पूंजीगत वस्तुओं का तात्पर्य किसी भी ऐसे संयंत्र, मशीनरी, उपकरण या सहायक सामग्रियों (accessories) से है, जो प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से वस्तुओं के निर्माण या उत्पादन या सेवाएं प्रदान करने के लिए आवश्यक हैं। इसमें प्रतिस्थापन (replacement), आधुनिकीकरण, तकनीकी उन्नयन या विस्तार के लिए आवश्यक उपकरण भी शामिल हैं।
पूंजीगत वस्तुओं पर बजट का फोकस
- अवसंरचना विकास: वित्त वर्ष 2026-27 में सार्वजनिक पूंजीगत व्यय (Capex) को लगभग 9% बढ़ाकर ₹12.2 लाख करोड़ किया गया है। इसका लक्ष्य अंतर्देशीय पोत परिवहन को बढ़ावा देना और हाई-स्पीड रेल गलियारे का विस्तार करना है।
- हाई-टेक टूल रूम: बड़े पैमाने पर उच्च-परिशुद्ध घटकों के स्थानीय डिजाइन और निर्माण के लिए केंद्रीय लोक सेवा उद्यम (CPSE) के नेतृत्व में हाई-टेक टूल रूम्स की स्थापना की जाएगी।
- CIE योजना: टनल-बोरिंग मशीनों के स्वदेशी उत्पादन को बढ़ावा देने के लिए 'विनिर्माण और अवसंरचना उपकरण संवर्धन योजना' (CIE Scheme) प्रस्तुत की गई है।
- लॉजिस्टिक्स को बढ़ावा: आयात निर्भरता और लॉजिस्टिक्स लागत को कम करने के लिए नई कंटेनर विनिर्माण योजना के लिए ₹10,000 करोड़ का परिव्यय निर्धारित किया गया है।
- शुल्क छूट: लिथियम-आयन सेल निर्माण और महत्वपूर्ण खनिज प्रसंस्करण में उपयोग की जाने वाली पूंजीगत वस्तुओं के लिए बुनियादी सीमा शुल्क (BCD) छूट का विस्तार किया गया है।
- आयकर छूट: भारत में टोल विनिर्माण को बढ़ावा देने के लिए, बजट में उस किसी भी अनिवासी संस्था हेतु पांच वर्षों की अवधि के लिए आयकर छूट का प्रस्ताव किया गया है, जो बॉन्डेड क्षेत्र में कार्यरत टोल निर्माता को पूंजीगत सामान, उपकरण या औजार उपलब्ध कराती है।

पूंजीगत वस्तु क्षेत्रक को मजबूत करने के लिए हालिया नीतिगत समर्थन
- PLI योजनाएं: उत्पादन से संबद्ध प्रोत्साहन (PLI) योजनाएं प्रौद्योगिकी अपनाने और उत्पादन के पैमाने को बढ़ाने में मदद कर रही हैं।
- भारतीय पूंजीगत वस्तु क्षेत्रक में प्रतिस्पर्धात्मकता बढ़ाने की योजना: उन्नत उत्कृष्टता केंद्रों (Centers of Excellence) और परीक्षण अवसंरचना पर ध्यान केंद्रित किया जा रहा है।