पंजीकरण अधिनियम 1969किशोर न्याय अधिनियम 2015 तथा उत्तराधिकार संबंधी कानूनों की समीक्षा करनी चाहिए।
  • शैक्षिक समावेशन: बिना किसी चिकित्सकीय प्रमाण की आवश्यकता के, स्वयं की लैंगिक पहचान के आधार पर संस्थानों में प्रवेश देने तथा जेंडर-न्यूट्रल सुविधाएं उपलब्ध कराने की व्यवस्था की जानी चाहिए।
  • उत्तराधिकार का अधिकार: बिना किसी भेदभाव के उत्तराधिकार, संपत्ति हस्तांतरण और आवास में समान अधिकार दिए जाने चाहिए।
  • इंटरसेक्स बच्चों का संरक्षण: जीवन रक्षक स्थितियों को छोड़कर, उन पर किसी भी जबरन या गैर-सहमति वाली चिकित्सा प्रक्रियाओं पर रोक लगानी चाहिए।
  • विधिक सहायता: भेदभाव, हिंसा या हिरासत में दुर्व्यवहार का सामना कर रहे ट्रांसजेंडर और लैंगिक विविधता वाले व्यक्तियों के लिए विशेष कानूनी सहायता केंद्र, हेल्पलाइन और स्वतंत्र शिकायत निवारण तंत्र की स्थापना करनी चाहिए।
  • अन्य सिफारिशें: ट्रांसजेंडर-समावेशी सामुदायिक आश्रय गृह स्थापित करना, शिक्षकों के लिए जेंडर-संवेदनशीलता प्रशिक्षण आयोजित करना, आदि। 

भारत में ट्रांसजेंडर व्यक्ति

  • ट्रांसजेंडर व्यक्ति (अधिकारों का संरक्षण) संशोधन अधिनियम, 2026: इसमें ट्रांसजेंडर व्यक्तियों को सामाजिक-सांस्कृतिक पहचान (जैसे किन्नर, हिजड़ा, अरावणी, जोगता, हिजड़ा समुदाय), जैविक भिन्नताओं वाले व्यक्तियों, या ऐसे लोगों के रूप में परिभाषित किया गया है जिन्हें ट्रांसजेंडर पहचान अपनाने के लिए मजबूर किया गया हो।
    • इसमें स्वयं द्वारा महसूस की गई लैंगिक पहचान (Self-perceived gender identity) या यौन अभिविन्यास (sexual orientation) को शामिल नहीं किया गया है।
  • स्थिति: 2011 की जनगणना के अनुसार, लगभग 4.88 लाख लोगों ने स्वयं को 'थर्ड जेंडर’ के रूप में पहचाना था।

सामना की जाने वाली चुनौतियां:

  • बहिष्करण: 2026 का अधिनियम ट्रांसमैन, नॉन-बाइनरी और जेंडर-क्वियर व्यक्तियों को कानूनी संरक्षण के दायरे से बाहर रख दिया है।
  • शिक्षा: ट्रांसजेंडर व्यक्तियों की साक्षरता दर 56.07% है, जो राष्ट्रीय औसत (74.04%) से बहुत कम है।
  • रोजगार: केवल 6% ट्रांसजेंडर व्यक्ति ही औपचारिक रूप से नियोजित हैं।
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जेंडर-क्वियर (Gender-queer)

एक व्यापक शब्द जिसका उपयोग उन व्यक्तियों द्वारा किया जाता है जो पारंपरिक लिंग श्रेणियों में फिट नहीं होते हैं। यह नॉन-बाइनरी से मिलता-जुलता है।

नॉन-बाइनरी (Non-binary)

ऐसे व्यक्ति जिनकी लैंगिक पहचान विशुद्ध रूप से पुरुष या महिला के रूप में वर्गीकृत नहीं की जाती है, बल्कि वे इन दोनों के बीच, दोनों के संयोजन में, या इनसे पूरी तरह भिन्न हो सकते हैं।

थर्ड जेंडर (Third Gender)

यह एक व्यापक शब्द है जिसका उपयोग उन व्यक्तियों के लिए किया जाता है जो पारंपरिक पुरुष या महिला की बाइनरी श्रेणियों से बाहर हैं। 2011 की जनगणना के अनुसार, भारत में लगभग 4.88 लाख लोगों ने स्वयं को 'थर्ड जेंडर' के रूप में पहचाना था।

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