यह मसौदा नीति विद्युत मंत्रालय ने जारी की है। यह 2005 में अधिसूचित मौजूदा राष्ट्रीय विद्युत नीति का स्थान लेगी।
- यह नीति 2030 तक प्रति व्यक्ति विद्युत उपभोग 2,000 kWh (किलोवाट/घंटे) और 2047 तक 4,000 kWh से अधिक करने का लक्ष्य रखती है।
भारत के विद्युत क्षेत्रक की प्रमुख उपलब्धियां
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नीति की मुख्य विशेषताओं पर एक नजर
- सूचकांक-आधारित वार्षिक संशोधन: स्वचालित वार्षिक संशोधन के लिए विद्युत संबंधी शुल्कों को एक उपयुक्त सूचकांक से जोड़ा जाएगा।
- साइबर सुरक्षा: एक मजबूत साइबर सुरक्षा फ्रेमवर्क की स्थापना की जाएगी। साथ ही, देश के भीतर विद्युत क्षेत्रक के डेटा का अनिवार्य भंडारण किया जाएगा।
- वितरण प्रणाली परिचालक (DSO) की स्थापना: नेटवर्क साझाकरण की सुविधा प्रदान की जाएगी। साथ ही, वितरित नवीकरणीय ऊर्जा, भंडारण और 'वाहन-से-ग्रिड' (V2G) प्रणालियों के एकीकरण को बढ़ावा दिया जाएगा।
- नवीकरणीय ऊर्जा उत्पादन और भंडारण: भंडारण की बाजार-आधारित उपलब्धता सुनिश्चित की जाएगी। साथ ही, उभरती हुई बैटरी ऊर्जा भंडारण प्रणाली (BESS) प्रौद्योगिकियों के उपयोग को बढ़ावा दिया जाएगा।
नीति की आवश्यकता क्यों?
- विद्युत वितरण कंपनियों (DISCOMs) की वित्तीय स्थिरता: वितरण कंपनियों को बहुत अधिक घाटा हो रहा है। साथ ही, उन पर बहुत अधिक कर्ज भी हो गया है।
- लागत-प्रतिबिंबित शुल्क: लागतों की पर्याप्त भरपाई न हो पाने के कारण राजस्व अंतराल और अक्षमताएं उत्पन्न हो रही हैं।
- औद्योगिक प्रतिस्पर्धात्मकता को बढ़ावा: क्रॉस-सब्सिडी के कारण औद्योगिक टैरिफ उच्च हो गया है। इससे भारतीय उद्योग की वैश्विक प्रतिस्पर्धात्मकता प्रभावित हो रही है।
- क्रॉस-सब्सिडी: यह विद्युत क्षेत्रक की एक ऐसी मूल्य निर्धारण रणनीति है, जिसमें उपभोक्ताओं के एक समूह से अधिक शुल्क वसूल कर दूसरे समूह को सस्ती विद्युत प्रदान की जाती है।