अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी (IEA) ने वैश्विक विद्युत प्रणालियों और बाजारों पर अपनी वार्षिक रिपोर्ट “इलेक्ट्रिसिटी 2026” जारी की है।
रिपोर्ट के प्रमुख निष्कर्ष
- तेज़ी से बढ़ती मांग: विश्व में बिजली की मांग के 2030 तक प्रति वर्ष 3.6% की दर से बढ़ने का अनुमान है। यह जीडीपी संवृद्धि दर से अधिक है। इसका प्रमुख कारण इलेक्ट्रिक वाहन, डेटा सेंटर और एयर कंडीशनिंग का बढ़ता उपयोग है।
- स्वच्छ ऊर्जा आपूर्ति का बढ़ाव वर्चस्व: कम कार्बन उत्सर्जन करने वाले स्रोत (नवीकरणीय ऊर्जा और परमाणु ऊर्जा) विद्युत् की अतिरिक्त मांग को पूरा करेंगे। वर्ष 2030 तक वैश्विक विद्युत उत्पादन का लगभग आधा हिस्सा इन्हीं स्रोतों से पूरा किया जाएगा।
- उत्सर्जन में स्थिरता: वैश्विक बिजली क्षेत्रक से होने वाला CO₂ उत्सर्जन स्थिर होने की संभावना है।
दिल्ली उच्च न्यायालय ने कहा है कि सूचना प्रौद्योगिकी (आईटी) अधिनियम, 2000 की धारा 79 के तहत मध्यवर्तियों को उपलब्ध “सेफ हार्बर” संरक्षण उन्हें “सहयोग पोर्टल” से जुड़ने से नहीं बचाता।
- अधिनियम की धारा 79 डिजिटल प्लेटफॉर्मों (मध्यवर्तियों) को किसी तीसरे-पक्ष के कंटेंट की जवाबदेही लेने से सुरक्षा प्रदान करती है। हालांकि, यह सुरक्षा उन्हें केवल तभी मिलती है जब वे तटस्थ होस्ट की भूमिका निभाएं।
सहयोग पोर्टल के बारे में
- उद्देश्य: साइबर अपराध की रोकथाम, पहचान, जांच और अभियोजन के लिए एक प्रभावी ढांचा और व्यवस्था तैयार करना।
- मंत्रालय: केंद्रीय गृह मंत्रालय
- कार्य:
- आईटी अधिनियम, 2000 के तहत समुचित सरकार या उसकी एजेंसी द्वारा मध्यवर्तियों को नोटिस भेजने की प्रक्रिया को स्वचालित करना।
- किसी अवैध कृत्य को अंजाम देने के लिए प्रयुक्त किसी भी सूचना, डेटा या संचार लिंक को हटाने या उस तक पहुँच को निष्क्रिय करने को आसान बनाना।
- सभी अधिकृत एजेंसियों और सभी मध्यवर्तियों को एक ही प्लेटफॉर्म से जोड़ना।
एक नए अध्ययन में प्रयोगशाला में विकसित T-कोशिकाओं को बिना क्षति पहुंचाए पुनः प्राप्त करने की एक अधिक सतर्क विधि प्रदर्शित की गई है।
T-कोशिकाओं के बारे में
- ये श्वेत रक्त कोशिकाएं होती हैं। ये संक्रमण और कैंसर जैसी असामान्य कोशिकाओं की पहचान करती हैं।
- ये या तो रोगग्रस्त कोशिकाओं को सीधे नष्ट करती हैं या इन्हें नष्ट करने के लिए अन्य प्रतिरक्षा कोशिकाओं को सक्रिय करती हैं।
- उनकी सटीक उपचार विधि उन्हें आधुनिक इम्यूनोथेरेपी का केंद्रीय तत्व बनाती है।
CAR T-सेल थेरेपी क्या है?
