भारत वन स्थिति रिपोर्ट, 2023 के अनुसार 2021-22 की तुलना में 2023-24 में वनाग्नि के हॉटस्पॉट्स कम हुए हैं | Current Affairs | Vision IAS
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  • वनाग्नि की घटना का पता लगाने के लिए MODIS और SNPP-VIIRS सेंसर्स का उपयोग किया गया है। 
    • MODIS: मॉडरेट रेजोल्यूशन इमेजिंग स्पेक्ट्रो-रेडियोमीटर। 
    • SNPP-VIIRS: सुओमी-नेशनल पोलर-ऑर्बिटिंग पार्टनरशिप- विजिबल इन्फ्रारेड इमेजिंग रेडियोमीटर सूट। 

रिपोर्ट के मुख्य बिंदुओं पर एक नजर 

  • MODIS सेंसर्स ने 2023-24 में वनाग्नि के 26,390 हॉटस्पॉट्स का पता लगाया था, जबकि SNPP-VIIRS सेंसर्स ने 2,03,544 हॉटस्पॉट्स का पता लगाया था।
    • 2021-22 में MODIS सेंसर्स ने 29,675 और SNPP-VIIRS सेंसर्स ने 2,23,333 वनाग्नि हॉटस्पॉट्स का पता लगाया था।
  • 2023-24 में वनाग्नि की सबसे अधिक घटनाएं उत्तराखंड, ओडिशा और छत्तीसगढ़ में दर्ज की गई थीं। 
  • हिमाचल प्रदेश और जम्मू-कश्मीर में 2022-23 की तुलना में 2023-24 में वनाग्नि की घटनाओं में काफी वृद्धि हुई है।
  • गोवा और कर्नाटक में वनाग्नि की घटनाओं में काफी गिरावट हुई है।

वनाग्नि के प्रभाव

  • पर्यावरण पर प्रभाव:
    • इससे होने वाला ग्रीनहाउस गैसों और संग्रहित कार्बन का उत्सर्जन ग्लोबल वार्मिंग को बढ़ाता है। वनाग्नि के कारण प्रतिवर्ष 2.5 बिलियन से 4.0 बिलियन टन तक COका उत्सर्जन होता है। 
    • इससे जैव विविधता को हानि पहुंचती है और वन पारिस्थितिकी-तंत्र को नुकसान होता है।
  • मानव एवं वन्यजीव के स्वास्थ्य पर प्रभाव:
    • वनाग्नि के कारण निकलने वाले धुएं से मानव और वन्यजीवों की असामयिक मृत्यु हो सकती है।
    • इसका ग्रामीण लोगों की आजीविका और राष्ट्रीय अर्थव्यवस्था पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है।

उठाए गए कदम

  • भारतीय वन सर्वेक्षण का वन अग्नि जियो-पोर्टल वनाग्नि के बारे में जानकारी प्रदान करता है।
  • किसी भी व्यक्ति द्वारा अभयारण्य में आग लगाना या आग जलाना या जलती हुई आग को छोड़ना वन्यजीव (संरक्षण) अधिनियम, 1972 के तहत प्रतिबंधित है।
  • वनाग्नि प्रबंधन एवं नियंत्रण में संयुक्त वन प्रबंधन समितियों (JFMCs) और पारिस्थितिकी विकास समितियों (EDCs) के माध्यम से सामुदायिक भागीदारी को बढ़ावा दिया जाता है।
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