वैश्विक जोखिम रिपोर्ट, 2026 जारी की गई | Current Affairs | Vision IAS
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In Summary

  • विश्व आर्थिक मंच की रिपोर्ट में भू-आर्थिक टकराव को अल्पावधि से मध्यम अवधि में सबसे महत्वपूर्ण वैश्विक जोखिम के रूप में पहचाना गया है।
  • दीर्घकालिक जोखिमों में चरम मौसम और जैव विविधता का नुकसान शामिल है; भारत को साइबर असुरक्षा और असमानता का सामना करना पड़ता है।
  • भू-आर्थिक टकराव में सीमा पार संबंधों को नया रूप देने के लिए आर्थिक उपकरणों का उपयोग करना शामिल है, जिससे बहुपक्षवाद कमजोर हो सकता है और आपूर्ति श्रृंखलाएं बाधित हो सकती हैं।

In Summary

यह रिपोर्ट विश्व आर्थिक मंच (WEF) ने जारी की है। इस रिपोर्ट में 'भू-आर्थिक टकराव' (Geoeconomic Confrontation) को सबसे महत्वपूर्ण वैश्विक जोखिम के रूप में पहचाना गया है।

रिपोर्ट के मुख्य बिंदुओं पर एक नजर

  • वर्तमान और निकट भविष्य (2026) और अल्प से मध्यम अवधि (2028 तक) में, रिपोर्ट भू-आर्थिक टकराव, राज्य-आधारित सशस्त्र संघर्ष, चरम मौसम की घटनाएं, बढ़ते सामाजिक ध्रुवीकरण जैसे प्रमुख जोखिमों का उल्लेख करती है।
  • दीर्घकालिक अवधि (2036 तक): पहचाने गए सबसे महत्वपूर्ण जोखिमों में चरम मौसम की घटनाएं, जैव विविधता की हानि और पारिस्थितिकी-तंत्र का पतन आदि शामिल हैं।
  • भारत द्वारा सामना किए जाने वाले मुख्य जोखिम: साइबर असुरक्षा, असमानता (धन व आय), अपर्याप्त लोक सेवाएं और सामाजिक सुरक्षा (शिक्षा, अवसंरचना, पेंशन आदि)।

भू-आर्थिक टकराव क्या है?

  • यह वैश्विक या क्षेत्रीय शक्तियों द्वारा आर्थिक साधनों के रणनीतिक उपयोग को संदर्भित करता है। इसका उद्देश्य व्यापार, प्रौद्योगिकी, सेवाओं, पूंजी या ज्ञान के प्रवाह को प्रतिबंधित करके सीमा-पार आर्थिक संबंधों को नया आकार देना है। इसके पीछे मुख्य लक्ष्य आत्मनिर्भरता को बढ़ावा देना, भू-राजनीतिक प्रतिद्वंद्वियों को रोकना और अपने प्रभाव क्षेत्रों को मजबूत करना होता है।
  • उपकरण: इसमें प्रतिबंध, व्यापार नियंत्रण, निवेश प्रतिबंध, सब्सिडी, राज्य सहायता और मुद्रा संबंधी उपाय शामिल हैं।
  • हालिया उदाहरण: संयुक्त राज्य अमेरिका द्वारा प्रशुल्क (टैरिफ) लगाना, चीन द्वारा महत्वपूर्ण खनिजों के निर्यात पर प्रतिबंध आरोपित करना आदि।
  • संभावित परिणाम: 
    • बहुपक्षवाद (Multilateralism) का पतन;
    • प्रणालीगत रूप से महत्वपूर्ण आपूर्ति श्रृंखलाओं में व्यवधान;
    • रणनीतिक संसाधनों और प्रौद्योगिकियों का केंद्रीकरण;
    • आर्थिक मंदी और देशों के बीच सशस्त्र संघर्ष।

अनुशंसित कार्रवाई (सुझाव):

  • ऐसे आर्थिक प्रलोभनों को प्राथमिकता देनी चाहिए, जो परस्पर लाभ को बढ़ावा देते हैं;
  • मौजूदा बहुपक्षीय संस्थाओं को मजबूत करना चाहिए;
  • स्थानीय समुत्थानशीलता (local resilience) में निवेश करना चाहिए आदि।
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समुत्थानशीलता (Resilience)

किसी प्रणाली, समुदाय या समाज की प्रतिकूल घटनाओं, झटकों या तनावों का सामना करने, अनुकूलन करने और ठीक होने की क्षमता, जबकि अपने मूल कार्य को बनाए रखना।

प्रशुल्क (Tariff)

यह आयातित या कभी-कभी निर्यात की जाने वाली वस्तुओं पर लगाया जाने वाला कर है। इसका उपयोग विदेशी प्रतिस्पर्धा को सीमित करने, घरेलू उद्योगों की रक्षा करने या राजस्व उत्पन्न करने के लिए किया जा सकता है।

बहुपक्षवाद (Multilateralism)

The principle of participation by three or more parties, especially the governments of different countries, in international relations. It emphasizes cooperation and collective action to address global challenges like climate change.

Title is required. Maximum 500 characters.

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