भारत और खाड़ी सहयोग परिषद (GCC) के बीच हस्ताक्षरित ToRs, प्रस्तावित भारत-GCC मुक्त व्यापार समझौते (FTA) के दायरे, संरचना और तौर-तरीकों को परिभाषित करते हैं।
- भारत और GCC के बीच FTA की संभावना तलाशने के लिए आर्थिक सहयोग फ्रेमवर्क समझौते पर 2004 में नई दिल्ली में हस्ताक्षर किए गए थे।
भारत के लिए भारत-GCC मुक्त व्यापार समझौते (FTA) का महत्त्व
- पारस्परिक रूप से लाभकारी आर्थिक संबंधों की पूर्ण क्षमता का दोहन: 2024 तक के आंकड़ों के अनुसार, GCC देश 6.15 करोड़ लोगों का बाजार हैं और मौजूदा कीमतों पर इनकी जीडीपी 2.3 ट्रिलियन अमेरिकी डॉलर है।
- भारत के ऊर्जा स्रोतों का विविधीकरण: खाद्य प्रसंस्करण, अवसंरचना, पेट्रोकेमिकल्स और सूचना एवं संचार प्रौद्योगिकी (ICT) जैसे क्षेत्रकों को इससे बड़े पैमाने पर लाभ होने की उम्मीद है।
- वैश्विक अनिश्चितताओं के बीच संबंधों को मजबूती देना: यह दीर्घकालिक आपूर्ति सुरक्षा और व्यापार विस्तार को मजबूत करने में मदद करेगा।
- व्यापार और निवेश में वृद्धि: वित्त वर्ष 2024-25 में भारत का GCC के साथ 178.56 अरब डॉलर का व्यापार रहा (जो भारत के कुल वैश्विक व्यापार का 15.42% है)।
- यह क्षेत्र प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (FDI) का भी एक महत्वपूर्ण स्रोत है। इसके तहत सितंबर 2025 तक 31.14 अरब डॉलर से अधिक का निवेश हो चुका है।
- लोगों के बीच संबंधों को बढ़ावा: GCC देशों में लगभग एक करोड़ भारतीय निवास करते हैं।

खाड़ी सहयोग परिषद (GCC) के बारे में
- उत्पत्ति: GCC खाड़ी क्षेत्र के 6 देशों का एक राजनीतिक और आर्थिक गठबंधन है। इसे 25 मई 1981 को संपन्न एक समझौते द्वारा स्थापित किया गया था।
- सदस्य (6): इसमें शामिल देश हैं- सऊदी अरब, संयुक्त अरब अमीरात, कतर, कुवैत, ओमान तथा बहरीन।
- मुख्यालय: रियाद (किंगडम ऑफ सऊदी अरब)।
- उद्देश्य: सदस्य देशों के बीच एकता बनाए रखने के लिए उनके बीच समन्वय, एकीकरण और अंतर्संबंध स्थापित करना।
- GCC के अंतर्गत मुख्य संगठन:
- सर्वोच्च परिषद (विवाद निपटान आयोग के साथ);
- मंत्रिस्तरीय परिषद; तथा
- महासचिवालय (Secretariat General)।