मुक्त व्यापार समझौते (FTAs) भारत को वैश्विक व्यापार में अधिमान्य पहुंच प्रदान करेंगे | Current Affairs | Vision IAS

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  • भारत के 14 देशों और क्षेत्रीय समूहों के साथ सक्रिय मुक्त व्यापार समझौते (एफटीए) हैं, जो वैश्विक व्यापार के दो-तिहाई हिस्से तक तरजीही व्यापार पहुंच प्रदान करते हैं।
  • मुक्त व्यापार समझौतों का उद्देश्य व्यापार बाधाओं को कम करना, व्यापार को सुगम बनाना, बौद्धिक संपदा की रक्षा करना और निवेश को बढ़ावा देना है।
  • इसके महत्व में व्यापार विविधीकरण, वैश्विक आपूर्ति श्रृंखलाओं में बेहतर एकीकरण, भू-राजनीतिक रणनीति और संसाधनों का इष्टतम उपयोग शामिल है।

In Summary

2025 तक, भारत ने सक्रिय विभिन्न मुक्त व्यापार समझौते (FTAs) संपन्न किए हैं, जो भारत को वैश्विक व्यापार के लगभग दो-तिहाई हिस्से तक अधिमान्य (Preferential) पहुंच प्रदान करते हैं।

मुक्त व्यापार समझौतों (FTAs) के बारे में

  • परिभाषा: FTAs दो या दो से अधिक देशों के बीच कानूनी रूप से बाध्यकारी संधियां हैं। इनका उद्देश्य व्यापार बाधाओं जैसे कि प्रशुल्क (टैरिफ), कोटा और आयात-निर्यात पर प्रतिबंधों को कम करना या समाप्त करना है।
    • दायरा: इन समझौतों में अक्सर व्यापार सुविधा, बौद्धिक संपदा अधिकार और निवेश संरक्षण के प्रावधान शामिल होते हैं।
  • भारत के FTA साझेदार: संयुक्त राज्य अमेरिका (USA), यूनाइटेड किंगडम (UK), ऑस्ट्रेलिया, संयुक्त अरब अमीरात (UAE), ओमान, न्यूजीलैंड, जापान, सिंगापुर, दक्षिण कोरिया, श्रीलंका, नेपाल, भूटान, थाईलैंड और मलेशिया।
    • क्षेत्रीय समूह: यूरोपीय संघ (EU), यूरोपीय मुक्त व्यापार संघ (EFTA), आसियान (ASEAN) और सार्क (SAARC)।
  • चल रही वार्ताएं: खाड़ी सहयोग परिषद (GCC), इजरायल, चिली, कनाडा, पेरू, बांग्लादेश, मालदीव, कतर, यूरेशियाई आर्थिक संघ (EAEU) और बहरीन के साथ।

FTAs का महत्त्व

  • व्यापार विविधीकरण: FTAs भारत को अपने निर्यात और आयात बाजारों का भौगोलिक रूप से विविधीकरण करने; निर्यात के मूल्य को बढ़ाने और आयात बाधाओं को कम करने में सक्षम बनाएंगे।
  • भारतीय उद्योग का एकीकरण: ये भारत को वैश्विक आपूर्ति श्रृंखलाओं के साथ बेहतर ढंग से जोड़ने; विकसित बाजारों में भारतीय व्यवसायों की प्रतिस्पर्धात्मकता बढ़ाने और रोजगार उत्पन्न करने में मदद करते हैं।
  • भू-राजनीतिक रणनीति: ये साझेदारों के साथ व्यापक विश्वास सृजित करने में मदद करते हैं और बहु-संरेखित विदेश नीति में योगदान देते हैं।
  • संसाधनों का इष्टतम उपयोग: FTAs के तहत, प्रत्येक देश उन वस्तुओं का उत्पादन करता है, जिनमें उसके पास सबसे अच्छा लाभ या विशेषज्ञता होती है।
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यूरेशियाई आर्थिक संघ (EAEU)

यूरेशियाई आर्थिक संघ (EAEU) एक आर्थिक संघ है जिसमें आर्मेनिया, बेलारूस, कजाकिस्तान, किर्गिस्तान और रूस शामिल हैं। इसका उद्देश्य वस्तुओं, सेवाओं, पूंजी और श्रमिकों की मुक्त आवाजाही को सुनिश्चित करना है।

खाड़ी सहयोग परिषद (GCC)

एक क्षेत्रीय, अंतर-सरकारी राजनीतिक और आर्थिक संघ है जिसमें अरब प्रायद्वीप के छह सदस्य देश शामिल हैं: बहरीन, कुवैत, ओमान, कतर, सऊदी अरब और संयुक्त अरब अमीरात। इसका उद्देश्य सदस्य देशों के बीच संबंधों को मजबूत करना है।

यूरोपीय मुक्त व्यापार संघ (EFTA)

यूरोपीय मुक्त व्यापार संघ (EFTA) चार यूरोपीय देशों (आइसलैंड, लिकटेंस्टीन, नॉर्वे और स्विट्जरलैंड) का एक मुक्त व्यापार क्षेत्र है। यह यूरोपीय संघ के साथ घनिष्ठ संबंध बनाए रखता है।

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