केंद्र सरकार ने VOPPA आदेश का अनुपालन नहीं करने पर खाद्य तेल कंपनियों को 'कारण बताओ नोटिस' जारी किए।
VOPPA आदेश, 2025 के बारे में
- यह VOPPA आदेश, 2011 में संशोधन है।
- VOPPA आदेश से आशय है-’वनस्पति तेल उत्पाद, उत्पादन और उपलब्धता (विनियमन) संशोधन आदेश, 2025'।
- यह आवश्यक वस्तु अधिनियम, 1955 के तहत जारी किया गया। इसमें सांख्यिकी संग्रहण अधिनियम, 2008 के प्रावधान शामिल किए गए हैं।
- उद्देश्य: भारत में वनस्पति तेल उत्पादों के उत्पादन को विनियमित करना और उनकी उपलब्धता सुनिश्चित करना।
नए आदेश के मुख्य प्रावधान:
- अनिवार्य पंजीकरण: सभी खाद्य तेल निर्माताओं, प्रसंस्करणकर्ताओं, मिश्रणकर्ताओं और पुन: पैक करने वालों को नेशनल सिंगल विंडो सिस्टम (NSWS) और VOPPA पोर्टल पर पंजीकरण कराना अनिवार्य है।
- मासिक विवरण देना जरूरी: उत्पादन, भंडारण, आयात, बिक्री और उपलब्धता से संबंधित सूचना हर महीने देनी होगी।
- विस्तार: यह आदेश कच्चे तेल, परिष्कृत तेल, मिश्रित तेल, वनस्पति (Vanaspati) और मार्जरीन पर लागू होगा।
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1 sourceकेंद्रीय बजट 2026-27 में ‘टर्टल ट्रेल्स’ की घोषणा को लेकर संरक्षणवादियों और वन्यजीव शोधकर्ताओं ने चिंता जताई है।
टर्टल ट्रेल्स के बारे में
- बजटीय प्रस्ताव: केंद्र सरकार ओडिशा, कर्नाटक और केरल के तटों पर कछुआ के प्रमुख नीडन स्थलों (nesting sites) पर पर्यावरण-अनुकूल टर्टल ट्रेल्स विकसित करने की योजना बना रही है।
- स्थानीय पारिस्थितिकी को खतरा: विशेषज्ञों का कहना है कि अरिबाडा यानी सामूहिक नीडन स्थल (Mass nesting sites) वाले क्षेत्रों को निषिद्ध क्षेत्र (नो-गो ज़ोन) बनाए रखना चाहिए। उनका तर्क है कि कृत्रिम रोशनी और इंसानी गतिविधियां कछुओं को भ्रमित कर देती हैं।
- अरिबाडा वास्तव में ओलिव रिडले कछुओं द्वारा सामूहिक रूप से अंडा देने के तटीय स्थल हैं।
- संरक्षण बनाम पर्यटन: शोधकर्ताओं ने रुशिकुल्या जैसे संवेदनशील कछुआ प्रजनन स्थलों (रूकरी) पर अवसंरचनाओं के निर्माण के खिलाफ चेतावनी दी है। उन्होंने कहा है कि पहले भी ऐसे नाजुक क्षेत्रों में इको-टूरिज्म असफल रहा है।
- वैकल्पिक संधारणीय उपाय: बिना व्यवधान वाली अवसंरचनाएं, कम कार्बन का उत्सर्जन, और स्थानीय समुदायों की भागीदारी को प्राथमिकता देना।
विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि नई स्टार्ट संधि (New START Treaty) की अवधि समाप्त होने से विश्व के दो सबसे बड़े परमाणु शस्त्रागारों पर अंतिम कानूनी नियंत्रण भी समाप्त हो जाएगा।
नई स्टार्ट संधि के बारे में
- इस संधि पर 2010 में हस्ताक्षर हुआ और यह 2011 में लागू हुई।
- पूरा नाम: इसका अर्थ है 'सामरिक शस्त्र न्यूनीकरण संधि' (New Strategic Arms Reduction Treaty)।
