नीति आयोग ने 'प्रशिक्षुता तंत्र का पुनरुद्धार' (Revitalising Apprenticeship Ecosystem) पर एक नीतिगत रिपोर्ट जारी की | Current Affairs | Vision IAS

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In Summary

  • वित्त वर्ष 2025 में शिक्षुता कार्यक्रमों में शामिल होने वालों की संख्या बढ़कर 9.85 लाख हो गई, लेकिन कार्यक्रम पूरा करने की दर घटकर 25.47% रह गई और बीच में ही कार्यक्रम छोड़ने वालों की दर 35.46% रही।
  • प्रमुख चुनौतियों में नीतिगत कमियां, क्षेत्रीय असमानताएं, लघु एवं मध्यम उद्यम (एमएसएमई) की कम भागीदारी और महिलाओं की कम भागीदारी (~20%) शामिल हैं।
  • सिफारिशों में प्रणालीगत सुधारों, एसएपी जैसी उद्योग-उन्मुख पहलों और वजीफा और सामाजिक सुरक्षा सहित प्रशिक्षुओं के लिए बेहतर समर्थन पर ध्यान केंद्रित किया गया है।

In Summary

यह रिपोर्ट प्रशिक्षुता तंत्र को भारत की कौशल विकास और रोजगार रणनीति के आधार स्तंभ के रूप में मजबूत करने के लिए महत्वपूर्ण अंतर्दृष्टि एवं व्यावहारिक सिफारिशें प्रदान करती है।

  • प्रशिक्षुता एक औपचारिक व्यावसायिक शिक्षा और प्रशिक्षण योजना है। यह शिक्षण या प्रशिक्षण संस्थाओं में सीखने के साथ-साथ कंपनियों में कार्य-आधारित व्यावहारिक प्रशिक्षण को भी जोड़ती है।

रिपोर्ट के मुख्य बिंदुओं पर एक नजर

  • वर्तमान स्थिति: वित्त वर्ष 2024-25 के तहत राष्ट्रीय प्रशिक्षुता संवर्धन योजना (NAPS) के अंतर्गत 51,133 सक्रिय संस्थान हैं। NAPS के तहत सक्रिय सहभागिता 2018-19 की तुलना में 27 गुना बढ़कर वित्त वर्ष 2024-25 में 9.85 लाख हो गई है।
    • पाठ्यक्रम पूरा करने की दर घटकर 25.47% रह गई है, जबकि ड्रॉपआउट (बीच में छोड़ने की) दर 35.46% के उच्च स्तर पर है।
  • मुख्य चुनौतियां
    • नीतिगत और संरचनात्मक कमियां: योजनाओं की बहुलता, कम वृत्तिका (Stipend) स्तर और मानकीकृत प्रमाणन की कमी प्रभावशीलता को कम करती है।
    • क्षेत्रीय और उद्योग संबंधी असमानताएं: 'बीमारू' (BIMARU) और पूर्वोत्तर राज्यों में कम उपयोग; अनुपालन एवं निवेश पर प्रतिफल (ROI) संबंधी चिंताओं के कारण MSME की कम भागीदारी आदि।
    • आकांक्षी स्तर की बाधाएं: महिलाओं की कम भागीदारी (लगभग 20%), कमजोर करियर काउंसलिंग (परामर्श व मार्गदर्शन) और शैक्षणिक पाठ्यक्रमों के प्रति सामाजिक झुकाव।
  • प्रमुख सिफारिशें
    • नीतिगत और प्रणालीगत सुधार: 'राष्ट्रीय प्रशिक्षुता मिशन' की शुरुआत, प्रशिक्षुता पोर्टल्स का एकीकरण तथा शिक्षा एवं कौशल मार्गों के बीच निर्बाध गतिशीलता सुनिश्चित करनी चाहिए। 
    • संरचना और शासन: प्रदर्शन को मापने के लिए 'प्रशिक्षुता सहभागिता सूचकांक' की शुरुआत करनी चाहिए और उद्योग 4.0 के अनुरूप ITIs के उन्नयन में तेजी लानी चाहिए। 
    • उद्योग-केंद्रित सुधार: क्लस्टर-आधारित संघों के माध्यम से MSMEs की भागीदारी बढ़ानी चाहिए। साथ ही, 'स्टार्ट-अप प्रशिक्षुता कार्यक्रम' (SAP) को बढ़ावा देना चाहिए।
    • प्रशिक्षु स्तर पर सहायता: वृत्तिका की पर्याप्तता में सुधार, बीमा और सामाजिक सुरक्षा कवरेज का विस्तार, तथा अंतर्राष्ट्रीय गतिशीलता को सक्षम बनाना चाहिए।

नीतिगत ढांचा

  • शिक्षु अधिनियम, 1961: यह प्रशिक्षुता प्रशिक्षण को वैधानिक समर्थन प्रदान करता है और नियोक्ताओं के दायित्वों को परिभाषित करता है। 
  • राष्ट्रीय प्रशिक्षुता संवर्धन योजना (NAPS) और राष्ट्रीय प्रशिक्षुता प्रशिक्षण योजना (NATS): ये योजनाएं नियोक्ताओं को प्रशिक्षुओं को नियुक्त करने के लिए प्रोत्साहित करती हैं तथा उद्योग-अकादमिक सहयोग को बढ़ाती हैं। 
  • राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) 2020: व्यावसायिक-शैक्षणिक अभिसरण और "सीखने के साथ आय" के सिद्धांत को बढ़ावा देती है।
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राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) 2020

भारत सरकार द्वारा 2020 में जारी एक नीतिगत ढांचा जिसका उद्देश्य भारत की शिक्षा प्रणाली में व्यापक सुधार लाना है, जिसमें उच्च शिक्षा को अधिक समग्र, सुलभ और उच्च गुणवत्ता वाला बनाना शामिल है।

राष्ट्रीय प्रशिक्षुता प्रशिक्षण योजना (NATS)

यह योजना प्रशिक्षुओं के प्रशिक्षण के लिए संस्थानों को सहायता प्रदान करती है और राष्ट्रीय प्रशिक्षुता संवर्धन योजना (NAPS) के साथ मिलकर काम करती है।

शिक्षु अधिनियम, 1961 (Apprentices Act, 1961)

यह एक महत्वपूर्ण कानूनी ढाँचा है जो भारत में प्रशिक्षुता प्रशिक्षण को वैधानिक आधार प्रदान करता है और प्रशिक्षुओं के प्रशिक्षण के लिए नियोक्ताओं के दायित्वों को परिभाषित करता है।

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