वर्ष 2025 में चीन की जनसंख्या 3.39 मिलियन घटकर 1.405 बिलियन रह गई। साथ ही, जन्म लेने वाले बच्चों की कुल संख्या गिरकर 7.92 मिलियन पर आ गई।
- इस घटना को "डेमोग्राफिक विंटर" या 'जनसांख्यिकीय शीतकाल' कहा जा रहा है। अब यह केवल विकसित देशों तक सीमित नहीं है, बल्कि एक वैश्विक वास्तविकता बनती जा रही है। इसके 21वीं सदी की अर्थव्यवस्था और सामाजिक संरचना पर गहन प्रभाव उत्पन्न होंगे।
जनसांख्यिकीय शीतकाल क्या है?
- अर्थ: यह एक ऐसे जनसांख्यिकीय चरण का वर्णन करता है, जिसमें जनसंख्या वृद्धि में निरंतर और संरचनात्मक गिरावट आती है।
- इसके मुख्य संकेतक निम्नलिखित हैं:
- प्रतिस्थापन दर से कम जन्म दर: प्रजनन दर का 2.1 के स्तर से नीचे गिर जाना।
- उल्टा जनसंख्या पिरामिड: एक घटती व वृद्ध होती आबादी, जिसमें युवाओं की संख्या कम (संकीर्ण आधार) और बुजुर्गों की संख्या अधिक (चौड़ा शीर्ष) होती है।
जनसांख्यिकीय शीतकाल के लिए उत्तरदायी कारक
- पारिवारिक जीवन से दूर होना: करियर संबंधी आकांक्षाएं और आर्थिक दबाव लोगों को विवाह एवं माता-पिता बनने में देरी करने के लिए बाध्य कर रहे हैं।
- शहरीकरण: शहरों में आवास स्थान कम और महंगा होता है, जो बड़े परिवारों को हतोत्साहित करता है।
- सामाजिक और सांस्कृतिक बदलाव: कार्यबल में महिलाओं की बढ़ती भागीदारी तथा लघु परिवारों के प्रति बदलता दृष्टिकोण।
- परिवार नियोजन तक पहुंच: व्यक्तियों के पास परिवार के आकार पर अब अधिक नियंत्रण है।
- पुरानी नीतियों का प्रभाव: उदाहरण के तौर पर, चीन की 'एक बालक नीति'।
जनसांख्यिकीय शीतकाल से निपटने के लिए आगे की राह
- प्रजनन-समर्थक (Pro-Natalist) नीतियां: वित्तीय प्रोत्साहन और बेहतर अभिभावक अवकाश (Parental Leaves) के माध्यम से समर्थन देना चाहिए।
- 'सिल्वर इकोनॉमी' को अपनाना: स्वास्थ्य सेवा और पेंशन सुधारों में निवेश करना चाहिए।
- आर्थिक संरचनात्मक सुधार: 'जीवनयापन की लागत' के संकट को दूर करना चाहिए, ताकि युवा पेशेवरों के लिए परिवार बनाना एक व्यावहारिक विकल्प बन सके।
- तकनीकी एकीकरण: घटते मानव कार्यबल के बावजूद औद्योगिक उत्पादकता बनाए रखने के लिए AI और स्वचालन (ऑटोमेशन) का उपयोग करना चाहिए।
- वैश्विक प्रवासन का प्रबंधन: ऐसी सहयोगी प्रवासन नीतियां विकसित करनी चाहिए, जिससे श्रम अधिशेष वाले देश 'जनसांख्यिकीय शीतकाल' का सामना कर रहे देशों की मदद कर सकें।