हाल ही में, MPLADS निधि के उपयोग को लेकर एक विवाद उत्पन्न हो गया है।
- आलोचकों के अनुसार, इसकी निधियों का उपयोग अक्षम तरीके से किया जा रहा है। इसकी निधियों को निर्धारित कार्यों की बजाय अन्य कार्यों में व्यय कर दिया जाता है। इसके अतिरिक्त, इसकी निगरानी भी ठीक से नहीं होती, इसलिए इस योजना को बंद कर दिया जाना चाहिए।
संसद सदस्य स्थानीय क्षेत्र विकास योजना (MPLADS) के बारे में
- प्रकार: यह योजना 1993 में शुरू की गई थी। यह एक केंद्रीय क्षेत्रक की योजना (Central Sector Scheme) है।
- मंत्रालय: सांख्यिकी और कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय (MoSPI) इसके कार्यान्वयन संबंधी दिशा-निर्देशों को निर्धारित करने के लिए जिम्मेदार है।
- उद्देश्य: यह योजना संसद सदस्यों को विकासात्मक कार्यों (जैसे- पेयजल, स्वच्छता आदि) की सिफारिश करने तथा उन्हें पूरा करवाने में सक्षम बनाती है। ये कार्य स्थानीय स्तर पर महसूस की गई जरूरत पर आधारित होने चाहिए। साथ ही, इनमें स्थायी परिसंपत्तियों के निर्माण पर भी बल दिया जाना चाहिए।
- कार्यान्वयन एजेंसी: कार्यान्वयन जिला प्राधिकरण (IDA) कार्यों को पूरा करने के लिए सरकारी विभागों, न्यासों और सहकारी समितियों का चयन करता है।
- निधियों का आवंटन: इस योजना के तहत प्रत्येक सांसद को प्रतिवर्ष 5 करोड़ रुपये आवंटित किए जाते हैं।
- लोक सभा सांसद अपने लोक सभा निर्वाचन क्षेत्र में कार्यों की सिफारिश कर सकते हैं।
- राज्य सभा सांसद उस राज्य में कार्यों की सिफारिश कर सकते हैं, जहां से वे निर्वाचित हुए हैं।
- दोनों सदनों के मनोनीत सदस्य देश के किसी भी हिस्से में कार्यों की सिफारिश कर सकते हैं।
- अनुसूचित जाति/ जनजाति (SC/ST) जनसंख्या के लिए विशेष प्रावधान
- संसद सदस्य प्रतिवर्ष MPLADS निधि का कम-से-कम 15 प्रतिशत अनुसूचित जाति की आबादी वाले क्षेत्रों में और कम-से-कम 7.5 प्रतिशत अनुसूचित जनजाति की आबादी वाले क्षेत्रों में खर्च के लिए सिफारिश करेगा।
- अपवाद: यदि किसी लोक सभा क्षेत्र में अनुसूचित जनजातियों (ST) की संख्या कम है, तो उस निधि का उपयोग अनुसूचित जाति (SC) वाले क्षेत्रों में किया जा सकता है।
- इसी प्रकार, यदि किसी क्षेत्र में अनुसूचित जाति (SC) की जनसंख्या बहुत कम है, तो वह निधि अनुसूचित जनजाति (ST) वाले क्षेत्रों के विकास के लिए उपयोग की जा सकती है।
- गैर-व्यपगत निधि: MPLADS के तहत निधियां गैर-व्यपगत (non-lapsable) प्रकृति की होती हैं। इसका तात्पर्य यह है कि बची हुई आवंटित राशि अगले वर्ष भी खर्च की जा सकती है।
- विशेष परिस्थितियां: सांसद अपने क्षेत्र के बाहर प्रति वर्ष 25 लाख रुपये तक के कार्यों की सिफारिश कर सकते हैं। किसी आपदा की स्थिति में, सांसद प्रभावित जिले के लिए 1 करोड़ रुपये तक की सिफारिश कर सकते हैं।