यूनेस्को का अंतर-सरकारी समुद्र-विज्ञान आयोग (IOC) ने एकीकृत महासागर कार्बन अनुसंधान (IOC-R), 2026 रिपोर्ट जारी की है।
अंतर-सरकारी समुद्र-विज्ञान आयोग (IOC) के बारे में:
- उद्देश्य: महासागरों के बारे में बेहतर समझ विकसित करने के लिए अनुसंधान, सेवाओं और क्षमता निर्माण में अंतरराष्ट्रीय सहयोग को बढ़ावा देना और कार्यक्रमों का समन्वय करना।
- सदस्य: 152 देश। भारत भी सदस्य है।
- सचिवालय: पेरिस (फ्रांस)।
रिपोर्ट के मुख्य बिंदुओं पर एक नजर
- कार्बन सिंक: महासागर वायुमंडल में मौजूद अतिरिक्त CO₂ को अवशोषित करते हैं, जिससे ग्रीनहाउस गैसों की सांद्रता कम होती है।
- घुलनशीलता पंप: ठंडे समुद्री जल में CO₂ अधिक मात्रा में घुल जाती है और इसे गहरे महासागरीय स्तरों तक पहुँचाया जाता है। इस गहराई में ये दीर्घकाल तक भंडारित रहती है।
- भूमि–महासागर–हिम के बीच आदान-प्रदान: महासागर नदियों और पिघलती बर्फ के साथ कार्बन का आदान-प्रदान करते हैं। इस तरह महासागर वैश्विक कार्बन वितरण को प्रभावित करता है।
Article Sources
1 sourceभारत ने जिनेवा में निरस्त्रीकरण सम्मेलन (Conference on Disarmament – CD) के उच्च-स्तरीय सत्र 2026 के अधिदेश (मैंडेट) के आधार पर विखंडनीय सामग्री कट-ऑफ संधि (Fissile Material Cut-off Treaty: FMCT) पर वार्ता के प्रति अपना समर्थन व्यक्त किया है।
विखंडनीय सामग्री कट-ऑफ संधि (FMCT) के बारे में:
- FMCT एक प्रस्तावित अंतरराष्ट्रीय समझौता है।
- इसका उद्देश्य परमाणु हथियारों के दो मुख्य घटकों—उच्च संवर्धित यूरेनियम HEU) और प्लूटोनियम के उत्पादन पर प्रतिबंध लगाना है।
निरस्त्रीकरण सम्मेलन के बारे में:
- इसे वर्ष 1978 में संयुक्त राष्ट्र महासभा के 10वें विशेष निरस्त्रीकरण सत्र द्वारा एकमात्र बहुपक्षीय निरस्त्रीकरण वार्ता मंच के रूप में मान्यता दी गई थी।
- इस सम्मेलन में कुल 65 सदस्य देश शामिल हैं। इनमें भारत भी एक सदस्य है।
सैपियन लैब्स नामक गैर-लाभकारी संस्था ने ग्लोबल माइंड प्रोजेक्ट के तहत वैश्विक मस्तिष्क स्वास्थ्य 2025 (Global Mind Health 2025) रिपोर्ट जारी की है।
- यह रिपोर्ट मानसिक स्वास्थ्य लब्धि (Mind Health Quotient: MHQ) पर आधारित है।
- MHQ में मानसिक स्वास्थ्य के सभी पहलू शामिल हैं; जैसे कि- भावनात्मक, संज्ञानात्मक (सोचने-समझने की क्षमता), सामाजिक व्यवहार, प्रेरणा और तनाव से उबरने की क्षमता।
रिपोर्ट में भारत से जुड़े प्रमुख बिंदु:
- भारत में 18–34 वर्ष के युवा वयस्कों का औसत MHQ स्कोर 33 है जबकि वैश्विक औसत 66 है। इस आयु वर्ग में मानसिक स्वास्थ्य और सेहतमंदी में भारत की रैंक 60वीं है।