- परमाणु हथियार रखने की सीमा: यह संधि अमेरिका और रूस के तैनात सामरिक परमाणु हथियारों (warheads) की संख्या को अधिकतम 1,550 (प्रत्येक) पर सीमित करती है।
- परमाणु हथियार ले जाने वाली प्रणालियों पर नियंत्रण: यह संधि परमाणु हथियारों की होड़ को रोकने के लिए अंतरमहाद्वीपीय बैलिस्टिक मिसाइलें (ICBMs), पनडुब्बी से प्रक्षेपित बैलिस्टिक मिसाइलें (SLBMs) और भारी बमवर्षकों की संख्या को सीमित करती है।
- हथियार नियंत्रण व्यवस्था को मजबूत करना: यह अमेरिका और रूस के बीच कानूनी रूप से बाध्यकारी एकमात्र द्विपक्षीय परमाणु हथियार नियंत्रण संधि है। यह संधि वैश्विक “परमाणु अप्रसार मानकों” को सुदृढ़ करती है।
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1 sourceब्लू ओरिजिन ने हाल ही में अपने न्यू शेफर्ड सब-ऑर्बिटल अंतरिक्ष पर्यटन कार्यक्रम को कम से कम दो वर्षों के लिए स्थगित कर दिया है।
- यह कदम नासा के आर्टेमिस लूनर लैंडर के विकास को प्राथमिकता देने के लिए उठाया गया है।
सब-ऑर्बिटल पर्यटन के बारे में
- सब-ऑर्बिटल उड़ान: ये लघु अवधि की अंतरिक्ष यात्राएं हैं। इसमें यान पृथ्वी से 100 किलोमीटर की ऊंचाई पर कारमन रेखा को पार करता है। इसमें यान पृथ्वी की पूर्ण परिक्रमा कक्षा में प्रवेश किए बिना अंतरिक्ष के किनारे तक पहुंचता है।
- परवलयिक पथ: इसमें यान एक परवलयाकार पथ का अनुसरण करता है। सब-ऑर्बिटल यान पृथ्वी की कक्षा में बने रहने के लिए आवश्यक अत्यधिक वेग प्राप्त नहीं करते।
- उड़ान अवधि: ऐसी उड़ानें बहुत कम समय की होती हैं, सामान्यतः 10–15 मिनट की।
- यात्रियों को अनुभव: यात्री पृथ्वी की वक्रता को देख पाते हैं और उड़ान के सह-गमन चरण (coasting phase) के दौरान कुछ मिनटों तक भारहीनता (microgravity) का अनुभव करते हैं।
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1 sourceरक्षा अनुसंधान एवं विकास (DRDO) ने ओडिशा के चांदीपुर स्थित समन्वित परीक्षण केंद्र (ITR) से ठोस ईंधन डक्टेड रैमजेट (SFDR) प्रौद्योगिकी का सफल परीक्षण प्रदर्शन किया।
ठोस ईंधन डक्टेड रैमजेट (SFDR) प्रौद्योगिकी के बारे में
- अवधारणा: यह एक उन्नत मिसाइल प्रणोदन तकनीक है। यह ठोस ईंधन रॉकेट और एयर-ब्रीदिंग रैमजेट इंजन, दोनों प्रकार की तकनीकों का लाभ एक साथ प्रदान करती है।
- रैमजेट एक प्रकार का एयर-ब्रीदिंग जेट इंजन है। इस तकनीक में पथ में आने वाली वायु को संपीडित करने के लिए मिसाइल की आगे की तेज गति का उपयोग किया जाता है। इसमें घूर्णन वाले जटिल उपकरण की आवश्यकता नहीं होती है।
- कार्यप्रणाली: यह तकनीक दहन के लिए वायुमंडलीय ऑक्सीजन का उपयोग करती है। इससे मिसाइल में ऑक्सिडाइजर ले जाने की आवश्यकता कम हो जाती है।
- लाभ: इससे मिसाइल की मारक दूरी बढ़ती है और वह लंबे समय तक उच्च गति से उड़ान भर सकती है।
- मुख्य घटक: बूस्टर, SFDR मोटर, और नियंत्रित ईंधन-प्रवाह तंत्र।
