अतुल मिश्रा बनाम भारत संघ (2026) मामले में, उच्चतम न्यायालय ने एक प्रस्तावित फिल्म के शीर्षक (टाइटल) को चुनौती देने वाली रिट याचिका पर सुनवाई की। इस याचिका में आरोप लगाया गया था कि फिल्म का शीर्षक एक विशेष समुदाय के प्रति रूढ़िवादी है।
निर्णय के बारे में
- बंधुत्व के मूल्य के माध्यम से सामुदायिक गरिमा का संरक्षण:
- उच्चतम न्यायालय ने यह दोहराया कि जाति, धर्म, भाषा या क्षेत्र के आधार पर किसी भी समुदाय को बदनाम करना संवैधानिक रूप से अस्वीकार्य है।
- न्यायालय ने माना कि लोकतंत्र में स्वतंत्रता और समानता को बनाए रखने के लिए बंधुत्व अनिवार्य है।
- संविधान सभा की बहसों के दौरान, डॉ. बी.आर. अंबेडकर ने तर्क दिया था कि स्वतंत्रता, समानता और बंधुत्व मिलकर "त्रिमूर्ति का संघ" (union of trinity) बनाते हैं। इनमें से किसी एक को दूसरे से अलग करना लोकतंत्र के उद्देश्य को ही विफल करना है।
- संविधान के अनुच्छेद 19(1)(a) के तहत कलात्मक और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता:
- न्यायालय ने फिल्म निर्माताओं और कलाकारों के अपने विचारों को रचनात्मक माध्यमों से व्यक्त करने के अधिकार को मान्यता दी।
- हालांकि, यह अधिकार अनुच्छेद 19(2) के तहत युक्तियुक्त प्रतिबंधों के अधीन है, लेकिन ये प्रतिबंध आवश्यकता पर आधारित होने चाहिए, न कि केवल सुविधा या जनभावना के आधार पर।
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