- इसके विपरीत, 55 वर्ष और उससे अधिक आयु के भारतीयों का MHQ स्कोर 96 है। इस आयु वर्ग में भारत की रैंक 49वीं है।
- 18–34 वर्ष आयु वर्ग में अल्ट्रा-प्रोसेस्ड खाद्य पदार्थों का सेवन करने वाले लोगों का अनुपात 44% है।
- ये खाद्य पदार्थ अवसाद में वृद्धि और भावनात्मक व संज्ञानात्मक नियंत्रण में कमी से संबंधित पाए गए हैं।
Article Sources
1 sourceहाल ही में, काजीरंगा–लाओखोवा–बुरहाचापोरी बाढ़ क्षेत्र परिसर में काजीरंगा जलीय पक्षी गणना कराई गई।
- इस गणना से फिर से पुष्टि हुई है कि यह क्षेत्र मध्य एशियाई फ्लाईवे (CAF) का एक अत्यंत महत्वपूर्ण केंद्र है।

लाओखोवा और बुरहाचापोरी वन्यजीव अभयारण्य के बारे में:
- ये दोनों अभयारण्य ब्रह्मपुत्र नदी के दक्षिणी तट पर स्थित हैं।
- ये काजीरंगा टाइगर रिजर्व के अधिसूचित बफर क्षेत्र हैं।
- इनके आसपास स्थित संरक्षित क्षेत्र हैं: पूर्व में काजीरंगा राष्ट्रीय उद्यान; पश्चिम में ओरांग राष्ट्रीय उद्यान और पोबितोरा वन्यजीव अभयारण्य; उत्तर में पक्के–नामेरी राष्ट्रीय उद्यान।
मध्य एशियाई फ्लाईवे (CAF) के बारे में:
- यह जलपक्षियों के कई महत्वपूर्ण प्रवासन मार्गों का एक समूह है। यह लगभग 605 प्रवासी पक्षी प्रजातियों का पर्यावास क्षेत्र है।
- इसका विस्तार आर्कटिक महासागर से हिंद महासागर तक है। यह मध्य यूरेशिया में 30 देशों में फैला हुआ है।
- यह अफ्रीकी-यूरेशियन फ्लाईवे और पूर्वी एशियाई-ऑस्ट्रेलियाई फ्लाईवे के साथ भी ओवरलैप करता है।
केंद्रीय पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्री ने द एनर्जी रिसर्च इंस्टीट्यूट (TERI) के 25वें विश्व सतत विकास शिखर सम्मेलन (WSDS) और हिम-कनेक्ट (Him-CONNECT) का उद्घाटन किया।
विश्व सतत विकास शिखर सम्मेलन (WSDS) के बारे में
- इस शिखर सम्मेलन की थीम है-"रूपांतरण: सतत विकास के लिए विजन, आवाजें और मूल्य"।
हिम-कनेक्ट (Him-CONNECT) के बारे में
- लक्ष्य: इसका लक्ष्य हिमालयी क्षेत्र में शोध कर रहे शोधकर्ताओं को स्टार्टअप्स, उद्योग जगत के नेतृत्व, निवेशकों और नीति-निर्माताओं के साथ जोड़कर विज्ञान और समाज के बीच एक सेतु बनाना है।
- यह केंद्रीय पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय (MoEFCC) द्वारा एक समर्पित मंच है।
- इसका कार्य मंत्रालय के 'राष्ट्रीय हिमालयी अध्ययन पर मिशन' (NMHS) के तहत समर्थित शोध को उन समाधानों में बदलना है जिन्हें बड़े पैमाने पर लागू किया जा सके।
पलामू टाइगर रिजर्व (PTR) ने वन्यजीवों की सुरक्षा के लिए महिलाओं के लिए 'वनजीवी दीदी' पहल शुरू की है।
