RBI ने 'भारतीय रिज़र्व बैंक (प्राथमिकता प्राप्त क्षेत्रक को ऋण – लक्ष्य और वर्गीकरण) दिशा-निर्देश, 2025' जारी किए हैं।
- PSL का मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि समाज के कमजोर वर्गों और अविकसित क्षेत्रों को ऋण तक आसान पहुंच प्राप्त हो।
RBI के नवीनतम PSL दिशा-निर्देशों पर एक नजर
- अनुपालन में वृद्धि और बाहरी लेखा-परीक्षक: RBI ने अब बैंकों के लिए बाहरी लेखा परीक्षकों (या विशिष्ट संस्थाओं जैसे NCDC के लिए CAG-पैनल में शामिल लेखा-परीक्षकों) से प्रमाणन प्राप्त करना अनिवार्य कर दिया है।
- यह लेखा परीक्षक यह सुनिश्चित करेगा कि एक ही अंतर्निहित ऋण एक्सपोज़र को मूल बैंक और मध्यवर्ती संस्था (जैसे कि NBFC या सहकारी संस्था) दोनों द्वारा PSL के रूप में दावा न किया जाए।
- क्षेत्रकीय लक्ष्यों में संशोधन: लघु वित्त बैंकों (SFBs) के लिए PSL लक्ष्य को उनके समायोजित निवल बैंक ऋण (ANBC) के 75% से घटाकर 60% कर दिया गया है।
- ग्रामीण ऋण के लिए NCDC का समावेश: बैंकों द्वारा राष्ट्रीय सहकारी विकास निगम (NCDC) को सहकारी समितियों को आगे ऋण देने के लिए दिए गए ऋण को अब आधिकारिक तौर पर PSL के रूप में वर्गीकृत किया जायेगा।
- अन्य:
- बैंकों को PSL लक्ष्यों को पूरा करने के लिए सह-ऋण प्रदायगी व्यवस्था करने की अनुमति है।
- बैंकों को कृषि और MSMEs को दिए गए निर्यात ऋण को PSL ऋण के रूप में मानने की अनुमति दी गई है।
