यह इसलिए महत्वपूर्ण है, क्योंकि ला नीना, 'अल नीनो दक्षिणी दोलन' (ENSO) का "ठंडा" चरण है। आमतौर पर इसका वैश्विक तापमान पर शीतलन प्रभाव होता है।
अल नीनो दक्षिणी दोलन (ENSO) के बारे में:
- यह एक आवर्ती प्राकृतिक घटना है। इसकी विशेषता भूमध्यरेखीय प्रशांत महासागर में समुद्र के तापमान में उतार-चढ़ाव और वायुमंडल में होने वाले बदलाव हैं।
- अल नीनो और ला नीना इसके समुद्री घटक हैं।
- दक्षिणी दोलन (Southern Oscillation) इस प्रणाली का वायुमंडलीय प्रतिरूप है।
ला नीना चरण
अर्थ: ENSO का यह ठंडा चरण होता है। यह तब उत्पन्न होता है, जब व्यापारिक पवनें मजबूत हो जाती हैं। इससे उष्ण जल एशिया की ओर व पश्चिम में प्रवाहित होने लगता है तथा पूर्वी प्रशांत महासागर में ठंडा जल ऊपर आने लगता है।
भारत पर प्रभाव:
- मानसून: यह आमतौर पर लाभदायक होता है। इससे सामान्य या सामान्य से अधिक वर्षा होती है, जो कृषि के लिए महत्वपूर्ण है।
- शीत ऋतु: इसके कारण उत्तर भारत में सामान्य से अधिक ठंड पड़ती है और बार-बार शीत लहरें चलती है।
- चरम घटनाएं: बंगाल की खाड़ी में बाढ़ और गंभीर चक्रवाती गतिविधियों का खतरा बढ़ जाता है।
अल नीनो चरण
अर्थ: यह ENSO का गर्म चरण होता है। यह तब उत्पन्न होता है, जब व्यापारिक पवनें कमजोर हो जाती हैं। इसे उष्ण जल दक्षिण अमेरिका की ओर बढ़ने लगता है।
भारत पर प्रभाव:
- मानसून: यह आमतौर पर दक्षिण-पश्चिम मानसून को कमजोर कर देता है। इससे अक्सर सामान्य से कम वर्षा या सूखे की स्थिति उत्पन्न होती है।
- कृषि: यह चावल, गन्ना और तिलहन जैसी गर्मियों की फसलों की पैदावार को कम कर देता है। इससे खाद्य पदार्थों की कीमतें बढ़ सकती हैं।
- गर्मी: यह भीषण गर्मी और बढ़ते 'हीट स्ट्रेस' से जुड़ा हुआ है।