- डॉक्टर रोगी के रक्त से T-कोशिकाएं प्राप्त करते हैं।
- प्रयोगशाला में इन कोशिकाओं को आनुवंशिक रूप से संशोधित किया जाता है ताकि उनमें काइमेरिक एंटीजन रिसेप्टर्स (CARs) जोड़े जा सकें।
- CARs “लक्ष्य को पहचान करने वाली प्रणाली” की तरह कार्य करते हैं। इससे T-कोशिकाएं कैंसर कोशिकाओं को पहचान पाती हैं।
- संशोधित कोशिकाओं की संख्या को बढ़ाया जाता है और फिर रोगी के शरीर में वापस प्रविष्ट कराया जाता है।
Article Sources
1 sourceएक अध्ययन में वैज्ञानिकों ने पहली बार अति-द्रव (superfluid) से अति-ठोस (supersolid) में प्रतिवर्ती अवस्था परिवर्तन (रिवर्सिबल फेज ट्रांजिशन) का अवलोकन किया है।
- इससे क्वांटम की अवस्था में परिवर्तनों को समझने, पदार्थ की नई अवस्थाओं की खोज करने और क्वांटम पदार्थ विज्ञान में प्रगति में सहायता मिलेगी।
‘पदार्थ की अवस्थाओं’ के बारे में
- पदार्थ की चार प्रमुख अवस्थाएं हैं: ठोस, द्रव, गैस और प्लाज्मा।
- इसके अतिरिक्त कुछ अन्य अवस्थाएं भी संभव हैं, जैसे—
- अति-द्रव (superfluid): यह पदार्थ की एक दुर्लभ क्वांटम अवस्था है जिसमें द्रव बिना किसी घर्षण या श्यानता के प्रवाहित होता है।
- अति-ठोस (supersolid): यह पदार्थ की एक दुर्लभ और विलक्षण क्वांटम अवस्था है, जो एक साथ ठोस और अति-द्रव, दोनों के गुण प्रदर्शित करती है।
तमिलनाडु सरकार ने अल्मंड किट (Almond Kit) सिरप के एक बैच के खिलाफ नोटिस जारी किया है। इसमें एथिलीन ग्लाइकॉल की मिलावट पाई गई है।
एथिलीन ग्लाइकोल (EG) के बारे में
- यह रंगहीन, गंधहीन, मीठा स्वाद वाला और जल में घुलनशील कार्बनिक यौगिक है।
- उपयोग:
- ऑटोमोबाइल और औद्योगिक क्षेत्रकों में एंटीफ्रीज और कूलेंट के रूप में।
- हाइड्रोलिक द्रवों, प्रिंटिंग स्याही और पेंट विलायक के घटक के रूप में।
- पॉलिएस्टर, विस्फोटक और कृत्रिम मोम (सिंथेटिक वैक्स) बनाने में अभिकर्मक के रूप में।
- यह अत्यधिक विषाक्त होता है और पशुओं या मनुष्यों के लिए प्राणघातक हो सकता है।
- 95% एथिलीन ग्लाइकोल युक्त ऑटोमोबाइल एंटीफ्रीज, एथिलीन ग्लाइकोल विषाक्तता का सबसे सामान्य स्रोत है।
भारतीय एयरोस्पेस कंपनी अज़िस्टा स्पेस ने अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन (ISS) की तस्वीरें प्राप्त करके सफलतापूर्वक “इन-ऑर्बिट स्नूपिंग” (या “स्पेस वॉच”) का प्रदर्शन किया है।
- इससे भारत की अंतरिक्ष स्थितिजन्य जागरूकता (Space Situational Awareness) क्षमताएं और अधिक मजबूत हुई हैं।
अंतरिक्ष स्थितिजन्य जागरूकता (SSA) के बारे में
- यह पृथ्वी की कक्षा में स्थित मानव द्वारा प्रक्षेपित उपग्रहों, अंतरिक्ष मलबे और प्राकृतिक पिंडों (जैसे क्षुद्रग्रह) की व्यापक निगरानी और नजर रखने तथा पूर्वानुमान करने की प्रक्रिया है।
- महत्त्व: उपग्रहों, मलबे या पिंडों के टक्करों का विश्लेषण किया जाता है। फिर इसे टालने या इनसे बचाव हेतु आवश्यक कक्षीय परिवर्तन करके अंतरिक्ष में उपग्रहों के संचालन की सुरक्षा और स्थिरता सुनिश्चित की जाती है।
- इसरो की पहलें:
- नेत्र/NETRA: ‘नेटवर्क फॉर स्पेस ऑब्जेक्ट्स ट्रैकिंग एंड एनालिसिस’ परियोजना।
- IS4OM: अंतरिक्ष स्थितिजन्य जागरूकता नियंत्रण केंद्र, बेंगलुरु।