पिछले दशक के दौरान ग्रामीण विकास के लिए केंद्रीय बजट आवंटन में 211 प्रतिशत से अधिक की वृद्धि हुई है। यह डेटा स्थानीय संस्थागत क्षमता, ग्रामीण अवसंरचना और आजीविका को मजबूत करने के लिए एक निरंतर वित्तीय प्रतिबद्धता को दर्शाता है।

संस्थाएं (Institutions)
- सरकारी कल्याण वितरण मॉडल से विकेंद्रीकृत भागीदारी की ओर: उदाहरण के लिए- जल जीवन मिशन में पंचायतों और स्वयं सहायता समूहों (SHGs) के माध्यम से सहभागी तंत्र को अपनाया गया है। इससे ग्रामीण क्षेत्रों में नल से पेयजल की उपलब्धता लगभग शत-प्रतिशत (99.6%) हो गई है।
- अंतिम छोर तक सेवा वितरण के लिए सामुदायिक संस्थाओं का उपयोग: जैसे कि छात्रों को जमीनी स्तर के शासन से परिचित कराने के लिए मॉडल यूथ ग्राम सभा का आयोजन।
- दीनदयाल अंत्योदय योजना-राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (DAY-NRLM) के तहत महिला नेतृत्व वाले स्वयं सहायता समूह (SHGs)।
- पंचायतों को मजबूत करना: 16वें वित्त आयोग के तहत पंचायतों को प्रत्यक्ष राजकोषीय अंतरण में लगभग 85% की वृद्धि हुई है।
- उदाहरण के लिए- इन निकायों की संस्थागत क्षमता और ई-गवर्नेंस को बढ़ाने के लिए संशोधित राष्ट्रीय ग्राम स्वराज अभियान संचालित किया गया है।
निवेश (Investment)
- ग्रामीण अवसंरचना: प्रधान मंत्री ग्राम सड़क योजना और प्रधान मंत्री आवास योजना (ग्रामीण) के तहत आवास एवं संपर्क संबंधी बजट आवंटन में महत्वपूर्ण वृद्धि देखी गई है।
समावेशन (Inclusion)
- आर्थिक समावेश: विकसित भारत गारंटी रोजगार और आजीविका मिशन (ग्रामीण) अधिनियम, 2025 के तहत 125 दिनों के रोजगार की गारंटी दी गई है, जिसे संपत्ति निर्माण (Asset Creation) से जोड़ा गया है।
- बाजार समावेश: लखपति दीदी पहल को समर्थन देने के लिए, बजट में SHE-Marts (शी-मार्ट्स) का प्रस्ताव किया गया है। ये समुदाय के स्वामित्व वाले खुदरा केंद्र (Retail Outlets) हैं, जो महिलाओं को निर्वाह से स्थायी उद्यम की ओर बढ़ने में मदद करेंगे।
- डिजिटल अधिकार: स्वामित्व (SVAMITVA) योजना (ड्रोन मैपिंग) और नमो ड्रोन दीदी जैसी योजनाएं यह सुनिश्चित करती हैं कि ग्रामीण नागरिकों के पास संपत्ति के अधिकार हों और उनकी डिजिटल अर्थव्यवस्था तक पहुंच हो।