- उपयोग: मुख्य रूप से लंबी दूरी की हवा-से-हवा में मार करने वाली उन्नत मिसाइलों के लिए।
- महत्त्व: इस तकनीक की सफलता के साथ भारत उन चुनिंदा देशों में शामिल हो गया है, जिनके पास ठोस ईंधन डक्टेड रैमजेट क्षमता है।
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1 sourceबीरबल साहनी पुराविज्ञान संस्थान (BSIP) के एक अध्ययन में विशालकाय शाकाहारी जीवों (मेगा-हर्बिवोर्स) की स्थिति की जांच की गई है।
- इस अध्ययन में विशेष रूप से भारतीय एक-सींग वाले गैंडों की संख्या में आई कमी और काजीरंगा राष्ट्रीय उद्यान तक इनके सीमित रहने के कारणों का विश्लेषण किया गया है।
- अध्ययन में जीवाश्म साक्ष्यों के आधार पर बताया गया है कि यह प्रजाति कभी पूरे भारतीय उपमहाद्वीप में व्यापक रूप से फैली हुई थी, लेकिन होलोसीन युग के बाद इसके प्राप्ति-क्षेत्र सीमित हो गए।
काजीरंगा राष्ट्रीय उद्यान के बारे में
- भौगोलिक अवस्थिति: यह असम राज्य में ब्रह्मपुत्र नदी और कार्बी (मिकिर) पहाड़ियों के बीच ब्रह्मपुत्र के बाढ़कृत मैदानों में स्थित है।
- मान्यता : इसे 1985 में यूनेस्को विश्व विरासत स्थल घोषित किया गया था। यह एक टाइगर रिजर्व भी है।
- जैव विविधता: यह उद्यान विश्व के दो-तिहाई ‘एक सींग वाले गैंडों’ का पर्यावास है। इसके अलावा यहां बाघ, हाथी, एशियाई जल भैंसा और पूर्वी स्वैंप डियर भी पाए जाते हैं।
- संरक्षण:
- 1905 में इसे आरक्षित वन (Reserve Forest) का दर्जा दिया गया।
- इसे अब बर्डलाइफ इंटरनेशनल द्वारा एक 'महत्वपूर्ण पक्षी क्षेत्र' के रूप में मान्यता दी गई है।
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1 sourceअनंतिम अनुमान के अनुसार, कृषि क्षेत्रक के सकल मूल्य वर्धित (GVA) में वित्त वर्ष 2024–25 के दौरान 10.4% की संवृद्धि दर्ज की गई।
- केंद्र सरकार ने कृषि एवं किसान कल्याण विभाग के लिए बजट आवंटन बढ़ाकर ₹1.27 लाख करोड़ (2025–26) कर दिया है।
- पिछले पांच वर्षों में कृषि एवं संबद्ध क्षेत्रक (फसलें, पशुपालन, मत्स्य पालन और बागवानी सहित) की GVA प्रतिशत संवृद्धि दर (चालू कीमतों पर) इस प्रकार रही है:
| 2020-21 | 2021-22 | 2022-23 | 2023-24 | 2024-25 (अनंतिम अनुमान) |
| 10.0 | 10.6 | 8.5 | 9.6 | 10.4 |
GVA (सकल मूल्य वर्धित) क्या है?
- GVA अर्थव्यवस्था में उत्पादित कुल उत्पादन (आउटपुट) के मूल्य में से मध्यवर्ती उपभोग (Intermediate consumption) के मूल्य को घटाकर प्राप्त किया जाता है।
- मध्यवर्ती उपभोग वास्तव में वह उत्पाद है जिसका उपयोग आगे के उत्पादन में किया जाता है, न कि अंतिम उपभोग में
- आधारित कीमतों (Basic prices) पर GVA में निवल उत्पादन कर (Net production taxes) शामिल होते हैं, लेकिन निवल उत्पाद कर (Net Product Taxes) शामिल नहीं होते हैं।
- मध्यवर्ती उपभोग वास्तव में वह उत्पाद है जिसका उपयोग आगे के उत्पादन में किया जाता है, न कि अंतिम उपभोग में