G4 देशों ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) के पुनर्गठन के लिए एक 'शीघ्र कार्रवाई’ मॉडल प्रस्तुत किया है।
- G4 देश (भारत, ब्राजील, जर्मनी और जापान) सुरक्षा परिषद में स्थायी सदस्यता के लिए एक-दूसरे के दावे का समर्थन करते हैं।
संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) के बारे में
- स्थापना: संयुक्त राष्ट्र चार्टर के माध्यम से 1945 में संयुक्त राष्ट्र के 6 प्रमुख अंगों में से एक के रूप में स्थापित।
- कार्य: अंतर्राष्ट्रीय शांति और सुरक्षा बनाए रखने की प्राथमिक जिम्मेदारी।
- संरचना: 5 स्थायी सदस्य (P5) और 10 अस्थायी सदस्य।
- P5 में चीन, फ्रांस, रूस, संयुक्त राज्य अमेरिका और यूनाइटेड किंगडम शामिल हैं।
- 10 अस्थायी सदस्य: महासभा द्वारा 2 वर्ष के कार्यकाल के लिए चुने जाते हैं। ये तत्काल पुनर्निर्वाचन के पात्र नहीं होते।
प्रस्तावित प्रमुख सुधार
- परिषद का विस्तार: सीटों की संख्या बढ़ाकर 25 या 26 करना, जिसमें निम्नलिखित शामिल हैं:
- 6 नए स्थायी सदस्य (कुल 11 स्थायी सीटें)।
- 14 या 15 अस्थायी सदस्य।
- नए स्थायी सीटों का क्षेत्रीय वितरण:
- 2 सीटें अफ्रीकी देशों से।
- 2 सीटें एशिया-प्रशांत देशों से।
- 1 सीट लैटिन अमेरिकी और कैरेबियाई देशों से।
- 1 सीट पश्चिमी यूरोपीय और अन्य देशों से।
UNSC सुधारों की आवश्यकता क्यों है?
- पुरानी शक्ति संरचना: वर्तमान संरचना द्वितीय विश्व युद्ध के बाद की वास्तविकता को दर्शाती है। यह आधुनिक शक्ति संतुलन और 'ग्लोबल साउथ' के हितों की उपेक्षा करती है।
- वीटो गतिरोध: प्रमुख संघर्षों (जैसे- यूक्रेन, गाजा आदि) के दौरान वीटो के कारण परिषद अक्सर निष्क्रिय हो जाती है। इससे इसकी विश्वसनीयता को नुकसान पहुंचता है।
- कम प्रतिनिधित्व: भारत जैसे प्रमुख राष्ट्रों के पास स्थायी प्रतिनिधित्व की कमी है।
- वित्तीय निर्भरता: कुछ बड़े दानदाताओं (जैसे अमेरिका) पर निर्भरता से बजट में अस्थिरता उत्पन्न होती है और संयुक्त राष्ट्र के कार्यों पर अनुचित प्रभाव का जोखिम बना रहता है।