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केंद्र सरकार ने केंद्रीय रेशम बोर्ड (Central Silk Board) द्वारा वित्तीय राशि स्वीकृति की सीमा बढ़ा दी है। इस कदम का उद्देश्य परियोजनाओं की मंजूरी में होने वाली देरी कम करना है। 

केंद्रीय रेशम बोर्ड के बारे में

  • स्वरुप: यह एक सांविधिक निकाय है। इसकी स्थापना 1948 में संसद के एक अधिनियम द्वारा हुई है। 
  • मंत्रालय: केंद्रीय वस्त्र मंत्रालय

भारत में रेशम उत्पादन

  • भारत का स्थान: भारत विश्व में रेशम का दूसरा सबसे बड़ा उत्पादक और सबसे बड़ा उपभोक्ता है।
  • रेशम के प्रकार: मलबरी (शहतूत), ओक तसर एवं उष्णकटिबंधीय तसर, मुगा और एरी
    • देश के कुल कच्चे रेशम उत्पादन का 92% मलबरी (शहतूत) से आता है।
  • रेशम उत्पादक मुख्य राज्य/संघ राज्य क्षेत्र: कर्नाटक, आंध्र प्रदेश, तमिलनाडु, पश्चिम बंगाल और जम्मू एवं कश्मीर। 

भारत ने हाल ही में जिम्मेदार राष्ट्र सूचकांक (Responsible Nations Index: RNI) शुरू किया है। 

  • इसका उद्देश्य केवल आर्थिक शक्ति की बजाय नैतिक शासन और विश्व के प्रति जिम्मेदारी के आधार पर राष्ट्रों का मूल्यांकन करना है।

जिम्मेदार राष्ट्र सूचकांक (RNI) के बारे में

  • इसे वर्ल्ड इंटेलेक्चुअल फाउंडेशन (WIF) ने JNU और IIM मुंबई के साथ मिलकर तैयार किया है।
  • ढांचा: यह एक वैश्विक सूचकांक है। इसमें 154 देशों का उनकी 'जिम्मेदारी' के आधार पर मूल्यांकन किया जाता है।
  • मानदंड: यह सूचकांक राष्ट्रों का मूल्यांकन निम्नलिखित मानदंडों पर करता है:
    • नैतिक शासन, 
    • सामाजिक कल्याण, 
    • पर्यावरण संरक्षण, और 
    • विश्व के प्रति जिम्मेदारी
  • रैंकिंग की पद्धति: इसमें 58 संकेतकों का उपयोग किया गया है। इसके लिए अंतर्राष्ट्रीय स्रोतों से डेटा प्राप्त किए गए हैं।
  • शीर्ष रैंक वाले देश: सिंगापुर (प्रथम), स्विट्जरलैंड (द्वितीय), डेनमार्क (तृतीय)।
  • भारत की रैंक: भारत 16वें स्थान पर है। भारत की रैंकिंग संयुक्त राज्य अमेरिका (66) और चीन (68) से बेहतर है।

सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों (PSBs) ने नए क्रेडिट मूल्यांकन मॉडल (CAM) के तहत सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों (MSMEs) के लिए ₹52,300 करोड़ से अधिक की राशि स्वीकृत की है।

‘नया क्रेडिट मूल्यांकन मॉडल (CAM), 2025’ के बारे में

  • यह मॉडल ऋण लेने वालों के डिजिटल रिकॉर्ड का उपयोग करता है। इससे MSME के ऋण आवदेनों का तेजी से, डेटा-आधारित और निष्पक्ष मूल्यांकन संभव हो पाता है।
  • यह डिजिटल रूप से प्राप्त और सत्यापन योग्य डेटा का उपयोग करता है। इस तरह यह मॉडल MSME को ऋण देने की प्रक्रिया को स्वचालित करता है।
  • इसके तहत ऋण आवेदन जन समर्थ पोर्टल से प्राप्त किए जाते हैं।
    • जन समर्थ पोर्टल लाभार्थियों, वित्तीय संस्थानों, केंद्र/राज्य सरकार की एजेंसियों और नोडल एजेंसियों को एक साझा प्लेटफार्म से जोड़ता है।

केंद्रीय इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MeitY) ने हाल ही में चिप्स टू स्टार्ट-अप (C2S) कार्यक्रम में प्रगति को रेखांकित किया। 

  • मंत्रालय के मुताबिक इस कार्यक्रम में 1 लाख से अधिक नामांकन हो चुके हैं।

चिप्स टू स्टार्ट-अप (C2S) कार्यक्रम के बारे में

  • MeitY ने इस कार्यक्रम की शुरुआत 2022 में की थी। यह समेकित क्षमता-निर्माण आधारित पहल है।
  • लक्ष्य: उद्योगों में कार्य करने हेतु तैयार 85,000 पेशेवर सुनिश्चित करना है। इनमें स्नातक, स्नातकोत्तर और डॉक्टरेट स्तर के पेशेवर शामिल होंगे। 
  • इस कार्यक्रम के तहत स्मार्ट (SMART) लैब सुविधाओं तक पहुँच उपलब्ध कराई गई है।

केंद्रीय पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय ने हाल ही में पर्यावरण (संरक्षण) निधि नियम, 2026 अधिसूचित किए हैं। इसका उद्देश्य पर्यावरण संरक्षण निधि (Environmental Protection Fund) के उपयोग में सुधार करना है।

