केंद्रीय पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय ने पर्यावरण (संरक्षण) अधिनियम, 1986 के तहत ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन तीव्रता लक्ष्य (संशोधन) नियम, 2025 अधिसूचित किए हैं।
मुख्य विवरण
- विस्तार: उत्सर्जन में कटौती के लिए बाध्यकारी (obligated) क्षेत्रकों की सूची में चार नए क्षेत्रक जोड़े गए हैं- पेट्रोलियम रिफाइनरी, पेट्रोकेमिकल्स, टेक्सटाइल्स (वस्त्र), और सेकेंडरी एल्युमीनियम।
- पिछले क्षेत्रक: एल्युमीनियम, सीमेंट, लुगदी व कागज और क्लोर-क्षार (chlor-alkali)।
- लक्ष्य और समयसीमा: नए नियम 208 विशिष्ट औद्योगिक इकाइयों को अनुपालन वर्ष 2025-26 से अपनी GHG उत्सर्जन तीव्रता (GEI) कम करने का आदेश देते हैं।
- GEI, उत्पाद की प्रति इकाई पर उत्पन्न होने वाली GHGs की मात्रा है। उदाहरण के लिए- सीमेंट या एल्युमिनियम जैसे उत्पाद के प्रति टन के उत्पादन में मुक्त गैसें।
- कटौती के लक्ष्य: कुल उत्सर्जन तीव्रता में कटौती का लक्ष्य 2026-27 तक 3% से 7% के बीच रखा गया है। इस हेतु आधार वर्ष: 2023-24 निर्धारित किया गया है।
- अनुपालन तंत्र: जो इकाइयां लक्ष्य पूरा करने में विफल रहेंगी, उन्हें कमी को पूरा करने के लिए कार्बन क्रेडिट प्रमाण-पत्र (CCCs) खरीदना होगा।
- ऐसा न करने पर 'पर्यावरण क्षतिपूर्ति' दंड लगाया जाएगा, जो CCCs की औसत व्यापारिक कीमत के दोगुने के बराबर होगा।
- महत्त्व: यह कदम भारत के राष्ट्रीय स्तर पर निर्धारित योगदान (NDCs) लक्ष्यों के अनुरूप है। इनमें 2030 तक GDP की उत्सर्जन तीव्रता को 45% तक कम करने और 2070 तक नेट जीरो उत्सर्जन प्राप्त करने का लक्ष्य शामिल है।
कार्बन क्रेडिट ट्रेडिंग स्कीम (CCTS) के बारे में
- उत्पत्ति: इसे केंद्रीय विद्युत मंत्रालय ने ऊर्जा संरक्षण अधिनियम, 2001 के तहत 2023 में अधिसूचित किया था।
- उद्देश्य: संस्थागत ढांचा स्थापित करके भारतीय कार्बन बाजार (ICM) की नींव रखना।
- संरचना:
- प्रशासक: ऊर्जा दक्षता ब्यूरो (BEE) लक्ष्य निर्धारित करता है और CCCs जारी करता है।
- विनियामक: केंद्रीय विद्युत विनियामक आयोग (CERC) इन CCCs के व्यापार को नियंत्रित करता है।
- रजिस्ट्री: ग्रिड कंट्रोलर ऑफ इंडिया लिमिटेड।
- परिचालन ढांचा: यह दो तरीकों से कार्य करता है:
- अनुपालन तंत्र: जिन संस्थाओं के लिए यह योजना बाध्यकारी है (obligated entities) वे संस्थाएं GHG उत्सर्जन तीव्रता लक्ष्यों को पूरा करती हैं। लक्ष्य से अधिक उपलब्धि हासिल करने वाली संस्थाएं क्रेडिट अर्जित करते हैं।
- ऑफसेट तंत्र:जिन संस्थाओं के लिए यह योजना बाध्यकारी नहीं है (Non-obligated entities) उन संस्थाओं के लिए यह स्वैच्छिक परियोजना-आधारित तंत्र है। ये वे संस्थाएं हैं, जो अनुपालन तंत्र में शामिल नहीं हैं।
- ऐसी संस्थाएं अपनी परियोजनाओं का पंजीकरण करा सकती हैं और BEE द्वारा निर्धारित पात्रता मानदंडों को पूरा करने पर कार्बन क्रेडिट प्रमाण-पत्र (CCC) अर्जित कर सकती हैं।
- कार्यप्रणाली: यह 'कैप एंड ट्रेड' मॉडल पर आधारित है।
- बाध्यकारी संस्थाएं जो अपने लक्ष्य से अधिक उत्सर्जन कम करती हैं, वे CCCs अर्जित करती हैं, जिन्हें पावर एक्सचेंज पर बेचा जा सकता है।
- 1 CCC = 1 टन CO2 के बराबर।
- बाध्यकारी संस्थाएं जो अपने लक्ष्य से अधिक उत्सर्जन कम करती हैं, वे CCCs अर्जित करती हैं, जिन्हें पावर एक्सचेंज पर बेचा जा सकता है।