प्राथमिक कृषि ऋण समितियों (PACS) को बहुउद्देशीय ग्रामीण विकास इंजन में परिवर्तित किया जाएगा | Current Affairs | Vision IAS
मेनू
होम

यूपीएससी सिविल सेवा परीक्षा के लिए प्रासंगिक राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय विकास पर समय-समय पर तैयार किए गए लेख और अपडेट।

त्वरित लिंक

High-quality MCQs and Mains Answer Writing to sharpen skills and reinforce learning every day.

महत्वपूर्ण यूपीएससी विषयों पर डीप डाइव, मास्टर क्लासेस आदि जैसी पहलों के तहत व्याख्यात्मक और विषयगत अवधारणा-निर्माण वीडियो देखें।

करंट अफेयर्स कार्यक्रम

यूपीएससी की तैयारी के लिए हमारे सभी प्रमुख, आधार और उन्नत पाठ्यक्रमों का एक व्यापक अवलोकन।

ESC

In Summary

  • सरकार की योजना 5 वर्षों में सभी पंचायतों और गांवों को शामिल करते हुए नए बहुउद्देशीय पीएसीएस/डेयरी/मत्स्य पालन सहकारी समितियों की स्थापना करने की है।
  • पीएसीएस, यानी जमीनी स्तर की सहकारी ऋण संस्थाएं, सीआरसीएस (बहु-राज्य) या राज्य आरसीएस (एकल राज्य) द्वारा विनियमित होती हैं।
  • इन पहलों में पीएसीएस का कम्प्यूटरीकरण, राष्ट्रीय सहयोग नीति 2025, आदर्श उपनियम और समावेशी शासन संशोधन शामिल हैं।

In Summary

सरकार ने अगले 5 वर्षों में देश की सभी पंचायतों और गांवों को कवर करने के लिए नई बहुउद्देशीय PACS/ डेयरी/ मत्स्य सहकारी समितियां स्थापित करने का लक्ष्य निर्धारित किया है।

प्राथमिक कृषि ऋण समितियों (PACS) के बारे में

  • PACS अल्पकालिक सहकारी ऋण संरचना की जमीनी स्तर की संस्थाएं हैं। यह उधारकर्ताओं और उच्च वित्त-पोषक संस्थाओं (जैसे- अनुसूचित वाणिज्यिक बैंक और RBI/ NABARD) के बीच अंतिम मील की कड़ी (last-mile link) के रूप में कार्य करती हैं। इसका अर्थ है कि ये सेवा वितरण की अंतिम कड़ी हैं, जो सीधे ग्राहकों (किसान) से जुड़ती हैं। 
  • वर्तमान स्थिति: स्वीकृत PACS: 79,630; नए पंजीकृत PACS: 32,802; तथा डिजिटल किए गए PACS: 61,478।
  • विनियमन:
    • बहु-राज्य PACS: ये संविधान की संघ सूची की प्रविष्टि 44 के अंतर्गत आती हैं। साथ ही, बहु-राज्य सहकारी सोसायटी अधिनियम, 2002 के प्रावधानों के तहत केंद्रीय सहकारी सोसायटी रजिस्ट्रार (CRCS) द्वारा प्रशासित होती हैं।
    • एकल-राज्य PACS: ये संविधान की राज्य सूची की प्रविष्टि 32 के अंतर्गत आती हैं और संबंधित राज्य सहकारी सोसायटी अधिनियम के तहत संबंधित राज्य सहकारी सोसायटी रजिस्ट्रार (RCS) द्वारा प्रशासित होती हैं।

PACS की क्षमता और महत्त्व

  • कृषि: 'विश्व की सबसे बड़ी विकेंद्रीकृत अनाज भंडारण योजना' के माध्यम से बेहतर अवसंरचना और फसल कटाई उपरांत सहायता प्रदान की जाती है। यह योजना गोदाम और कस्टम हायरिंग सेंटर स्थापित करती है। 
  • डेयरी क्षेत्रक: 21,000 से अधिक नई डेयरी सहकारी समितियों के पंजीकरण के माध्यम से 5 वर्षों में दुग्ध खरीद को 50% तक बढ़ाने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है।
  • मात्स्यिकी क्षेत्रक: 1,000 मत्स्य सहकारी समितियों को 'मत्स्य किसान उत्पादक संगठनों' (FFPOs) में बदलकर बाजार संपर्क और मूल्य संवर्धन में सुधार किया जा रहा है। 

PACS को बढ़ावा देने के लिए शुरू की गई पहलें

  • PACS कंप्यूटरीकरण परियोजना: एक साझे ERP (एंटरप्राइज रिसोर्स प्लानिंग)-आधारित राष्ट्रीय सॉफ्टवेयर के तहत PACS का कंप्यूटरीकरण किया जा रहा है।
  • राष्ट्रीय सहयोग नीति (NCP) 2025: सदस्यता का विस्तार किया जा रहा है और महिलाओं व कमजोर वर्गों के लिए नेतृत्वकारी भूमिकाएं निर्धारित की जा रही हैं। 
  • आदर्श उप-नियमों (Model Bye-laws) को अपनाना: इसका उद्देश्य PACS को बहुउद्देशीय सेवा केंद्रों के रूप में कार्य करने में सक्षम बनाना है।
    • बहुउद्देशीय सेवा केंद्र अग्रलिखित रूपों में होंगे - पीएम किसान समृद्धि केंद्र, सामान्य सेवा केंद्र, वेयरहाउसिंग, कस्टम हायरिंग सेंटर, प्राथमिक प्रसंस्करण केंद्र आदि। 
  • समावेशी शासन:
    • बहु-राज्य सहकारी सोसायटी (संशोधन) अधिनियम, 2023 के तहत सहकारी बोर्डों में महिलाओं और SC/ST सदस्यों के अनिवार्य प्रतिनिधित्व का प्रावधान किया गया है।
    • स्वयं सहायता समूहों (SHGs), लघु एवं सीमांत किसानों और जनजातीय समुदायों का समावेशन किया जा रहा है।
Tags:
Watch Video News Today

Explore Related Content

Discover more articles, videos, and terms related to this topic

RELATED TERMS

3

बहु-राज्य सहकारी सोसायटी (संशोधन) अधिनियम, 2023

यह संशोधन सहकारी बोर्डों में महिलाओं और SC/ST सदस्यों के अनिवार्य प्रतिनिधित्व का प्रावधान करता है, जिससे शासन में समावेशन सुनिश्चित होता है।

बहुउद्देशीय सेवा केंद्र

PACS को बढ़ावा देने के तहत, इन्हें विभिन्न सेवाओं के लिए केंद्रों के रूप में विकसित किया जा रहा है, जैसे कि पीएम किसान समृद्धि केंद्र, सामान्य सेवा केंद्र, वेयरहाउसिंग, कस्टम हायरिंग सेंटर और प्राथमिक प्रसंस्करण केंद्र।

राष्ट्रीय सहयोग नीति (NCP) 2025

यह भारत सरकार की एक नीति है जिसका उद्देश्य सहकारी समितियों के माध्यम से समावेशी विकास को बढ़ावा देना है, जिसमें सदस्यता का विस्तार और कमजोर वर्गों की भागीदारी बढ़ाना शामिल है।

Title is required. Maximum 500 characters.

Search Notes

Filter Notes

Loading your notes...
Searching your notes...
Loading more notes...
You've reached the end of your notes

No notes yet

Create your first note to get started.

No notes found

Try adjusting your search criteria or clear the search.

Saving...
Saved

Please select a subject.

Referenced Articles

linked

No references added yet