राष्ट्रीय विज्ञान दिवस 2026 इस वर्ष मुख्य विषय (थीम) "विज्ञान के क्षेत्र में महिलाएं: विकसित भारत की उत्प्रेरक" के साथ मनाया जा रहा है। यह थीम विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी में महिलाओं की महत्वपूर्ण भूमिका को रेखांकित करती है।
- राष्ट्रीय विज्ञान दिवस प्रतिवर्ष 28 फरवरी को मनाया जाता है।
विज्ञान में महिलाओं की भूमिका और स्थिति
- महिलाओं द्वारा नेतृत्व:
- ऐतिहासिक: वैदिक विद्वान गार्गी वाचक्नवी से लेकर गणितज्ञ लीलावती तक, महिलाओं ने प्राचीन और मध्यकालीन भारत में विज्ञान में महत्वपूर्ण योगदान दिया है।
- आधुनिक नेतृत्व: आधुनिक युग की अग्रणी महिलाएं जैसे- कल्पना चावला (अंतरिक्ष विज्ञान), टेसी थॉमस (मिसाइल प्रोजेक्ट हेड), रितु करिधल श्रीवास्तव (स्पेस इंजीनियर) आदि।
- विज्ञान, प्रौद्योगिकी, इंजीनियरिंग और गणित (STEM) में महिलाओं का नामांकन: यह 2014-15 के 38.4% से बढ़कर 2021-22 में 42.6% हो गया है।
- वैश्विक हिस्सेदारी: अखिल भारतीय उच्चतर शिक्षा सर्वेक्षण (AISHE) के अनुसार, कुल महिला STEM स्नातकों में से 42.7% भारत से हैं।
- बढ़ती भागीदारी: संस्था-बाह्य (extramural) अनुसंधान एवं विकास (R&D) में महिलाओं की हिस्सेदारी 2000-01 के 13% से बढ़कर 2018-19 में 28% हो गई है। साथ ही, महिला शोधकर्ताओं की संख्या 2015 के 13.9% से बढ़कर 2018 में 18.7% हो गई।
विज्ञान के क्षेत्र में महिलाओं के समक्ष चुनौतियां
- प्रवेश में संरचनात्मक बाधाएं: उदाहरण के लिए- जबकि STEM नामांकन बढ़ रहा है, वास्तविक STEM कार्यबल में महिलाओं की हिस्सेदारी केवल लगभग 27% है।
- क्षेत्रकवार अंतराल: STEM नामांकन में इंजीनियरिंग (14.5%) की तुलना में स्वास्थ्य विज्ञान (24.5%) में अधिक महिला नामांकन है।
- कार्य-जीवन संतुलन की बाधाएं: देखभाल की असमान जिम्मेदारियों के कारण करियर में विराम आता है और STEM क्षेत्रकों में करियर प्रगति धीमी हो जाती है।
- नेतृत्व में कम प्रतिनिधित्व: निर्णय लेने वाली भूमिकाओं में कम उपस्थिति और "ग्लास सीलिंग" प्रभाव, जो पदोन्नति एवं क्षमता दृश्यता को सीमित करता है।
सरकारी पहलें और योजनाएं
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