यह विशेषज्ञ रिपोर्ट एम.सी. मेहता बनाम भारत संघ मामले में उच्चतम न्यायालय के संबंधित आदेश के बाद तैयार की गई थी।
रिपोर्ट के मुख्य बिंदुओं पर एक नजर
- द्वितीयक पार्टिकुलेट मैटर (PM): यह दिल्ली के सर्दी के मौसम में प्रदूषण में सबसे बड़ा योगदानकर्ता है। यह प्रदूषण में 27% का योगदान करता है।
- द्वितीयक पार्टिकुलेट मैटर सूक्ष्म कण होते हैं। ये प्रत्यक्ष रूप से उत्सर्जित नहीं होते हैं, बल्कि वायुमंडल में मौजूद गैसों (जैसे- SO₂, NOx, NH₃ और VOCs) के बीच रासायनिक अभिक्रियाओं से बनते हैं। उदाहरण के लिए: अमोनियम नाइट्रेट और अमोनियम सल्फेट एरोसोल।
- SO₂: सल्फर डाइऑक्साइड;
- NOx: नाइट्रोजन के ऑक्साइड;
- NH₃: अमोनिया; तथा
- VOCs: वाष्पशील कार्बनिक यौगिक।
- द्वितीयक पार्टिकुलेट मैटर सूक्ष्म कण होते हैं। ये प्रत्यक्ष रूप से उत्सर्जित नहीं होते हैं, बल्कि वायुमंडल में मौजूद गैसों (जैसे- SO₂, NOx, NH₃ और VOCs) के बीच रासायनिक अभिक्रियाओं से बनते हैं। उदाहरण के लिए: अमोनियम नाइट्रेट और अमोनियम सल्फेट एरोसोल।
- सर्दियों में प्रदूषण के अन्य प्रमुख कारक: परिवहन 23% योगदान के साथ सबसे बड़ा 'प्राथमिक स्रोत' है। इसके बाद बायोमास दहन (20%) का स्थान है।
- धूल की हिस्सेदारी 15% है। इसमें सड़क, मिट्टी और निर्माण एवं विध्वंस गतिविधियां शामिल हैं। ताप विद्युत संयंत्रों सहित उद्योगों का योगदान 9% है।
- PM2.5 और PM10 की प्रवृत्तियां: 2016 के बाद से दिल्ली में PM2.5 और PM10 की सांद्रता में धीरे-धीरे गिरावट व स्थिरता देखी गई है।
- हालांकि, वार्षिक राष्ट्रीय परिवेशी वायु गुणवत्ता मानकों (NAAQS) को पूरा करने के लिए अभी भी एक बड़ा अंतर शेष है।
- सीमा-पार प्रदूषण: दिल्ली में PM2.5 का लगभग दो-तिहाई हिस्सा दिल्ली की सीमाओं के बाहर से आता है।
- मौसमी प्रभाव: सर्दियों के दौरान प्रदूषण मुख्य रूप से पवनों की कम गति, 'ग्रहीय सीमा परत' के सुभेद्य होने और वायुमंडलीय स्थिरता के कारण चरम पर होता है। ये स्थितियां प्रदूषकों को बाहर निकालने की बजाय एक जगह फंसा देती हैं। उत्सर्जन में अचानक वृद्धि इतने लंबे समय तक प्रदूषण का प्राथमिक कारण नहीं है।
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