हाल ही में, पाविनी शुक्ला बनाम भारत संघ मामले में उच्चतम न्यायालय ने व्यक्तिगत कानूनों (Personal Laws) में व्याप्त लैंगिक भेदभाव को दूर करने के लिए UCC का सुझाव दिया है।
समान नागरिक संहिता (UCC) के बारे में
- इसका उद्देश्य धर्म, जाति, पंथ, लिंग या लैंगिक रुझान के भेदभाव के बिना, सभी नागरिकों के लिए धर्म-आधारित व्यक्तिगत कानूनों को एक समान कानून से बदलना है।
- संवैधानिक प्रावधान:
- अनुच्छेद 44: यह राज्य को भारत के संपूर्ण क्षेत्र में नागरिकों के लिए एक समान नागरिक संहिता सुरक्षित करने का प्रयास करने का निर्देश देता है।
- संघीय स्थिति: विवाह, तलाक, बच्चों को गोद लेना और उत्तराधिकार समवर्ती सूची (7वीं अनुसूची) का हिस्सा हैं। इन विषयों पर केंद्र और राज्य दोनों कानून बना सकते हैं।
UCC की आवश्यकता क्यों है?
- लैंगिक न्याय सुनिश्चित करना: UCC व्यक्तिगत कानूनों में भेदभावपूर्ण प्रथाओं को समाप्त करता है।
- पंथनिरपेक्षता को बढ़ावा देना: UCC यह सुनिश्चित करता है कि नागरिक कानून धार्मिक मान्यताओं से प्रभावित न हों, जिससे पंथनिरपेक्षता के सिद्धांत का पालन हो सके।
- कानूनी प्रक्रियाओं का सरलीकरण: विवाह, तलाक और विरासत से संबंधित कानूनी प्रक्रियाओं को सरल बनाता है।
- राष्ट्रीय एकता को बढ़ावा: धार्मिक और सामुदायिक विभाजनों से ऊपर उठकर, UCC साझा नागरिकता को बढ़ावा देता है और राष्ट्रीय एकता को मजबूत करता है।
भारत में UCC की वर्तमान स्थिति
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