इस आधिकारिक यात्रा के दौरान एक संयुक्त वक्तव्य जारी किया गया। इसमें क्षेत्रीय स्थिरता, आर्थिक एकीकरण और प्रौद्योगिकी में सहयोग के प्रति साझा प्रतिबद्धता पर बल दिया गया।
- अगस्त 2024 में भारत-मलेशिया राजनयिक संबंधों को व्यापक रणनीतिक साझेदारी (CSP) के स्तर तक बढ़ा दिया गया था।
संयुक्त वक्तव्य में की गई मुख्य घोषणाओं पर एक नजर

- रणनीतिक और रक्षा सहयोग:
- रणनीतिक मामलों पर कार्य समूह (SAWG) और Su-30 फोरम का गठन किया जाएगा।Su-30 फोरम दोनों देशों की वायु सेनाओं के बीच रखरखाव एवं तकनीकी विशेषज्ञता पर सहयोग को सक्षम बनाएगा। इससे आपूर्ति-श्रृंखला के समक्ष बाधाओं को कम किया जा सकेगा।
- संयुक्त सैन्य अभ्यास 'हरिमऊ शक्ति' (5वां संस्करण) का आयोजन किया गया था।
- आतंकवाद के प्रति 'शून्य सहिष्णुता’ का आह्वान किया गया और आतंकवाद से निपटने के लिए ठोस अंतर्राष्ट्रीय प्रयासों पर बल दिया गया।
- ऊर्जा और जलवायु सहयोग:
- मलेशियाई कंपनियां भारत के सौर ऊर्जा और ग्रीन हाइड्रोजन क्षेत्रकों में निवेश का विस्तार कर रही हैं।
- नेट-जीरो (शुद्ध-शून्य) उत्सर्जन के प्रति साझा प्रतिबद्धता व्यक्त की गई है।
- सेमीकंडक्टर सहयोग: कार्यबल विकास, आपूर्ति श्रृंखला लचीलापन और संस्थागत जुड़ाव पर ध्यान केंद्रित किया जाएगा।
- व्यापार और निवेश:
- संतुलित और विविधतापूर्ण व्यापार पर ध्यान केंद्रित किया जा रहा है। सेमीकंडक्टर, डिजिटल अर्थव्यवस्था आदि को प्राथमिकता दी जा रही है।
- भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) और बैंक नेगारा मलेशिया के सहयोग से स्थानीय मुद्राओं में व्यापार के निपटान (INR–MYR) को प्रोत्साहन दिया जा रहा है।
- व्यापार, लचीली आपूर्ति श्रृंखला, निवेश और उन्नत विनिर्माण में सहयोग किया जा रहा है।
- खाद्य सुरक्षा और कृषि
- मलेशिया ने एक विश्वसनीय ऑयल पाम आपूर्तिकर्ता के रूप में अपनी प्रतिबद्धता दोहराई।
- ऑयल पाम मूल्य श्रृंखला और डाउनस्ट्रीम व मूल्य वर्धित उत्पादों में सहयोग किया जा रहा है।
- आपदा-रोधी अवसंरचना के लिए गठबंधन (CDRI) को समर्थन दिया जा रहा है।
- क्षेत्रीय और बहुपक्षीय सहयोग
- संयुक्त राष्ट्र सुधारों और पुनर्गठित संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) में भारत की स्थायी सदस्यता के लिए समर्थन दोहराया गया।
- आसियान सेंट्रलिटी (ASEAN Centrality) और शांति के लिए आसियान आउटलुक ऑन द इंडो-पैसिफिक (AOIP) के कार्यान्वयन का समर्थन किया गया।
- इसमें AOIP और भारत की 'इंडो-पैसिफिक ओशन्स इनिशिएटिव' (IPOI) के बीच सहयोग को बढ़ावा देना शामिल है।
- दोनों देशों ने अंतर्राष्ट्रीय कानून के सिद्धांतों के आधार पर नौवहन की स्वतंत्रता आदि के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दोहराई, जैसा कि विशेष रूप से संयुक्त राष्ट्र समुद्री विधि अभिसमय (UNCLOS) 1982 में परिलक्षित होता है।
भारत-मलेशिया संबंध: एक नज़र में
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