अमेरिकी ऊर्जा विभाग (DOE) ने वैश्विक विकिरण सुरक्षा के लिए अपने निर्देशों और विनियमों से "एज़ लॉ एज़ रीज़नेबली अचीवेब्ल" (ALARA) यानी "जितना संभव हो उतना कम" सिद्धांत को हटाने की घोषणा की।
- यह जोखिम-आधारित दृष्टिकोण की ओर एक बदलाव है, जिसमें परिचालन दक्षता और लागत-प्रभावशीलता को प्राथमिकता दी गई है।
- वैधानिक सीमाओं से नीचे विकिरण की मात्रा को कम करने की अनिवार्यता को हटाकर, यह श्रमिकों के विकिरण जोखिम को बढ़ाने का खतरा उत्पन्न करता है।
विकिरण सुरक्षा के आधार
विकिरण सुरक्षा का वैश्विक फ्रेमवर्क ऐतिहासिक रूप से निम्नलिखित दो मुख्य स्तंभों पर आधारित है:
- ALARA: यह एक मुख्य सुरक्षा सिद्धांत है, जो यह निर्देश देता है कि सामाजिक और आर्थिक कारकों को संतुलित करते हुए, विकिरण जोखिम को जितना संभव हो उतना कम रखा जाना चाहिए।
- LNT (लीनियर नो-थ्रेसहोल्ड): यह ALARA के पीछे का वैज्ञानिक मॉडल है, जो यह मानता है कि विकिरण की कोई भी मात्रा, चाहे वह कितनी भी कम क्यों न हो, कैंसर का कुछ जोखिम उत्पन्न करती है।
वैश्विक विकिरण सुरक्षा नियम
- ICRP: IAEA और अंतर्राष्ट्रीय रेडियोलॉजिकल सुरक्षा आयोग (ICRP) जैसे अंतर्राष्ट्रीय निकाय वैश्विक सुरक्षा फ्रेमवर्क के हिस्से के रूप में ALARA के समान अनुकूलन सिद्धांतों की सिफारिश करते हैं।
- IAEA अपडेट: अंतर्राष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी (IAEA) विकिरण सुरक्षा प्रथाओं की सार्वभौमिक स्वीकृति सुनिश्चित करने के लिए अपने 2014 के बुनियादी सुरक्षा मानकों को अपडेट करने की योजना बना रही है। इन्हें नए ICRP इनपुट के आधार पर अपडेट किया जाएगा।
- अधिकांश देश श्रमिकों एवं जनता की सुरक्षा के लिए विकिरण की मात्रा की सीमा और अनुकूलन दोनों का उपयोग करते हैं।
भारतीय विकिरण सुरक्षा नियम
- परमाणु ऊर्जा विनियामक बोर्ड (AERB) सभी परमाणु केंद्रों में ALARA सिद्धांत को सख्ती से लागू करता है, जो पूरी तरह से ICRP की सिफारिशों के अनुरूप है।
- भारतीय विनियम विकिरण की मात्रा की सीमा (जैसे श्रमिकों के लिए 20 mSv/वर्ष) निर्धारित करते हैं, लेकिन वास्तविक सीमा को इससे बहुत कम रखने के लिए ALARA को अनिवार्य बनाते हैं।