हिंद-प्रशांत महासागर पहल (IPOI) एक गैर-संधि आधारित स्वैच्छिक व्यवस्था है। यह एक स्वतंत्र और खुले हिंद-प्रशांत (Indo-Pacific) क्षेत्र तथा नियम-आधारित क्षेत्रीय व्यवस्था के लिए सहयोग को बढ़ावा देती है।
- हिंद-प्रशांत क्षेत्र: यह हिंद महासागर और प्रशांत महासागर के बीच का एक परस्पर-संबद्ध क्षेत्र है। यह अपने मुख्य व्यापारिक मार्ग, मलक्का जलडमरूमध्य द्वारा जुड़ा हुआ है।
- यहां विश्व की आधी से अधिक आबादी निवास करती है। वैश्विक अर्थव्यवस्था में इसका लगभग दो-तिहाई योगदान है।
हिंद-प्रशांत महासागर पहल (IPOI) के बारे में
- उत्पत्ति: IPOI को भारत ने 2019 में शुरू किया था। इसे बैंकॉक (थाईलैंड) में आयोजित पूर्वी एशिया शिखर सम्मेलन में प्रस्तुत किया गया था।
- पृष्ठभूमि: यह 2015 में भारत द्वारा घोषित "क्षेत्र में सभी के लिए सुरक्षा और विकास" (SAGAR) पहल पर आधारित है।
- SAGAR देशों को एक सुरक्षित व स्थिर समुद्री क्षेत्र के लिए सहयोग करने और समन्वय करने हेतु प्रोत्साहित करता है।
- IPOI के 7 स्तंभ: इसमें समुद्री सुरक्षा; समुद्री पारिस्थितिकी; क्षमता निर्माण और संसाधन साझाकरण; आपदा जोखिम न्यूनीकरण एवं प्रबंधन आदि शामिल हैं।

IPOI का मुख्य महत्त्व
- चीन की आक्रामकता से निपटना: उदाहरण के लिए- 2020 में भारत और वियतनाम IPOI के अनुरूप अपने द्विपक्षीय सहयोग को बढ़ाने पर सहमत हुए थे।
- अन्य वैश्विक पहलों के साथ अभिसरण: उदाहरण के लिए- निम्नलिखित पहलें इसके साथ मिलकर कार्य करती हैं-
- AIIPOIP (ऑस्ट्रेलिया-भारत हिंद-प्रशांत महासागर पहल साझेदारी),
- AOIP (हिंद-प्रशांत के लिए आसियान दृष्टिकोण),
- IPEF (समृद्धि के लिए हिंद-प्रशांत आर्थिक फ्रेमवर्क) आदि।