राष्ट्रीय उद्यमिता अभियान का उद्देश्य उद्यम संवर्धन पर 50,000 सामुदायिक संसाधन व्यक्तियों (CRPs) को प्रशिक्षित करना तथा DAY-NRLM के तहत 50 लाख स्वयं सहायता समूह (SHGs) सदस्यों को उद्यम विकास प्रशिक्षण (EDP) प्रदान करना है।
ग्रामीण उद्यमिता का महत्त्व
- महिला सशक्तीकरण: उद्यमिता में लैंगिक अंतराल को समाप्त करने से वैश्विक सकल घरेलू उत्पाद (GDP) में 1.5 ट्रिलियन अमेरिकी डॉलर की वृद्धि हो सकती है।
- आय का विविधीकरण: महिलाएं अब पारंपरिक कृषि श्रम से निकलकर गैर-कृषि गतिविधियों की ओर बढ़ रही हैं। ये अब ग्रामीण आय का दो-तिहाई हिस्सा उत्पन्न करती हैं।
- गरीबी उन्मूलन और सामाजिक गतिशीलता: SBI की एक रिपोर्ट के अनुसार, वित्त वर्ष 2019 व 2024 के बीच 65% ग्रामीण SHG सदस्यों की सापेक्ष आय में वृद्धि हुई है।
- सामुदायिक समुत्थानशीलता (Resilience): महिला नेतृत्व वाले उद्यम स्थानीय रोजगार को बढ़ावा देकर, ग्रामीण-शहरी पलायन और अनियोजित शहरीकरण को कम करने में मदद करते हैं।
ग्रामीण उद्यमिता को बढ़ावा देने के लिए सरकारी उपाय
- वित्तीय सहायता: 'प्रधान मंत्री मुद्रा योजना' बिना किसी जमानत (collateral-free) के ऋण प्रदान करती है।
- लक्षित योजनाएं: 'उद्योगिनी योजना' (कर्नाटक सरकार) और 'महिला कॉयर योजना' विशेष रूप से महिलाओं के लिए वित्तीय सहायता, प्रशिक्षण व सब्सिडी वाले उपकरण प्रदान करती हैं।
- नाबार्ड (NABARD) के कार्यक्रम: सूक्ष्म उद्यमिता विकास कार्यक्रम (MEDPs); आजीविका एवं उद्यम विकास कार्यक्रम (LEDPs) आदि।
- उद्भवन (Incubation) और प्रशिक्षण: MSME मंत्रालय की ASPIRE (नवाचार, ग्रामीण उद्योग एवं उद्यमिता को प्रोत्साहन देने की योजना) योजना, जिसका उद्देश्य ग्रामीण क्षेत्रों में नवाचार व उद्यमिता को बढ़ावा देना है। यह योजना अब तक 1.16 लाख से अधिक लाभार्थियों को प्रशिक्षित कर चुकी है।
- लखपति दीदी पहल: यह योजना DAY-NRLM के अंतर्गत संचालित की जा रही है। इसके तहत सरकार का लक्ष्य उद्यम संवर्धन के माध्यम से 3 करोड़ SHG सदस्यों को वार्षिक कम-से-कम ₹1 लाख आय अर्जित करने में सक्षम बनाना है।
दीनदयाल अंत्योदय योजना – राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (DAY-NRLM) के बारे में
|