संयुक्त राष्ट्र पर्यावरण कार्यक्रम (UNEP) ने ‘प्रकृति के लिए वित्त की स्थिति रिपोर्ट, 2026’ जारी की | Current Affairs | Vision IAS
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In Summary

  • ग्लोबल फाइनेंस, नेचर-पॉजिटिव सॉल्यूशन ($220 बिलियन) के बजाय नेचर-नेगेटिव एक्टिविटी ($7.3 ट्रिलियन) को ज़्यादा पसंद करता है, जिससे फंडिंग में काफी कमी आती है।
  • रियो कन्वेंशन के लक्ष्यों को पूरा करने के लिए 2030 तक सालाना नेचर-बेस्ड सॉल्यूशन (NbS) इन्वेस्टमेंट को दोगुना से ज़्यादा $571 बिलियन करने की ज़रूरत है।
  • मुख्य सुझावों में कैपिटल को शिफ्ट करना, नुकसानदायक सब्सिडी में सुधार करना, नेचर से जुड़े रिस्क के खुलासे को ज़रूरी बनाना, और प्राइवेट कैपिटल के लिए ब्लेंडेड फाइनेंस का फ़ायदा उठाना शामिल है।

In Summary

यह रिपोर्ट वैश्विक व्यय में वित्तीय असंतुलन पर प्रकाश डालती है। यह व्यय प्रकृति-सकारात्मक वित्त की तुलना में प्रकृति-नकारात्मक वित्त की ओर अधिक झुका हुआ है।

  • प्रकृति-सकारात्मक वित्त: उन गतिविधियों में निवेश करना, जो पर्यावरण संरक्षण को बढ़ावा देती हैं। जैसे: प्रकृति-आधारित समाधान (NbS)।
  • प्रकृति-नकारात्मक वित्त: वे निवेश, जो प्राकृतिक अवसंरचना को नुकसान पहुंचा सकते हैं। जैसे: पर्यावरण के लिए हानिकारक सब्सिडी।

रिपोर्ट के मुख्य बिंदुओं पर एक नजर

  • बहुत अधिक वित्त-पोषण अंतराल: वर्ष 2023 में, प्रकृति-नकारात्मक गतिविधियों के लिए वित्त-पोषण $7.3 ट्रिलियन (30 गुना अधिक) तक पहुंच गया था। इसके विपरीत, प्रकृति-आधारित समाधानों (NbS) में केवल $220 बिलियन का निवेश किया गया था।
  • सार्वजनिक-निजी वित्त-पोषण अंतराल: NbS वित्त-पोषण का 90% हिस्सा सार्वजनिक वित्त है। इसके विपरीत, निजी वित्त-पोषण जीवाश्म ईंधन और भारी उद्योग जैसे उच्च-प्रभाव वाले क्षेत्रों में केंद्रित है।
  • निवेश की आवश्यकता: रियो अभिसमय के लक्ष्यों को पूरा करने के लिए, वार्षिक NbS निवेश को 2030 तक 2.5 गुना से अधिक बढ़ाकर $571 बिलियन करना होगा।
    • रियो अभिसमय के लक्ष्य: वैश्विक तापन को 1.5°C तक सीमित करना; जैव विविधता के नुकसान को रोकना आदि। 
  • मुख्य सिफारिशें: 
    • पूंजी प्रवाह को प्रकृति-नकारात्मक गतिविधियों से दूर करना चाहिए;
    • हानिकारक सब्सिडी में सुधार करना चाहिए;
    • प्रकृति-संबंधी जोखिमों के प्रकटीकरण को अनिवार्य करना चाहिए;
    • निजी पूंजी जुटाने के लिए मिश्रित वित्त व निवेश को जोखिम मुक्त बनाना चाहिए आदि।

प्रकृति-आधारित समाधान (NbS) के बारे में

  • NbS सामाजिक चुनौतियों से निपटने के लिए प्रकृति और स्वस्थ पारिस्थितिकी-तंत्र की शक्ति का उपयोग करता है। इसमें प्राकृतिक और संशोधित पारिस्थितिकी-तंत्रों की रक्षा, उनके सतत प्रबंधन तथा पुनर्स्थापन के कार्य शामिल हैं। इससे लोगों और प्रकृति दोनों को लाभ होता है। 
    • उदाहरण: कोरल रीफ (मूंगा/ प्रवाल चट्टान) का संरक्षण और पुनर्स्थापन, हरित शहरों का निर्माण आदि।

प्रकृति-आधारित समाधान (NbS) के लिए प्रमुख पहलें

  • वैश्विक स्तर पर
    • कुनमिंग-मॉन्ट्रियल वैश्विक जैव विविधता फ्रेमवर्क (KMGBF): इसका लक्ष्य 2030 तक 30% भूमि और 30% समुद्र की रक्षा करना तथा हानिकारक सब्सिडी में प्रति वर्ष $500 बिलियन की कमी करना है।
    • प्रकृति-संबंधी वित्तीय प्रकटीकरण कार्यबल (TNFD): यह व्यवसायों के लिए प्रकृति-संबंधी जोखिमों और प्रभावों पर रिपोर्ट करने एवं कार्रवाई करने के लिए एक फ्रेमवर्क है। 
  • भारत में पहलें
    • मैंग्रोव इनिशिएटिव फॉर शोरलाइन हैबिटेट्स एंड टैन्जबल इनकम्स (MISHTI): यह तटरेखा और नमक के मैदानों के किनारे मैंग्रोव वृक्षारोपण के उद्देश्य से शुरू की गई पहल है।
    • अमृत धरोहर: सामुदायिक भागीदारी के माध्यम से रामसर स्थलों (आर्द्रभूमियों) के संरक्षण को बढ़ावा देना।
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अमृत धरोहर (Amrit Dharohar)

भारत सरकार की एक योजना जो सामुदायिक भागीदारी के माध्यम से रामसर स्थलों (महत्वपूर्ण आर्द्रभूमियों) के संरक्षण और टिकाऊ उपयोग को बढ़ावा देती है।

मैंग्रोव इनिशिएटिव फॉर शोरलाइन हैबिटेट्स एंड टैन्जबल इनकम्स (MISHTI)

भारत सरकार की एक पहल जिसका उद्देश्य तटीय क्षेत्रों और नमक के मैदानों के किनारे मैंग्रोव वृक्षारोपण को बढ़ावा देना है, जिससे तटीय पारिस्थितिक तंत्र की रक्षा हो सके।

प्रकृति-संबंधी वित्तीय प्रकटीकरण कार्यबल (Taskforce on Nature-related Financial Disclosures - TNFD)

एक वैश्विक पहल जो व्यवसायों और वित्तीय संस्थानों के लिए प्रकृति से संबंधित जोखिमों और अवसरों पर रिपोर्ट करने के लिए एक ढाँचा विकसित करती है। इसका उद्देश्य वित्तीय प्रवाह को प्रकृति-नकारात्मक गतिविधियों से दूर करना है।

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