उच्चतम न्यायालय ने आगामी SWM नियम 2026 को लागू करने के लिए व्यापक निर्देश जारी किए हैं। नए नियम 1 अप्रैल, 2026 से प्रभावी होंगे।
- न्यायालय ने दोहराया कि स्वच्छ और स्वस्थ वातावरण का अधिकार संविधान के अनुच्छेद 21 का एक अभिन्न अंग है।
- न्यायालय ने टिप्पणी की कि 2000 वर्ष पुराने विरासत स्थल होने के बावजूद, खराब अपशिष्ट प्रबंधन और नागरिक स्वच्छता की कमी भारत में पर्यटन को गंभीर रूप से हतोत्साहित करती है।
मुख्य निर्देश
- चार-स्तरीय पृथक्करण: प्रदूषण नियंत्रण बोर्डों को अपशिष्ट के चार श्रेणियों में पृथक्करण के लिए अवसंरचना में तेजी लाने का निर्देश दिया गया है:
- गीला अपशिष्ट: रसोई का कचरा आदि।
- सूखा अपशिष्ट: प्लास्टिक, कागज आदि।
- सेनेटरी अपशिष्ट: इस्तेमाल किए गए डायपर आदि।
- विशेष सावधानी वाले अपशिष्ट (Special Care Waste): पेंट के डिब्बे आदि।
- साथ ही, इन नियमों की तत्काल सूचना 'बल्क वेस्ट जनरेटर' (BWGs) को देने का आदेश दिया गया है।
- निर्वाचित प्रतिनिधियों की भूमिका: पार्षद, मेयर, कॉर्पोरेटर या वार्ड सदस्यों को स्रोत पर अपशिष्ट पृथक्करण शिक्षा के लिए मुख्य सूत्रधार के रूप में नामित किया जाएगा। यह उनका वैधानिक कर्तव्य होगा कि वे SWM नियम, 2026 के कार्यान्वयन में प्रत्येक नागरिक को शामिल करें।
- सख्त प्रवर्तन और दंड: नियमों का पालन न करने को अब केवल प्रशासनिक चूक नहीं माना जाएगा। न्यायालय ने प्रवर्तन के तीन स्तर निर्धारित किए हैं:
- स्तर 1: अपशिष्ट उत्पन्न करने वालों या स्थानीय प्राधिकरणों द्वारा प्रारंभिक उल्लंघन पर तत्काल जुर्माना।
- स्तर 2: निरंतर अवहेलना करने पर पर्यावरण कानूनों के तहत आपराधिक मुकदमा चलाया जाएगा।
- स्तर 3: अभियोजन सभी जिम्मेदार व्यक्तियों तक विस्तारित होगा। इनमें वे अधिकारी भी शामिल हैं, जो अपने निरीक्षण कर्तव्यों में लापरवाही बरतते हैं।
- विरासत अपशिष्ट (Legacy Waste): पुराने अपशिष्ट डंपसाइट्स के समाधान और उपचार के लिए एक अलग व समयबद्ध कार्य योजना सक्रिय की जानी चाहिए।
- पर्यावरण संरक्षण अधिनियम (1986) के तहत पर्यावरण मंत्रालय (MoEFCC) द्वारा निम्नलिखित निर्देश जारी किए जाएंगे:
- जिला कलेक्टरों के माध्यम से ठोस अपशिष्ट प्रबंधन का अवसंरचना लेखा परीक्षण आयोजित कराया जाएगा।
- प्रत्येक स्थानीय निकाय को 100% अनुपालन के लिए एक अंतिम समय सीमा घोषित करनी होगी।