उच्चतम न्यायालय ने मेटा और व्हाट्सएप की ‘निजता का अधिकार’ संबंधी नीति को लेकर उनसे प्रश्न किए | Current Affairs | Vision IAS
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In Summary

  • सुप्रीम कोर्ट ने मेटा/व्हाट्सएप की उन अपीलों पर सुनवाई की, जिनमें एनसीएलएटी द्वारा 2021 की व्हाट्सएप की गोपनीयता नीति को लेकर सीसीआई द्वारा लगाए गए 213.14 करोड़ रुपये के जुर्माने को बरकरार रखने के खिलाफ अपील की गई थी।
  • इस नीति के तहत विज्ञापन के लिए फेसबुक ग्रुप कंपनियों के साथ डेटा साझा करने की अनुमति दी गई थी, जिससे उपयोगकर्ताओं पर इसे स्वीकार करने या अस्वीकार करने का विकल्प थोपा गया था।
  • इन मुद्दों में व्यावसायिक शोषण, प्रमुख स्थिति का दुरुपयोग, निजता का हनन और स्पष्टता की कमी शामिल थी, जो डीपीडीपी अधिनियम, 2023 और पुट्टास्वामी निर्णय के विपरीत थे।

In Summary

उच्चतम न्यायालय मेटा प्लेटफॉर्म्स और व्हाट्सएप द्वारा दायर अपीलों पर सुनवाई कर रहा था। मेटा प्लेटफॉर्म्स और व्हाट्सएप ने राष्ट्रीय कंपनी विधि अपील अधिकरण (NCLAT) के एक निर्णय के खिलाफ अपीलें दायर की थीं। 

  • ज्ञातव्य है कि NCLAT ने अपने एक निर्णय में भारतीय प्रतिस्पर्धा आयोग (CCI) द्वारा व्हाट्सएप की 2021 की निजता का अधिकार संबंधी नीति पर ₹213.14 करोड़ के जुर्माने को उचित ठहराया था। 

व्हाट्सएप की 2021 की निजता का अधिकार संबंधी नीति क्या है?

  • यह नीति व्हाट्सएप को व्यावसायिक विज्ञापन एवं विपणन के उद्देश्यों के लिए अपने उपयोगकर्ताओं का डेटा फेसबुक और उसकी सभी समूह कंपनियों के साथ साझा करने की अनुमति देती है।
  • 'मानो या छोड़ो' (Take-it-or-Leave-it) फ्रेमवर्क: इस नीति के तहत उपयोगकर्ताओं के पास केवल दो विकल्प थे: या तो वे अपनी व्यक्तिगत जानकारी फेसबुक के साथ साझा करने के लिए सहमत हों, या फिर अपना व्हाट्सएप अकाउंट बंद कर दें।

2021 की नीति में विचार की गई प्रमुख समस्याएं

  • उच्चतम न्यायालय ने इस नीति में निम्नलिखित गंभीर कमियों को रेखांकित किया:
    • व्यक्तिगत डेटा का व्यावसायिक उपयोग: न्यायालय ने माना कि व्यक्तिगत डेटा का उपयोग व्यवहार संबंधी रुझानों का विश्लेषण करने के लिए किया जाता है। मेटा इसका उपयोग अन्य प्लेटफॉर्म्स (जैसे- यूट्यूब या ईमेल) पर ऑनलाइन विज्ञापन के क्षेत्र में अपना वर्चस्व बनाए रखने के लिए कर सकता है।
    • प्रभुत्व का दुरुपयोग: व्हाट्सएप ने डेटा साझाकरण स्वीकार न करने वालों पर अनुचित शर्तें थोपकर और उनके साथ भेदभाव करके बाजार में अपनी वर्चस्वपूर्ण स्थिति का दुरुपयोग किया है।
    • डेटा साझाकरण से निजता का हनन: विज्ञापन और व्यावसायिक उद्देश्यों के लिए फेसबुक और संबंधित कंपनियों के साथ आंतरिक डेटा साझाकरण को बड़े पैमाने पर बढ़ाकर निजता को कमजोर किया गया है।
    • स्पष्टता का अभाव: न्यायालय ने जोर दिया कि नीति की भाषा इतनी जटिल और अस्पष्ट है कि यह आम या अल्प साक्षर नागरिकों की समझ से बाहर है।

भारत में डेटा सुरक्षा के लिए उठाए गए कदम

  • डिजिटल व्यक्तिगत डेटा संरक्षण (DPDP) अधिनियम, 2023: इसका उद्देश्य डिजिटल व्यक्तिगत डेटा प्रोसेसिंग के लिए ऐसे नियम बनाना है, जो व्यक्तियों के अपने डेटा की रक्षा करने के अधिकार और वैध उद्देश्यों के लिए इस तरह के डेटा को प्रोसेस करने की आवश्यकता, दोनों को मान्यता देते हैं।
    • उच्चतम न्यायालय ने रेखांकित किया कि DPDP अधिनियम, 2023 में "रेंट शेयरिंग" (आय या लाभ में हिस्सा मिलना) के लिए कोई प्रावधान नहीं है। इसका अर्थ है कि यह अधिनियम केवल डेटा की सुरक्षा और निजता की सुरक्षा की बात करता है, लेकिन यह इस बारे में मौन है कि उपयोगकर्ता को उसके डेटा से होने वाली आर्थिक आय में हिस्सा मिलना चाहिए या नहीं।
  • न्यायिक निरीक्षण: उच्चतम न्यायालय ने ऐतिहासिक पुट्टास्वामी निर्णय (2017) में निजता के अधिकार को संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत एक मूल अधिकार के रूप में मान्यता दी थी।
  • न्यायमूर्ति बी.एन. श्रीकृष्ण समिति (2017): इस समिति ने डेटा सुरक्षा से जुड़े मुद्दों की जांच की थी और भारत में डेटा संरक्षण के लिए एक व्यापक कानून बनाने की सिफारिश की थी।
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न्यायमूर्ति बी.एन. श्रीकृष्ण समिति (2017)

भारत सरकार द्वारा गठित समिति जिसका उद्देश्य डेटा संरक्षण मुद्दों का परीक्षण करना और एक व्यापक डेटा संरक्षण कानून के लिए सिफारिशें प्रदान करना था। इस समिति की रिपोर्ट DPDP अधिनियम के निर्माण का आधार बनी।

पुट्टास्वामी निर्णय (2017)

यह भारतीय न्यायपालिका का एक ऐतिहासिक निर्णय था जिसने निजता के अधिकार को भारतीय संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत एक मौलिक अधिकार के रूप में मान्यता दी, जो जीवन और व्यक्तिगत स्वतंत्रता की सुरक्षा करता है।

डिजिटल व्यक्तिगत डेटा संरक्षण (DPDP) अधिनियम, 2023

यह अधिनियम डिजिटल माध्यमों से एकत्र किए गए व्यक्तिगत डेटा के प्रसंस्करण (processing) को नियंत्रित करता है, जिसमें ऑफलाइन स्रोतों से डिजिटाइज़ किया गया डेटा भी शामिल है। इसका उद्देश्य भारतीय डेटा संरक्षण बोर्ड की स्थापना करना है।

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