अमेरिकी राष्ट्रपति ने ‘बोर्ड ऑफ पीस’ के गठन की घोषणा की। इसमें भारत अनुपस्थित रहा। हालांकि, भारत को आमंत्रित किया गया था।
- गठन की घोषणा के समय 19 देशों के प्रतिनिधि शामिल हुए। इनमें अर्जेंटीना, कनाडा, मिस्र, सऊदी अरब और तुर्की शामिल हैं।
बोर्ड ऑफ पीस के बारे में
- यह एक प्रस्तावित अंतरराष्ट्रीय संगठन है। यह एक अस्थायी शासकीय निकाय के रूप में काम करेगा।
- इसे मुख्य रूप से युद्ध के बाद गाजा के प्रबंधन और पुनर्निर्माण के लिए बनाया गया है। हालांकि इसका दायरा भविष्य में अन्य वैश्विक संघर्षों तक भी बढ़ाया जा सकता है।
- उद्देश्य: युद्ध के बाद विशेष रूप से गाजा में प्रशासन, सुरक्षा और अवसंरचना के विकास की देखरेख करना। इसके लिए अंतर्राष्ट्रीय स्रोतों से संसाधनों को जुटाया जाएगा और जवाबदेही सुनिश्चित की जाएगी।
- सदस्यता: इसकी अध्यक्षता अमेरिकी राष्ट्रपति करेंगे।
- इसमें चुनिंदा वैश्विक नेताओं का कार्यकारी बोर्ड होगा।
- सदस्यता निमंत्रण आधारित होगी।
- इसमें कुछ निश्चित अवधि के सदस्य होंगे। कुछ स्थायी और मौद्रिक भुगतान करने वाले सदस्य भी होंगे।
यूरोपीय संघ (EU) ने अपनी 'जनरलाइज्ड स्कीम ऑफ प्रेफरेंसेज' (GSP) के तहत भारत को मिलने वाली व्यापारिक छूटों पर लगी रोक को और आगे बढ़ा दिया है।
यूरोपीय संघ की GSP योजना के बारे में
- यह पहली बार 1971 में शुरू की गई थी।
- यह यूरोपीय संघ की एकपक्षीय व्यापार नीति है। इसके मुख्य उद्देश्य हैं:
- गरीबी कम करना: कमजोर देशों के निर्यात को बढ़ावा देकर उनकी मदद करना।
- सतत विकास और सुशासन को बढ़ावा देना।
- GSP के 3 स्तर हैं:
- सामान्य GSP: इसके तहत पात्र विकासशील देशों के लगभग 66% उत्पादों पर यूरोपीय संघ में आयात शुल्क को कम कर दिया जाता है।
- GSP+: इसके तहत कुछ अभिसमयों (कन्वेंशंस) का पालन करने वाले देशों के 66% उत्पादों पर शून्य शुल्क लगाया जाता है।
- ये अभिसमय मानवाधिकार, श्रम अधिकार और संधारणीयता से संबंधित हैं।
- हथियारों के अलावा सब कुछ (EBA): यह अल्प विकसित देशों (LDCs) के लिए है। इसमें हथियारों को छोड़कर शेष सभी वस्तुओं के आयात पर कोई टैक्स नहीं लगता।
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1 sourceअमेरिका ने ग्रीनलैंड को लेकर आयात प्रशुल्क लगाने की धमकी को वापस ले लिया है।
- अमेरिका और नाटो ने ग्रीनलैंड के भविष्य के प्रबंधन के लिए एक नया 'फ्रेमवर्क' तैयार किया है।
नाटो के बारे में
- स्थापना: इसकी स्थापना 1949 में 'उत्तरी अटलांटिक संधि' के माध्यम से हुई थी। इसे वाशिंगटन संधि भी कहा जाता है।
- मुख्यालय: ब्रुसेल्स (बेल्जियम)।
- स्वरूप: यह यूरोप और उत्तरी अमेरिका के 32 देशों का एक राजनीतिक और सैन्य गठबंधन है।
- स्वीडन इसका सबसे नवीनतम सदस्य है।
- NATO अनुच्छेद 5 के तहत “सामूहिक सुरक्षा के सिद्धांत” पर कार्य करता है।
- अनुच्छेद 5 के अनुसार किसी एक सदस्य पर हमला सभी सदस्यों पर हमला माना जाता है।
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1 sourceभारत निर्वाचन आयोग (ECI) ने “लोकतंत्र और चुनाव प्रबंधन पर अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलन (IICDEM) 2026” में ECINET डिजिटल प्लेटफॉर्म शुरू किया ।
- इस प्लेटफॉर्म का शुरुआती संस्करण बिहार विधानसभा चुनाव 2025 के दौरान सफलतापूर्वक उपयोग किया जा चुका है।
ECINET प्लेटफॉर्म क्या है?
