भारत की 2026 की राजनयिक रणनीति: बड़े मंचों से रणनीतिक गठबंधनों की ओर | Current Affairs | Vision IAS
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In Summary

  • वैश्विक कूटनीति बड़े संगठनों से हटकर ठोस परिणामों के लिए छोटे, मुद्दे-केंद्रित गठबंधनों की ओर अग्रसर हो रही है।
  • भू-राजनीतिक प्रतिद्वंद्विता और घरेलू राजनीति के कारण संयुक्त राष्ट्र और जी20 जैसे बड़े मंच कम प्रभावी होते हैं।
  • भारत व्यावहारिक सहयोग के लिए और अपने हितों को आगे बढ़ाने के लिए 2026 में यूरोपीय संघ, ब्रिक्स और क्वाड का लाभ उठा सकता है।

In Summary

समकालीन वैश्विक परिदृश्य में, अब ठोस परिणाम संयुक्त राष्ट्र और G20 जैसे बड़े एवं जटिल निकायों की बजाय लघु, अति सक्रिय एवं मुद्दे-केंद्रित गठबंधनों से उत्पन्न हो रहे हैं। साधारण अर्थों में ये "लघु मंच हैं, जो "बड़े लाभांश" प्रदान करते हैं।

2026 का बदलता राजनयिक परिदृश्य

  • चुनौतीपूर्ण द्विपक्षीय संबंध: प्रमुख शक्तियों के साथ द्विपक्षीय कूटनीति के "चुनौतीपूर्ण" बने रहने की संभावना है। वाशिंगटन और बीजिंग दोनों के साथ संबंधों में व्यापार संबंधी विवादों एवं रणनीतिक प्रतिस्पर्धा के कारण घर्षण जारी रहने की संभावना है।
  • बड़े बहुपक्षीय मंचों पर दबाव: संयुक्त राष्ट्र और G20 जैसे बड़े, स्थापित मंच भू-राजनीतिक प्रतिद्वंद्विता एवं घरेलू राजनीति के हस्तक्षेप के कारण ठोस कार्रवाई के लिए तेजी से अप्रभावी सिद्ध हो रहे हैं।
    • उदाहरण: 2025 के जोहान्सबर्ग G20 शिखर सम्मेलन का संयुक्त राज्य अमेरिका द्वारा बहिष्कार।

"राजनयिक रिक्त स्थान" (Diplomatic White Spaces) का लाभ उठाना: "लघु मंच" कूटनीति के प्रमुख क्षेत्र

"राजनयिक रिक्त स्थान" को "वैश्विक नेतृत्व में अंतराल" के रूप में परिभाषित किया गया है, जहां ज्वलंत समस्याओं के लिए समन्वय की आवश्यकता होती है, लेकिन कोई भी बड़ी शक्ति एक विश्वसनीय संयोजक के रूप में कार्य नहीं कर पाती है।

  • यूरोपीय संघ (तकनीकी तंत्र परीक्षण): 26 जनवरी, 2026 को मुख्य अतिथि के रूप में यूरोपीय संघ (EU) के संस्थागत नेतृत्व की उपस्थिति, दीर्घावधि से लंबित भारत-यूरोपीय संघ मुक्त व्यापार समझौते (EU-FTA) को आगे बढ़ाने के कदम का संकेत देती है।
    • प्रस्तावित भारत-EU FTA में बाजार पहुंच नियम, डेटा मानक और संधारणीयता संबंधी आवश्यकताएं शामिल हैं। ये सभी यूरोपीय संघ के सामूहिक नीति निकायों को संलग्न करते हैं।
  • ब्रिक्स - BRICS (राजनीतिक परीक्षण): 2026 में ब्रिक्स के अध्यक्ष और मेजबान के रूप में, भारत 'न्यू डेवलपमेंट बैंक' (NDB) गारंटी के उपयोग को बढ़ाने जैसे व्यावहारिक उपाय कर सकता है। इससे ब्रिक्स को ठोस "परिणाम" उत्पन्न करने की दिशा में ले जाया जा सकेगा।
    • भारत ग्लोबल साउथ के हितों का समर्थन करके प्रतिस्पर्धी दबावों को संतुलित कर सकता है। साथ ही, ब्रिक्स को "पश्चिम विरोधी बयानबाजी या विडॉलरीकरण (de-dollarisation) के अभियान" में बदलने से रोककर एक संतुलनकारी भूमिका निभा सकता है।

क्वाड/QUAD (लोक हित परीक्षण): 2026 में क्वाड शिखर सम्मेलन की मेजबानी करके, भारत समुद्री क्षेत्र जागरूकता और अनुकूल बंदरगाहों जैसे क्षेत्रों में व्यावहारिक सहयोग पर ध्यान केंद्रित कर सकता है। यह हिंद महासागर के तटवर्ती देशों के लिए अत्यधिक प्रासंगिक है, जो "बड़ी शक्तियों की प्रतिद्वंद्विता में फंसे बिना" अपनी क्षमता बढ़ाना चाहते हैं।

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समुद्री क्षेत्र जागरूकता (Maritime Domain Awareness)

समुद्री वातावरण की किसी भी घटना, गतिविधि या स्थिति के बारे में समझ रखने की क्षमता, ताकि सुरक्षा और हित को सुनिश्चित किया जा सके।

क्वाड (QUAD)

क्वाड, जिसे चतुर्भुज सुरक्षा संवाद (Quadrilateral Security Dialogue) भी कहा जाता है, चार देशों - भारत, ऑस्ट्रेलिया, जापान और संयुक्त राज्य अमेरिका - के बीच एक अनौपचारिक रणनीतिक संवाद मंच है। इसका उद्देश्य इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में मुक्त, खुले और समावेशी व्यवस्था को बढ़ावा देना है, जिसमें समुद्री सुरक्षा, अवसंरचना विकास और महत्वपूर्ण प्रौद्योगिकियों पर सहयोग शामिल है।

ग्लोबल साउथ

यह उन विकासशील देशों के एक समूह को संदर्भित करता है जो मुख्य रूप से उत्तरी गोलार्ध में स्थित विकसित देशों के विपरीत, मुख्य रूप से दक्षिणी गोलार्ध में स्थित हैं। इसमें अक्सर एशिया, अफ्रीका और लैटिन अमेरिका के देश शामिल होते हैं।

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