यह निर्णय IIT खड़गपुर के एक अध्ययन के बाद लिया गया है। अध्ययन में सामने आया कि वितरण के लिए चावल का लंबे समय तक भंडारण करने से उसकी प्रभावी शेल्फ-लाइफ (खराब न होने की अवधि) कम हो रही है। इससे इच्छित पोषण संबंधी परिणाम सीमित हो रहे हैं।
- अध्ययन में इस तथ्य पर जोर दिया गया कि नमी, भंडारण की स्थिति, तापमान, सापेक्षिक आर्द्रता और पैकेजिंग सामग्री जैसे कारक 'फोर्टिफाइड राइस कर्नेल' (FRK) और 'फोर्टिफाइड राइस' (FR) की स्थिरता एवं शेल्फ-लाइफ को गंभीर रूप से प्रभावित करते हैं।
फ़ूड फोर्टिफिकेशन के बारे में
यह खाद्य आपूर्ति की पोषण गुणवत्ता में सुधार करने के लिए खाद्य में सूक्ष्म पोषक तत्वों (जैसे विटामिन और खनिज) की मात्रा को जानबूझकर बढ़ाने की प्रक्रिया है।
- विनियमन: FSSAI के खाद्य संरक्षा और मानक (खाद्य पदार्थों का फोर्टिफिकेशन) विनियम, 2018 के तहत विनियमन किया जाता है।
- पहलें: खाद्य सुरक्षा जाल कार्यक्रमों के तहत फोर्टिफाइड खाद्य की आपूर्ति, पीएम-पोषण (PM-POSHAN) योजना आदि।
- PMGKAY और अन्य सुरक्षा कार्यक्रमों के तहत वितरित होने वाले सभी कस्टम-मिल्ड चावल को मार्च 2024 तक फोर्टिफाइड चावल (FR) से बदल दिया गया था, जिसे दिसंबर 2028 तक वितरित किया जाना था।
- फोर्टिफाइड खाद्य पदार्थ:
- गेहूं का आटा और चावल: आयरन, विटामिन B12 और फोलिक एसिड के साथ।
- दूध और खाद्य तेल: विटामिन A और D के साथ।
- डबल फोर्टिफाइड नमक: आयोडीन और आयरन के साथ।
- महत्त्व:
- सूक्ष्म पोषक तत्वों की कमी को दूर करना: भारत में विटामिन A, आयोडीन, आयरन और फोलिक एसिड की कमी के कारण कुपोषण का व्यापक प्रसार है। इससे रतौंधी (Night Blindness), घेंघा (Goitre), एनीमिया और विभिन्न जन्म दोष होते हैं।
- आर्थिक लाभ: 'कोपेनहेगन सर्वसम्मति' का अनुमान है कि फोर्टिफिकेशन पर खर्च किए गए प्रत्येक 1 रुपये से अर्थव्यवस्था को 9 रुपये का लाभ होता है।