- यह निर्वाचन आयोग की एकीकृत डिजिटल प्रणाली है। यहां चुनाव से जुड़ी सभी प्रक्रियाओं को एक ही प्लेटफॉर्म पर प्रबंधित किया जा सकता है।
- यह निर्वाचन सेवाओं से संबंधित दुनिया का सबसे बड़ा प्लेटफॉर्म है।
- उपलब्ध प्रमुख सुविधाएं:
- मतदाता पंजीकरण, मतदाता सूची में नाम खोजना, आवेदन की स्थिति जानना, उम्मीदवार की जानकारी, चुनाव अधिकारियों से संपर्क, e-EPIC डाउनलोड, शिकायत निवारण।
- महत्व:
- यह चुनावी प्रक्रिया में पारदर्शिता और कार्यकुशलता बढ़ाएगा।
- चुनाव की पल-पल की जानकारी रखी जा सकेगी।
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1 sourceकेंद्र सरकार ने प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना (PMGSY)-IV के तहत छह राज्यों में 10,000 किलोमीटर से अधिक ग्रामीण सड़कों को मंजूरी दी है।
प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के बारे में
- मंत्रालय: केंद्रीय ग्रामीण विकास मंत्रालय
- शुरुआत: दिसंबर 2000 में
- योजना का प्रकार: केंद्र प्रायोजित योजना
- उद्देश्य: सड़कों से न जुड़ी ग्रामीण बस्तियों को हर मौसम में उपयोग वाली पक्की सड़कों से जोड़ना।
- इसमें सड़कों के साथ-साथ पुलों का निर्माण और आधुनिकीकरण भी शामिल है।
- यह योजना गरीबी कम करने की रणनीति का हिस्सा है।
- योजना के विभिन्न चरण::
- चरण I (2000): सभी गांवों को सड़क नेटवर्क से जोड़ना और गांवों को बाजार व अन्य सेवाओं से जोड़ना।
- चरण II (2013): ग्रामीण सड़कों के मौजूदा नेटवर्क में सुधार करना और उन्हें मजबूत बनाना।
- चरण III (2019): स्कूलों और अस्पतालों जैसे सामाजिक-आर्थिक संस्थानों तक पहुंच सुनिश्चित करने के लिए 1,25,000 किलोमीटर सड़कों का उन्नयन।
- PMGSY-IV (2024–29): इसका लक्ष्य 62,500 किलोमीटर सड़कों के माध्यम से ऐसी 25,000 बस्तियों को जोड़ना है जो अभी तक सड़कों से कटी हुई हैं।
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1 source'बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ' (BBBP) अभियान ने अपने 11 साल पूरे कर लिए हैं। इसकी शुरुआत 2015 में हुई थी।
‘बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ’ योजना के बारे में
- यह मिशन शक्ति की 'संबल' (Sambal) घटक के तहत केंद्र प्रायोजित योजना है।
- यह केंद्रीय महिला एवं बाल विकास मंत्रालय; केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय और केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय की एक संयुक्त पहल है।
- बाद में इस योजना में केंद्रीय कौशल विकास एवं उद्यमशीलता और केंद्रीय अल्पसंख्यक कार्य मंत्रालय भी शामिल हो गए।
- मुख्य उद्देश्य:
- जन्म के समय लिंगानुपात में सुधार करना।
- यह सुनिश्चित करना कि कम से कम 95% या उससे अधिक प्रसव अस्पतालों में हों।
- लड़कियों के माध्यमिक शिक्षा में नामांकन और उनके कौशल विकास में हर साल 1% की वृद्धि करना।
- गर्भधारण की पहली तिमाही में प्रसव पूर्व देखभाल (ANC) पंजीकरण में हर साल 1% की वृद्धि करना।
- मुख्य उपलब्धियां:
- राष्ट्रीय “जन्म के समय लिंगानुपात” 918 (2014-15) से बढ़कर 930 (2023-24) हो गया।
- कुल प्रसव में अस्पतालों में प्रसव का अनुपात: 61% (2014-15) से बढ़कर 97.3% (2023-24) हो गया।
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1 sourceब्लू ओरिजिन अपने नए 'टेरावेव' संचार नेटवर्क के लिए हजारों उपग्रह अंतरिक्ष में प्रक्षेपित करेगा।
टेरावेव नेटवर्क क्या है?
- यह एक हाइब्रिड सैटेलाइट नेटवर्क है। इसमें 5,408 उपग्रह शामिल होंगे। ये उपग्रह पृथ्वी की निचली कक्षा (LEO) और पृथ्वी की मध्यम कक्षा (MEO) में स्थापित होंगे।
- यह रेडियो फ्रीक्वेंसी और ऑप्टिकल कनेक्टिविटी के जरिए डेटा संचार करेगा।
- ऑप्टिकल कनेक्टिविटी में डेटा को फाइबर ऑप्टिक केबल्स या मुक्त अंतरिक्ष (फ्री स्पेस) के जरिए प्रकाश स्पन्दों (लाइट पल्स) के माध्यम से भेजा जाता है।
- इसमें विद्युत संकेतों का उपयोग नहीं किया जाता है।
- यह तकनीक प्रकाश तरंगों की प्रक्रिया का उपयोग करती है। इससे बहुत ही तेज स्पीड, अधिक बैंडविड्थ और बिना किसी देरी के संचार करने में मदद मिलती है।
- लक्ष्य: यह सेवा विशेष रूप से बड़ी कंपनियों, सरकारी विभाग डेटा सेंटर्स के लिए है। इससे इन्हें महत्वपूर्ण सेवाओं के संचालन में भरोसेमंद कनेक्टिविटी मिलती है।