श्री महालक्ष्मी मंदिर में एक पत्थर की पटिया (slab) पर उत्कीर्ण एक अभिलेख 12वीं शताब्दी के बारे में नई अंतर्दृष्टि प्रदान करता है, जो उस समय के घनिष्ठ संबंधों को उजागर करता है।
होयसल राजवंश के बारे में (10वीं से 14वीं शताब्दी)
- शासन-क्षेत्र: दक्षिणी दक्कन के हिस्से और कावेरी नदी घाटी।
- राजधानी: शुरुआती राजधानी बेलूर थी, जिसे बाद में हलेबिडु में स्थानांतरित कर दिया गया था।
- हलेबिडु को द्वारसमुद्र के नाम से भी जाना जाता है।
- संस्थापक: नृप काम द्वितीय। यह पश्चिमी गंग वंश का सामंत था।
- प्रशासन: साम्राज्य को नाडु, कम्पण, विषय और देश (घटते क्रम में) में विभाजित किया गया था।
- कर्नाटक में होयसलों का पवित्र स्मारक समूह
- इसे भारत के 42वें यूनेस्को विश्व धरोहर स्थल (WHS) के रूप में घोषित किया गया था।
- इसमें अग्रलिखित मंदिर शामिल हैं: चेन्नाकेशव मंदिर (बेलूर); होयसलेश्वर मंदिर (हलेबिडु) तथा केशव मंदिर (सोमनाथपुर)।
- इसे भारत के 42वें यूनेस्को विश्व धरोहर स्थल (WHS) के रूप में घोषित किया गया था।

होयसल स्थापत्यकला शैली
- शैली: इन्होंने हाइब्रिड या वेसर मंदिर शैली को अपनाया। यह द्रविड़ और नागर शैलियों का मूल मिश्रण है।
- प्रभाव: इन पर 'भूमिजा शैली' का गहरा प्रभाव दिखाई देता है। यह शैली उत्तर भारतीय शिखर का एक प्रकार है।
- योजना: यह मंदिर तारकीय योजना यानी तारे के आकार के आधार पर बने हैं, जो एक ऊंचे चबूतरे (अधिष्ठान) पर स्थित होते हैं।
- प्रयुक्त सामग्री: सेलखड़ी (Soapstone), जो नरम होता है और नक्काशी के लिए बहुत अनुकूल होता है।
- गर्भगृह के प्रकार: एककूट (एकल गर्भगृह); द्विकूट (दोहरा गर्भगृह) त्रिकूट (तिहरा गर्भगृह); दुर्लभ पंचकूट (पांच गर्भगृह)।