पर्यावरण संरक्षण निधि के बारे में

  • विधिक स्वरूप: यह निधि पर्यावरण (संरक्षण) अधिनियम, 1986 की धारा 16 के तहत गठित की गई है। यह राशि भारत के लोक लेखा में जमा की जाती है।
  • निधि के स्रोत: इसमें वायु (प्रदूषण निवारण और नियंत्रण) अधिनियम, 1981; जल (प्रदूषण निवारण और नियंत्रण) अधिनियम, 1974 और पर्यावरण (संरक्षण) अधिनियम, 1986 के तहत वसूले गए जुर्माने जमा होते हैं।
  • आवंटन: 75% धनराशि राज्यों/संघ राज्य क्षेत्रों को दी जाती है, जबकि 25% धनराशि केंद्र सरकार के पास रहती है।
  • निधि का उपयोग: पर्यावरण निगरानी नेटवर्क की स्थापना, प्रदूषित स्थलों की सफाई, पर्यावरण को स्वच्छ रखने वाली प्रौद्योगिकियों में अनुसंधान एवं विकास (R&D) हेतु।
  • निगरानी: इसका प्रबंधन परियोजना प्रबंधन इकाई द्वारा किया जाता है। इसका ऑडिट नियंत्रक-महालेखापरीक्षक (CAG) द्वारा किया जाता है।
  • संस्थाओं की क्षमता बढ़ाना: इस निधि का उपयोग केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (CPCB) और राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड्स (SPCBs) जैसी विनियामक संस्थाओं को मजबूत बनाने में भी किया जाता है। 

भारत सरकार के विज्ञान और प्रौद्योगिकी विभाग (DST) ने अनुसंधान, विकास और नवाचार (RDI) योजना के तहत दो संस्थाओं को द्वितीय-स्तरीय फंड के पहले प्रबंधक (SLFMs) के रूप में मंजूरी दी है। 

  • ये संस्थाएं हैं; प्रौद्योगिकी विकास बोर्ड (TDB) और जैव प्रौद्योगिकी उद्योग अनुसंधान सहायता परिषद (BIRAC)

अनुसंधान विकास और नवाचार (RDI) योजना के बारे में:

  • उद्देश्यकम या शून्य ब्याज दरों पर लंबी अवधि के वित्तपोषण या पुनर्वित्त की सुविधा प्रदान करना ताकि निजी क्षेत्र से निवेश आकर्षित हो।
  • आवंटित निधि: ₹1 लाख करोड़।
  • द्वि-स्तरीय वित्त पोषण तंत्र:
    • विशेष प्रयोजन निधि (Special Purpose Fund - SPF): इसे अनुसंधान नेशनल रिसर्च फाउंडेशन (ANRF) के तहत स्थापित किया गया है। यह फाउंडेशन निधि के संरक्षक के रूप में कार्य करेगा।
    • द्वितीय-स्तरीय फंड प्रबंधक (SLFM): विशेष प्रयोजन निधि से यहां धनराशि आवंटित की जाती है। यह धनराशि लंबी अवधि के रियायती ऋण या इक्विटी वित्तपोषण (स्टार्टअप्स के लिए) के रूप में दी जाती है।

कामचटका प्रायद्वीप 

  • रूस के सुदूर पूर्व में स्थित कामचटका प्रायद्वीप में सर्दियों के तूफान के बाद रिकॉर्ड स्तर की बर्फबारी हुई है। सड़कें, कारें और पूरे मोहल्ले गहरी बर्फ की चादर के नीचे दब गए हैं। इससे जनजीवन अस्त-व्यस्त हो गया है।

राजनीतिक विशेषताएं

  • यह रूसी संघ के सुदूर पूर्वी संघीय जिला का हिस्सा है।
  • यह कम आबादी वाला क्षेत्र है। यहां की आबादी लगभग 3 लाख है।

भौगोलिक विशेषताएँ

  • अवस्थिति: इसके पश्चिम में ओखोटस्क सागर तथा पूर्व में प्रशांत महासागर और बेरिंग सागर स्थित है।
  • पर्वतमालाएं: श्रेडिनी और वोस्तोच्नी ।
  • नदी: कामचटका नदी।
  • जलवायु: मुख्य रूप से टुंड्रा जलवायु।
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एरी रेशम (Eri Silk)

इसे 'अहिंसा रेशम' भी कहा जाता है क्योंकि इसमें रेशमकीट को मारा नहीं जाता। यह कैस्टर (अरंडी) के पत्तों पर पलने वाले रेशमकीट (Samia cynthia ricini) से प्राप्त होता है और अपनी बुनावट और गर्मी के लिए जाना जाता है।

मुगा रेशम (Muga Silk)

यह असम का एक पारंपरिक रेशम है, जो एक विशेष प्रकार के कीड़े (Antheraea assamensis) से प्राप्त होता है जो मुख्य रूप से गोल्डन ओक (Som) और चांपा (Champa) के पत्तों पर पनपता है। यह अपनी प्राकृतिक सुनहरी चमक के लिए जाना जाता है।

उष्णकटिबंधीय तसर (Tropical Tasser)

यह भी एक प्रकार का जंगली रेशम है जो मुख्य रूप से भारत के उष्णकटिबंधीय क्षेत्रों में पाए जाने वाले विभिन्न प्रकार के पेड़ों (जैसे अर्जुन, साल) पर पलने वाले रेशमकीटों (Antheraea mylitta) से प्राप्त होता है।

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