निर्यात संवर्धन मिशन (EPM) एक प्रमुख पहल है। इसका उद्देश्य सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों (MSMEs) को वैश्विक बाजारों में निर्यात के लिए सशक्त बनाना है।
- यह दो एकीकृत उप-योजनाओं - निर्यात प्रोत्साहन और निर्यात दिशा के माध्यम से संचालित होता है।
नए उपाय
- निर्यात प्रोत्साहन के तहत:
- निर्यात फैक्टरिंग (व्यापार साधनों) के लिए सहायता: यह MSMEs के लिए कार्यशील पूंजी समाधान के रूप में निर्यात फैक्टरिंग और पारदर्शिता के लिए डिजिटल दावा तंत्र को बढ़ावा देता है।
- ई-कॉमर्स निर्यातकों के लिए ऋण सहायता: प्रत्यक्ष ई-कॉमर्स क्रेडिट सुविधा: 90% गारंटी कवरेज के साथ ₹50 लाख तक की सहायता प्रदान की जाएगी।
- विदेशी माल सूची (इन्वेंट्री) क्रेडिट सुविधा: 75% गारंटी कवरेज के साथ ₹5 करोड़ तक की सहायता प्रदान की जाएगी।
- उभरते निर्यात अवसरों के लिए सहायता: नए या उच्च जोखिम वाले बाजारों तक पहुंच बनाने के लिए दी जाएगी।
- निर्यात दिशा के तहत:
- व्यापार विनियम, प्रत्यायन और अनुपालन सक्षमता (TRACE): यह परीक्षण, निरीक्षण एवं प्रमाणन (TIC) आवश्यकताओं में सहायता करेगा।
- लॉजिस्टिक्स, विदेशी भंडारण और पूर्ति की सुविधा (FLOW): यह विदेशी भंडारण एवं ई-कॉमर्स निर्यात केंद्रों का समर्थन करेगी।
- माल ढुलाई और परिवहन के लिए लॉजिस्टिक्स हस्तक्षेप (LIFT): यह कम निर्यात तीव्रता वाले जिलों में निर्यातकों द्वारा सामना किए जाने वाले भौगोलिक नुकसान को कम करेगा।
- व्यापार आसूचना और सुविधा के लिए एकीकृत सहायता (INSIGHT): यह 'निर्यात हब के रूप में जिले' पहल के तहत निर्यातक क्षमता निर्माण, जिला और क्लस्टर स्तर की सुविधा तथा व्यापार खुफिया सूचना प्रणालियों के विकास को मजबूत करेगी।
निर्यात संवर्धन मिशन (EPM) के बारे में
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