यह संशोधन निम्नलिखित उद्देश्यों से किया गया है:
- स्टार्ट-अप्स में अनुसंधान एवं नवाचार तक पहुंच बढ़ाना;
- भारत को एक विनिर्माण-आधारित अर्थव्यवस्था बनाना; और
- भारत को उभरती प्रौद्योगिकियों के केंद्र के रूप में स्थापित करना।
संशोधित फ्रेमवर्क के मुख्य प्रावधान
- टर्नओवर सीमा में वृद्धि: टर्नओवर की सीमा को ₹100 करोड़ से बढ़ाकर ₹200 करोड़ कर दिया गया है।
- समर्पित 'डीप टेक स्टार्ट-अप' श्रेणी की शुरुआत: यह उन स्टार्ट-अप्स के लिए है, जो अत्याधुनिक और क्रांतिकारी प्रौद्योगिकियों पर कार्य कर रहे हैं।
- इस श्रेणी के लिए पात्रता मानदंडों का विस्तार किया गया है।
- समय सीमा को निगमन/पंजीकरण की तिथि से 10 वर्ष से बढ़ाकर 20 वर्ष कर दिया गया है।
- टर्नओवर की सीमा को बढ़ाकर ₹300 करोड़ कर दिया गया है।
- पात्र संस्थाओं के रूप में सहकारी समितियों का समावेश: अब बहु-राज्य सहकारी समितियां (बहु-राज्य सहकारी समिति अधिनियम, 2002 के तहत) तथा सहकारी समितियां (राज्य और संघ राज्यक्षेत्र सहकारी समिति अधिनियमों के तहत) दोनों ही पात्र संस्थाओं के रूप में शामिल हैं।

भारत में मान्यता प्राप्त स्टार्ट-अप्स और स्टार्ट-अप तंत्र
- मान्यता प्राप्त स्टार्ट-अप्स: ऐसे स्टार्ट-अप्स जिन्हें उद्योग संवर्धन और आंतरिक व्यापार विभाग (DPIIT) द्वारा समय-समय पर अधिसूचित पात्रता मानदंडों के आधार पर आधिकारिक मान्यता दी गई है।
- मान्यता प्राप्त स्टार्ट-अप संबंधी लाभ: वित्तीय विवरणों के साथ 'नकद प्रवाह विवरण’ प्रस्तुत करने की आवश्यकता नहीं; आयकर अधिनियम 1961 के तहत तीन वर्षों के लिए मुनाफे पर 100% कर छूट आदि।
- भारत में वर्तमान स्थिति: दिसंबर 2025 तक 2 लाख से अधिक DPIIT-मान्यता प्राप्त स्टार्ट-अप्स हैं। इनमें से लगभग 50% टियर-II और टियर-III शहरों से हैं।
- स्टार्ट-अप सहायता के लिए प्रमुख पहलें: स्टार्ट-अप इंडिया पहल; अटल नवाचार मिशन (AIM); जेनेसिस (GENESIS - नई पीढ़ी के नवाचारों के लिए सहायता); निधि (NIDHI - नवाचारों के विकास और दोहन के लिए राष्ट्रीय पहल), आदि।