नीति आयोग ने सीमेंट, एल्युमीनियम और एमएसएमई क्षेत्रों में हरित परिवर्तन पर रिपोर्ट जारी की। | Current Affairs | Vision IAS
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In Summary

  • रिपोर्ट में सीमेंट, एल्युमीनियम और लघु एवं मध्यम उद्यम (एमएसएमई) क्षेत्रों के लिए कार्बन उत्सर्जन कम करने के रोडमैप का विस्तृत विवरण दिया गया है, जो भारत के जलवायु लक्ष्यों के लिए महत्वपूर्ण हैं।
  • भारत का लक्ष्य 2030 तक जीडीपी उत्सर्जन तीव्रता को 45% तक कम करना और 2070 तक नेट-जीरो उत्सर्जन हासिल करना है।
  • इन क्षेत्रों को कार्बन मुक्त करने से यूरोपीय संघ के सीबीएएम जैसे व्यापार नियमों से उत्पन्न निर्यात जोखिम कम हो जाते हैं।

In Summary

रिपोर्ट्स में सीमेंट, एल्यूमीनियम और MSME क्षेत्रकों के लिए विकार्बनीकरण रोडमैप को रेखांकित किया गया है। 

विकार्बनीकरण (Decarbonisation) क्या है?

  • इसका अर्थ किसी अर्थव्यवस्था या विशिष्ट क्षेत्रकों से कार्बन डाइऑक्साइड (CO₂) उत्सर्जन को कम करने या समाप्त करने की प्रक्रिया से है।

भारत के प्रमुख लक्ष्य

  • राष्ट्रीय स्तर पर निर्धारित योगदान (NDC): 2030 तक जीडीपी की उत्सर्जन तीव्रता को 2005 के स्तर से 45% तक कम करना।
  • पंचामृत लक्ष्य: वर्ष 2070 तक नेट जीरो ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन का लक्ष्य प्राप्त करना।

इन क्षेत्रकों को कार्बन मुक्त करने का महत्त्व

  • भारत के कुल ग्रीनहाउस गैस (GHG) उत्सर्जन में इनका योगदान इस प्रकार है:
    • सीमेंट क्षेत्रक: लगभग 6%.
    • एल्युमीनियम क्षेत्रक: लगभग 2.8%.
  • सूक्ष्म, लघु व मध्यम उद्यम (MSME) क्षेत्रक: यह क्षेत्रक अपनी ऊर्जा व प्रक्रियागत जरूरतों के लिए जीवाश्म ईंधन पर अत्यधिक निर्भर है।
    • 2022 में इस क्षेत्रक ने लगभग 135 मिलियन टन कार्बन उत्सर्जन (MtCO2e) किया था।
  • यूरोपीय संघ के CBAM (कार्बन सीमा समायोजन तंत्र) जैसे उभरते व्यापार नियमों से होने वाले निर्यात जोखिमों को कम करने में मदद मिलेगी।
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CBAM (कार्बन सीमा समायोजन तंत्र)

यूरोपीय संघ द्वारा लागू किया जाने वाला एक तंत्र है जो यूरोपीय संघ में आयातित वस्तुओं पर कार्बन की लागत लगाता है, ताकि यूरोपीय उद्योगों को अनुचित प्रतिस्पर्धा से बचाया जा सके और वैश्विक उत्सर्जन को कम किया जा सके।

MSME क्षेत्रक

सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम (MSME) क्षेत्रक, जो अपनी ऊर्जा और प्रक्रियागत जरूरतों के लिए जीवाश्म ईंधन पर अत्यधिक निर्भर है और महत्वपूर्ण कार्बन उत्सर्जन करता है।

जीएचजी उत्सर्जन (GHG Emission)

ग्रीनहाउस गैसों (जैसे CO₂, मीथेन) का वातावरण में उत्सर्जन, जो पृथ्वी के तापमान को बढ़ाते हैं। भारत के कुल ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन में सीमेंट, एल्यूमीनियम और MSME जैसे क्षेत्रकों का महत्वपूर्ण योगदान है।

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