यह रिपोर्ट प्रशिक्षुता तंत्र को भारत की कौशल विकास और रोजगार रणनीति के आधार स्तंभ के रूप में मजबूत करने के लिए महत्वपूर्ण अंतर्दृष्टि एवं व्यावहारिक सिफारिशें प्रदान करती है।
- प्रशिक्षुता एक औपचारिक व्यावसायिक शिक्षा और प्रशिक्षण योजना है। यह शिक्षण या प्रशिक्षण संस्थाओं में सीखने के साथ-साथ कंपनियों में कार्य-आधारित व्यावहारिक प्रशिक्षण को भी जोड़ती है।
रिपोर्ट के मुख्य बिंदुओं पर एक नजर
- वर्तमान स्थिति: वित्त वर्ष 2024-25 के तहत राष्ट्रीय प्रशिक्षुता संवर्धन योजना (NAPS) के अंतर्गत 51,133 सक्रिय संस्थान हैं। NAPS के तहत सक्रिय सहभागिता 2018-19 की तुलना में 27 गुना बढ़कर वित्त वर्ष 2024-25 में 9.85 लाख हो गई है।
- पाठ्यक्रम पूरा करने की दर घटकर 25.47% रह गई है, जबकि ड्रॉपआउट (बीच में छोड़ने की) दर 35.46% के उच्च स्तर पर है।
- मुख्य चुनौतियां
- नीतिगत और संरचनात्मक कमियां: योजनाओं की बहुलता, कम वृत्तिका (Stipend) स्तर और मानकीकृत प्रमाणन की कमी प्रभावशीलता को कम करती है।
- क्षेत्रीय और उद्योग संबंधी असमानताएं: 'बीमारू' (BIMARU) और पूर्वोत्तर राज्यों में कम उपयोग; अनुपालन एवं निवेश पर प्रतिफल (ROI) संबंधी चिंताओं के कारण MSME की कम भागीदारी आदि।
- आकांक्षी स्तर की बाधाएं: महिलाओं की कम भागीदारी (लगभग 20%), कमजोर करियर काउंसलिंग (परामर्श व मार्गदर्शन) और शैक्षणिक पाठ्यक्रमों के प्रति सामाजिक झुकाव।
- प्रमुख सिफारिशें
- नीतिगत और प्रणालीगत सुधार: 'राष्ट्रीय प्रशिक्षुता मिशन' की शुरुआत, प्रशिक्षुता पोर्टल्स का एकीकरण तथा शिक्षा एवं कौशल मार्गों के बीच निर्बाध गतिशीलता सुनिश्चित करनी चाहिए।
- संरचना और शासन: प्रदर्शन को मापने के लिए 'प्रशिक्षुता सहभागिता सूचकांक' की शुरुआत करनी चाहिए और उद्योग 4.0 के अनुरूप ITIs के उन्नयन में तेजी लानी चाहिए।
- उद्योग-केंद्रित सुधार: क्लस्टर-आधारित संघों के माध्यम से MSMEs की भागीदारी बढ़ानी चाहिए। साथ ही, 'स्टार्ट-अप प्रशिक्षुता कार्यक्रम' (SAP) को बढ़ावा देना चाहिए।
- प्रशिक्षु स्तर पर सहायता: वृत्तिका की पर्याप्तता में सुधार, बीमा और सामाजिक सुरक्षा कवरेज का विस्तार, तथा अंतर्राष्ट्रीय गतिशीलता को सक्षम बनाना चाहिए।
नीतिगत ढांचा
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