- इस कार्यक्रम के तहत शिक्षित महिलाओं की पहचान की जाती है और उन्हें वन प्रशासन और स्थानीय परिवारों के बीच एक सेतु के रूप में कार्य करने के लिए प्रशिक्षित किया जाता है।
पलामू टाइगर रिजर्व (PTR) के बारे में
- अवस्थिति: यह झारखंड में छोटानागपुर पठार में स्थित पश्चिमी लातेहार जिले में है।
- ऐतिहासिक महत्व: यह 'प्रोजेक्ट टाइगर' की शुरुआत में देश में बनाए गए पहले 9 टाइगर रिजर्व्स में से एक है।
- बेतला नेशनल पार्क: यह पलामू टाइगर रिजर्व के मुख्य (कोर) क्षेत्र का हिस्सा है।
- प्राप्त वनस्पतियां: यहाँ मुख्य रूप से उत्तरी उष्णकटिबंधीय शुष्क पर्णपाती साल (Shorea robusta) के वन और बांस के झुरमुट पाए जाते हैं।
- जीव-जंतु: यहाँ बाघ, एशियाई हाथी, तेंदुआ और ग्रे भेड़िया आदि पाए जाते हैं।
- नदियां: कोयल, बुरहा और औरंगा नदियाँ इस रिजर्व से होकर बहती हैं।
हाल के एक अनुसंधान के अनुसार आर्द्र लू (Moist Heatwaves) का समय और स्थान दक्षिण-पश्चिम मानसून (SWM) के सक्रिय और विराम (break) चरणों द्वारा नियंत्रित होता है। इनका पूर्वानुमान हफ्तों पहले किया जा सकता है।
आर्द्र लू के बारे में
- आर्द्र लू वायुमंडल में उच्च तापमान और बढ़े हुए आर्द्रता स्तर के संयुक्त प्रभाव से उत्पन्न होती है।
- ये स्थितियां घातक हो सकती हैं क्योंकि अत्यधिक आर्द्रता पसीने को वाष्पित होने से रोकती है। इसके कारण शरीर के अंदर गर्मी जमा होने लगती है और शरीर तेजी से अत्यधिक गर्म हो जाता है।
वेट-बल्ब तापमान (Wet-bulb Temperature) के बारे में
- आर्द्रता और तापमान के संयुक्त प्रभाव को मापने का सबसे अच्छा तरीका 'वेट-बल्ब तापमान' है।
- वेट बल्ब तापमान वह न्यूनतम तापमान है, जिस तक हवा को जल के वाष्पीकरण के माध्यम से, स्थिर दाब (constant pressure) पर ठंडा किया जा सकता है।
Article Sources
1 sourceभारत सरकार के विज्ञान और प्रौद्योगिकी विभाग (DST) के एक संस्थान ने नया बायोसर्फैक्टेंट विकसित किया है। इसमें जीवाणुरोधी (antibacterial) और सफाई से जुड़ी प्रभावी विशेषताएँ पाई गई हैं।
बायोसर्फेक्टेंट के बारे में
- ये सतह-सक्रिय अणु होते हैं, जो बैक्टीरिया, यीस्ट और कवक सहित विभिन्न सूक्ष्मजीवों द्वारा निर्मित होते हैं।
- इनमें तरल पदार्थों, ठोस पदार्थों और गैसों के बीच पृष्ठ और अंतःस्रावी तनाव (surface and interfacial tension) को कम करने की विशिष्ट क्षमता होती है।
- पेट्रोलियम से प्राप्त सिंथेटिक सर्फेक्टेंट के विपरीत, बायोसर्फेक्टेंट बायोडिग्रेडेबल (जैव-अपघटनीय), पर्यावरण-अनुकूल और अक्सर कम विषाक्त होते हैं।
- संभावित उपयोग: बायोरेमेडिएशन में, स्वास्थ्य और चिकित्सा में, सौंदर्य प्रसाधन में, खाद्य प्रसंस्करण में।